रविवार, 29 सितंबर 2024

लिफ्ट के सामने दरवाजा भी है वास्तु दोष

यदि किसी मल्टी स्टोरी बिल्डिंग के फ्लैट के मुख्य द्वार के ठीक सामने लिफ्ट या सीढ़ियां हों, तो यह भी एक तरह का वास्तु दोष है। 

उपाय : इस दोष के अशुभ प्रभाव को कम करने के लिए फ्लैट के द्वार पर अष्टकोणीय दर्पण लगा देना चाहिए।-- प्रमोद कुमार अग्रवाल, सलाहकार एवं वास्तु लेखक, आगरा

धन हानि रोकने को वास्तु टिप्स

यदि प्रयासों के बावजूद धन हानि नहीं रुक रही हो तो धन, आभूषण, बैंक व डाकघर की पासबुक, चैकबुक व एफ.डी.आर., बीमा, शेयर, डिबेंचर आदि के कागजात आदि हमेशा ऐसी आलमारी में ही रखें जिसका दरवाजा उत्तर दिशा की तरफ खुलता हो. 

   जगह की कमी के कारण ऐसा संभव न हो तो आलमारी को पश्चिम दिशा में रख सकते हैं जिससे उसके दरवाजे पूर्व दिशा की ओर खुलें.-- प्रमोद कुमार अग्रवाल, वास्तु सलाहकार एवं लेखक, आगरा। 

हर घटना का संज्ञान लेने व निगरानी बढ़ाने के निर्देश

आगरा (प्रमोद कुमार अग्रवाल)। पुलिस कमिश्नर जे रविंदर गौड ने अपराध गोष्ठी के दौरान पुलिस कर्मियों से सिटीजन चार्टर के निर्देशों का पालन करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि पुलिसकर्मी हर छोटी से छोटी घटना का संज्ञान लें और अपराधियों पर कड़ी निगरानी रखें।

    पुलिस कमिश्नर ने कहा कि अगर जीरो एफआईआर लिखी जानी है तो पीड़ितों की शिकायत तत्काल दर्ज करें। सोशल मीडिया पर नजर रखें और हिस्ट्रीशीटरों व जेल से रिहा अपराधियों पर नजर रखें। सत्यापन या जांच में शिकायत मिलने पर दोषी पुलिस कर्मियों के विरुद्ध दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने जुआ, सट्टा, मादक पदार्थ आदि की तस्करी रोकने और अवैध खनन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के निर्देश भी दिए। 

    पुलिस कमिश्नर ने कहा कि महिलाओं से संबंधित अपराध में पुलिस कतई लापरवाही ना करे। थाना प्रभारी और एसीपी अपने अपने कार्यालयों में सुबह दस बजे से दोपहर बारह बजे तक जन सुनवाई कर शिकायतों का निस्तारण करें। उन्होंने कहा कि नई हिस्ट्रीशीट खोली जाए। पुराने हिस्ट्रीशीटरों की निगरानी की जाए। कोई भी विवेचना लंबित नहीं रखी जाए। अतिक्रमण के कारण यातायात बाधित न होने तथा प्रत्येक बीट के रजिस्टर का निरीक्षण करने के निर्देश भी एसीपी को दिए। (न्यूज़लाइन ब्यूरो) 

शनिवार, 28 सितंबर 2024

सूनी दीवार का दूर करें वास्तु दोष

भवन में प्रवेश करते समय ठीक सामने दीवार का होना वास्तु दोष है, जिसकी वजह से घर में अशांति रह सकती है.

उपाय : इस दोष को दूर करने के लिए दीवार पर गणेश जी का एक सुदंर चित्र फ्रेम करके लगा देना चाहिए. जो लोग चित्र न लगाना चाहें, वे दीवार पर दो मोरपंख टेप से चिपका कर लगा सकते हैं.- प्रमोद कुमार अग्रवाल, सलाहकार एवं ज्योतिष-वास्तु लेखक, आगरा। 

वास्तु दोष निवारण के आसान उपाय

@ सोने के कमरे में जूठे बर्तन, झाड़ू, तेल का पीपा, शराब, इमामदस्ता, अंगीठी आदि न रखें वरना धन हानि, रोग, मानसिक तनाव, गृह कलह होने का अंदेशा रहेगा.

@ रेलवे क्रॉसिंग या पुल की तरफ घर का दरवाजा होने से आर्थिक नुकसान हो सकता है. इस दोष के निवारण के लिए घर के बाहर की तरफ दरवाजे पर एक उत्तल दर्पण लगा देना चाहिए.

@ मानसिक तनाव की वजह से नींद न आती हो तो सोने से पहले कमरे में शुद्ध घी का दीपक और गुलाब की महक वाली अगरबत्ती जलानी चाहिए. -- प्रमोद कुमार अग्रवाल, सलाहकार एवं वास्तु लेखक, आगरा। 


सीए का परीक्षा कार्यक्रम घोषित

आगरा (प्रमोद कुमार अग्रवाल)। भारतीय चार्टर्ड एकाउंटेंट्स संस्थान द्वारा जनवरी 2025 सत्र की सीए फाउंडेशन और इंटरमीडिएट परीक्षा का कार्यक्रम घोषित कर दिया गया है। 

   कमला नगर निवासी सीए रचित अग्रवाल ने बताया कि संस्थान द्वारा घोषित कार्यक्रम के अनुसार सीए फाउंडेशन परीक्षा की शुरुआत नए साल में 12 जनवरी से और इंटरमीडिएट परीक्षा की शुरुआत 11 जनवरी से होगी। परीक्षा में शामिल होने के इच्छुक अभ्यर्थी संस्थान की अधिकृत वेबसाइट icai.org पर जाकर परीक्षा का विस्तृत कार्यक्रम देख सकते हैं। (न्यूज़लाइन ब्यूरो) 

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यूपी बोर्ड की परीक्षा में कम होंगे केंद्र

आगरा (प्रमोद कुमार अग्रवाल)। माध्यमिक शिक्षा परिषद उत्तर प्रदेश (यूपी बोर्ड) परीक्षा के लिए केंद्र निर्धारण की प्रक्रिया शुरू हो गई है। विद्यालयों का ऑनलाइन डाटा भरवाया जा रहा है। इस बार विगत वर्षों के मुकाबले परीक्षा केंद्र कम करके एक परीक्षा केंद्र पर 2000 तक परीक्षार्थी बैठाने की तैयारी है। 

    जिला विद्यालय निरीक्षक डॉक्टर मानवेंद्र सिंह ने बताया कि पिछले वर्ष एक परीक्षा केंद्र पर अधिकतम 1200 परीक्षार्थी बैठाने का नियम था। अब 2000 परीक्षार्थी बैठाने की मंजूरी दी गई है। इससे परीक्षा केंद्रों की संख्या कम होना तय है। वर्ष 2024 में 171 परीक्षा केंद्र बनाए गए थे। इस साल इससे कम परीक्षा केंद्र होंगे। 

    जिला विद्यालय निरीक्षक ने बताया कि वित्तविहीन विद्यालयों में परीक्षाओं के दौरान नकल कराने के मामले ज्यादा आते हैं। इसलिए शासन राजकीय और सहायता प्राप्त विद्यालयों को ही परीक्षा केंद्र बनाने का प्रयास करता है। शासन से परीक्षार्थियों की संख्या के बारे में आदेश आया है। इससे परीक्षा केंद्र कम होंगे। विवादित विद्यालयो को परीक्षा केंद्र बनाने की सूची से बाहर रखा जाएगा। (न्यूज़लाइन ब्यूरो) 

शुक्रवार, 27 सितंबर 2024

पीएम आवास के लिए नियमों में हुआ बदलाव

आगरा (प्रमोद कुमार अग्रवाल)। प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास योजना के पात्रता नियमों में बदलाव हुआ है। अब फ्रिज और मोटरसाइकिल रखने वाले एवं पंद्रह हजार रुपये मासिक आय अर्जित करने वाले लोग भी पीएम आवास के लिए आवेदन कर सकेंगे। नए पात्रों के लिए जल्द ही जिले में सर्वे शुरू होने जा रहा है। गांवों में दीवारों पर नई शर्तें लिखवाने के लिए भी निर्देश दिए गए हैं। 

   मुख्य विकास अधिकारी के अनुसार पीएम आवास योजना वर्ष 2024-25 से वर्ष 2028-29 तक के लिए पात्रों को चिह्नित किया जाएगा। पहले फ्रिज, मोटरसाइकिल या अन्य दोपहिया वाहन रखने वाले एवं दस हजार रुपये से अधिक आय वाले लोग पीएम आवास के लिए पात्र नहीं थे। उन्हें इस बार छूट दी गई है। ग्राम स्तर पर सर्वे कराकर खुली बैठकों में लाभार्थियों का चयन किया जाएगा। 

    मुख्य विकास अधिकारी के अनुसार नए नियमों के तहत अब दोपहिया वाहन, फ्रिज और पंद्रह हजार रुपये तक मासिक आय वाले लोग भी पीएम आवास के लिए लाभार्थी बन पाएंगे। इसके अलावा आश्रय विहीन परिवार, बेसहारा, भीख मांग कर गुजारा करने वाले परिवार, हाथ से मैला ढोने वाले परिवार, आदिम जनजातीय समूह से संबंधित परिवार और मुक्त कराए गए बंधुआ मजदूरों के परिवारों को भी प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत पात्रता की श्रेणी में शामिल किया गया है। अब इन्हें भी प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत लाभार्थी माना जाएगा। (न्यूज़लाइन ब्यूरो) 

आगरा के एसएन में है तंबाकू निवारण केंद्र

आगरा (प्रमोद कुमार अग्रवाल)। एसएन मेडिकल कॉलेज में तंबाकू खाने के लती लोगों के इलाज के लिए विशेष तंबाकू निवारण केंद्र शुरू किया गया है। केंद्र में तंबाकू के लती मरीजों का दवाई और काउंसलिंग के जरिए इलाज किया जाएगा। सुबह आठ बजे से दोपहर दो बजे तक मरीजों को देखा जाएगा। 

     एसएन मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉक्टर प्रशांत गुप्ता ने बताया कि स्वास्थ्य और परिवार कल्याण विभाग के निर्देशानुसार तंबाकू निवारण केंद्र की स्थापना ओपीडी कॉम्पलेक्स नंबर दो में की गई है। केंद्र को मनोचिकित्सक विभाग की ओर से संचालित किया जा रहा है। इसमें एक रुपये के पर्चे पर मरीजों का निशुल्क उपचार किया जाएगा। 

    केंद्र की नोडल प्रभारी डॉक्टर काश्यपी गर्ग ने बताया कि तंबाकू की लत छोड़ी जा सकती है। इसके लिए मरीजों को बताई गई दवाओं का सेवन करने के साथ ही काउंसलिंग का सहारा भी लेना होगा। तंबाकू निवारण केंद्र में कोई भी मरीज इलाज करा सकता है। दूसरे विभागों में कोई तंबाकू का लती मरीज आता है तो वह भी रेफर कर सकते हैं। (न्यूज़लाइन ब्यूरो) 

उपयोगी वास्तु सूत्र

@ घर के अंदर दरवाजे या खिड़की के सामने गीले वस्त्र न सुखाए, वरना रुपया नहीं टिकेगा. जगह की कमी की वजह से वस्त्र सुखाना मजबूरी हो तो दरवाजे व खिड़की पर पर्दा लगाएं.

@ यदि घर के अंदर चौखट लकड़ी की हैं तो दरवाजे लकड़ी के और यदि चौखट लोहे की हैं तो दरवाजे लोहे के ही लगवाएं अन्यथा घर में अशांति बनी रह सकती है.

@ घर के दक्षिण-पश्चिम (नैरुत्य कोण) में सबसे ऊंची जगह बनाकर पानी की टंकी रखनी चाहिए. किसी और दिशा में रखी पानी की टंकी बनते हुए कार्यों में रूकावट पैदा कर सकती है.

@ घर का फर्श उत्तर-पूर्व की तरफ नीचा और दक्षिण-पश्चिम में ऊंचा होना चाहिए. इसके विपरीत होने पर बिना मतलब के वाद-विवाद, धन की हानि व मानसिक कष्ट होने का अंदेशा रहेगा.

@ घर में उत्तर व पूर्व दिशा में अधिक खाली जगह और खिड़की-दरवाजे व बालकॉनी होने से वहां सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है और शुभ फल मिलते है.-- प्रमोद कुमार अग्रवाल, वास्तु सलाहकार एवं लेखक, आगरा। 

प्रवेश द्वार व वाहन पार्किंग के लिए वास्तु नियम

@ भवन का मुख्य प्रवेश द्वार (मेन ऐन्ट्रेन्स), खिड़कियों के आकार से बड़ा होना आवश्यक है. इसके विपरीत होने पर शारीरिक व मानसिक स्वास्थ्य बिगड़ने की संभावना रहती है.

@ भवन में वाहनों की पार्किंग पश्चिम व दक्षिण दिशा में होनी चाहिए. पूर्व, उत्तर या उत्तर-पूर्व में वाहन पार्क करने से कार्यों में रूकावट, धन का अपव्यय एवं मानसिक कष्ट हो सकता है.-- प्रमोद कुमार अग्रवाल, सलाहकार एवं वास्तु लेखक, आगरा.

सुखी जीवन के लिए वास्तु टिप्स

@ किचन या कमरे में खाली डिब्बे न रखें बल्कि उनमें कुछ न कुछ सामान अवश्य रखें.

@ पूजा स्थल या मंदिर में कभी भी रुपया-पैसा छुपाकर न रखें.

@ कमरे की दीवार और फर्श की टाइल्स का रंग काला या लाल नहीं होना चाहिए.

@ सोने के कमरे में नाइट बल्व लगाने के लिए सही दिशा उत्तर-पूर्व यानि ईशान कोण है.

@ घर के अंदर बगीचे में कांटेदार और दूध वाले पेड-पौधे नहीं लगाने चाहिए.-- प्रमोद कुमार अग्रवाल, वास्तु सलाहकार एवं लेखक

सही दिशा में लगाएं दीवार घड़ी

@ दक्षिण दिशा को छोड़ कर किसी भी अन्य दिशा की दीवार पर घड़ी लगा सकते हैं.

@ घर में बंद, खराब या टूटे शीशा वाली घड़ी न लगाएं.

@ यदि घर में एक से अधिक घड़ी लगी हों तो उनमें अलग-अलग समय न हो और न ही कोई घड़ी तय समय से पीछे हो.

@ खिड़की या दरवाजे के पास या ठीक ऊपर घड़ी न लगाएं.

@ बेड रूम में गोल तथा ड्रॉइंग रूम में चौकोर घड़ी लगाएं. -- प्रमोद कुमार अग्रवाल, सलाहकार एवं वास्तु लेखक, आगरा.

वास्तु शास्त्र के अनुसार बनाएं सेप्टिक टैंक

@ किसी भवन में सेप्टिक टैंक का आउटलेट बनाने की सही दिशा उत्तर या पश्चिम है.जगह कम हो तो पश्चिम दिशा के वायव्य कोण में भी बना सकते हैं.

@ सेप्टिक टैंक कंपाउंड वॉल से एक से दो फुट जगह छोड़ कर पूर्व-पश्चिम में लंबा तथा दक्षिण-उत्तर में चौड़ा बनाना चाहिए.

@ ईशान, आग्नेय और नैरित्य कोण में सेप्टिक टैंक नहीं बनाना चाहिए.

@ सेप्टिक टैंक के अंदर पानी का हौज पूर्व एवं मैले का हौज पश्चिम दिशा की ओर होना चाहिए.-- प्रमोद कुमार अग्रवाल, वास्तु सलाहकार एवं लेखक, आगरा

अग्निहोत्र से करें वास्तु दोष निवारण

   अपने सुधी पाठकों के अनुरोध पर बिना तोड़ फोड़ किए भवन के वास्तु दोष के अशुभ असर को कम करने हेतु एक आसान उपाय दिया जा रहा है. हमें विश्वास है कि पूर्ण श्रृद्धा और विश्वास के साथ किया गया उपाय सकारात्मक फल अवश्य देगा.

    तांबे के एक पिरामिड आकार के हवन कुंड में प्रात: सूर्योदय और सांय सूर्यास्त के समय गाय के गोबर से बने कंडे के कुछ टुकडे कपूर एवं गाय का शुद्ध घी डाल कर जलाएं. धूंआ बंद होने पर परिवार के सभी सदस्यों द्वारा एक साथ मिलकर थोडी हवन सामग्री, चावल और गाय के घी की पांच बार आहुति देते हुए अपने इष्ट देव और सूर्य, विष्णु, कुबेर, यम, वायु एवं चन्द्र देवता से समस्त दोषों को दूर करने की प्रार्थना करनी चाहिए.-- प्रमोद कुमार अग्रवाल, वास्तु सलाहकार और लेखक, आगरा

बुधवार, 25 सितंबर 2024

विथिशूल दूर करने का आसान उपाय

यदि किसी भवन के मुख्य प्रवेश द्वार के सामने कोई सड़क या गली का रास्ता आकर रुकता है या फिर वहां से निकलता है, तो वास्तु शास्त्र में इसे विथिशूल दोष कहा जाता है. इस दोष के कारण वहां रहने वालों को कष्ट, धन हानि, अशांति आदि समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है.

उपाय : इस दोष के अशुभ प्रभाव को कम करने के लिए मुख्य द्वार पर शिव यंत्र या दुर्गा यंत्र स्थापित करके उसके ऊपर लाल रंग का जीरो वाट का बल्व जलाना चाहिए.-- प्रमोद कुमार अग्रवाल, वास्तु सलाहकार एवं लेखक, आगरा। 

न हो गलत दिशा में जल स्रोत

@ किसी भी भवन में जल यानि पानी का कोई भी स्रोत जैसे बोरिगं, ट्यूबवैल, कुआं, हैंडपंप, भूमिगत जल टैंक आदि सदैव उत्तर-पूर्व दिशा (ईशान कोण) में ही होना चाहिए. वास्तु की दृष्टि से यह शुभ माना गया है.

@ उत्तर-पूर्व के अलावा किसी दूसरी दिशा में जल स्रोत के होने से निम्न समस्याएं हो सकती हैं :-

* दक्षिण में - महिलाओं को कष्ट;

* पश्चिम में - पेट एवं इन्द्रिय रोग;

* उत्तर-पश्चिम में - शत्रुओं से परेशानी;

* दक्षिण-पूर्व में - पुत्र संतान से कष्ट;

* दक्षिण-पश्चिम में - मृत्यु के समान कष्ट;

* ब्रह्मस्थान (मध्य) में - धन की हानि.

-- प्रमोद कुमार अग्रवाल, सलाहकार एवं वास्तु लेखक, आगरा

दुकान के लिए सरल वास्तु नियम

## निजी व्यापार के लिए वर्गाकार या आयताकार सिंह मुखी दुकान शुभ मानी जाती है. दुकान के काउंटर पर बैठते समय चेहरा पूर्व या उत्तर दिशा की तरफ हो.

## दुकान में मंदिर ईशान कोण में ही रखें. जगह के अभाव में उत्तर या पूर्व में भी रख सकते हैं. रुपये-पैसे रखने का गल्ला या कैश बॉक्स उत्तर दिशा में रखें और उसे कभी भी खाली न रहने दें.

## दुकान में शो-केस व भारी सामान दक्षिण व पश्चिम में ही लगाएं, जगह के अभाव में उत्तर पूर्व में हल्के वजन का सामान रख सकते हैं.

## दुकान के सामने किसी तरह की कोई बाधा न हो. दुकान के अंदर टांड या छत पर कमरा दक्षिण या पश्चिम दिशा में ही बनवाएं, पूर्व व उत्तर को खाली रखें. -- प्रमोद कुमार अग्रवाल, सलाहकार एवं वास्तु लेखक, आगरा। 

मंगलवार, 24 सितंबर 2024

सही दिशा में सोने से मिलता है लाभ

@ वास्तु शास्त्र में दक्षिण दिशा में पैर करके सोना निषिद्ध माना गया है. इस दिशा में पैर करके सोने से बुरे सपने दिखाई देना, नींद में व्यवधान एवं मानसिक व शारीरिक स्वास्थ्य बिगड़ने जैसी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता हैं.

@ वास्तु नियमों के अनुसार पूर्व दिशा में पैर करके सोने से समृद्धि आती है, पश्चिम में पैर करके सोने से धार्मिक भावना में वृद्धि होती है, जबकि उत्तर में पैर करके सोने से धन लाभ होता है.-- प्रमोद कुमार अग्रवाल, वास्तु लेखक एवं सलाहकार, आगरा। 

वास्तु दोष निवारक गणेश जी

@ गणेश जी की आराधना भवन के वास्तु दोषों को कम करने में सहायक होती है. अगर भवन के मुख्य द्वार पर बाहर की ओर एकदंत गणेश जी की मूर्ति या चित्र लगाएं तो उसके दूसरी तरफ ठीक उसी जगह पर अंदर की ओर वैसे ही गणेश जी की दूसरी प्रतिमा या चित्र इस तरह लगाएं कि गणेश जी की पीठ मिली रहें.

@ भवन के जिस भाग में वास्तु दोष हो उस स्थान पर शुद्ध घी मिश्रित सिन्दूर से दीवार पर स्वास्तिक बना दें.

@ घर, दुकान या व्यापार स्थल के किसी भी भाग में गणेश जी की प्रतिमा अथवा चित्र लगा सकते हैं, किन्तु इतना ध्यान रखें कि इनका मुख दक्षिण दिशा या नैऋत्य कोण में न रहे. 

@ सर्व मंगल के लिए सिन्दूरी रंग के तथा सुख, समृद्धि व शांति के लिए सफेद रंग के गणेश जी की आराधना उत्तम मानी गई है. गणेश जी की मूर्ति अथवा चित्र में सूंड उनके बाएं हाथ की ओर घूमी हुई हो, दाएं हाथ की ओर घूमी हुई सूंड वाले गणेश जी की आराधना कठिन होती है।-- प्रमोद कुमार अग्रवाल, वास्तु लेखक एवं सलाहकार, आगरा। 

सोमवार, 23 सितंबर 2024

अच्छी सेहत के लिए उपयोगी वास्तु टिप्स

@ याददाश्त कम होने लगी हो तो शुक्ल पक्ष के बुधवार को घर के ईशान कोण में सफेद रंग के गणेश जी की मूर्ति या तस्वीर रखकर नियमित पूजा करें.

@ ह्रदय संबंधी बीमारी हो तो डॉक्टरी उपचार के साथ-साथ सोने के कमरे में दक्षिण दिशा में बागुआ गणपति लगाकर आराधना करें.

@ हड्डी, दिमाग व वात रोग से बचाव के लिए घर के उत्तर-पश्चिम भाग में भारी वजन का सामान न रखें.

@ घर के अंदर कांटेदार पौधे लगे होने से ब्लडप्रेशर और दूध वाले पौधे होने से सांस, मूत्र एवं किडनी से जुड़ी बीमारी हो सकती हैं. घर में ऐसे पौधे न लगाएं.

@ डायबिटीज के मरीजों को अपने घर में किसी तरह का टूटा-फूटा सामान जैसे फर्नीचर, शीशा, पलंग, बर्तन, सिल-बट्टा आदि नहीं रखना चाहिए. इसके अलावा वे ईशान कोण में बावुआ गणपति स्थापित करें तथा दक्षिण-पश्चिम में भारी सामान रख दें.-- प्रमोद कुमार अग्रवाल, सलाहकार एवं ज्योतिष-वास्तु लेखक, आगरा। 

सकारात्मक ऊर्जा व तरक्की के लिए घोड़े

@ चीनी वास्तुशास्त्र 'फेंगशुई' के अनुसार घर, दुकान, फैक्ट्री या व्यापारिक स्थल में दक्षिण दिशा की दीवार पर दौड़ते हुए सात सफेद घोड़ों की तस्वीर लगाना शुभ माना गया है. इससे पॉजिटिव एनर्जी, सुख, शांति, तरक्की व धन लाभ मिलने की संभावनी बनी रहती है.

@ घर-परिवार में आपसी स्नेह-प्रेम व सहयोग बनाए रखने के लिए ड्राइंगरूम में दौड़ते घोड़ों की तस्वीर के साथ-साथ बेडरूम में तांबा, पीतल, चांदी आदि धातु से बनी घोड़े की एक जोड़ी मूर्ति दक्षिण-पश्चिम में रखें.

@ घोड़ों की तस्वीर या मूर्ति लगाते समय यह अवश्य ध्यान रखें कि घोड़े प्रसन्न मुद्रा में अंदर की तरफ आते हुए हों तथा लगाम में न बंधे हों-- प्रमोद कुमार अग्रवाल, वास्तु लेखक एवं सलाहकार, आगरा। 

छत पर पानी की टंकी के लिए सही दिशा

@ घर में पानी की सप्लाई देने के लिए छत पर टंकी (ओवरहेड वाटर टैंक) रखते हैं. गलत दिशा में रखी टंकी से वास्तु दोष उत्पन्न होता है. 

@ वास्तु नियमों के अनुसार, छत पर सिर्फ पश्चिम, दक्षिण या दक्षिण-पश्चिम दिशा में ही टंकी रखनी चाहिए, पूर्व, उत्तर या ईशान्य में टंकी रखने से सेहत व धन की समस्या बनी रह सकती है.

@  टंकी को सीधे ही छत पर न रखें बल्कि छोटा व पक्का चबूतरा या चार छोटे पिलर बनवाकर ही रखें.-- प्रमोद कुमार अग्रवाल, वास्तु सलाहकार, आगरा। 

जमीन का आकार देखना भी है जरूरी

@ वास्तुशास्त्र के अनुसार आयताकार, वर्गाकार, षटभुजाकार, गोल, गौमुखी (सामने से कम व पीछे से अधिक चौड़ी) जमीन रहने के लिए शुभ तथा लाभप्रद होती है. 

@ वहीं तिकोनी, विषम, अंडाकार, चक्राकार, सिंहमुखी (आगे से अधिक तथा पीछे से कम चौड़ी) जमीन पर मकान बनाकर रहना कष्टकारी हो सकता है. 

@ रहने के उद्देश्य से जमीन खरीदते समय उसके आकार को भी अवश्य देख लेना चाहिए कि वह शुभ है या अशुभ. -- प्रमोद कुमार अग्रवाल, वास्तु लेखक एवं सलाहकार, आगरा। 

कर्म,भाग्य और वास्तु

@ मनुष्य के जीवन में कर्म की प्रधानता को महत्व दिया गया है, परंतु परम सत्य यह भी है कि प्रत्येक मनुष्य का अपना भाग्य भी जीवन को सर्वाधिक प्रभावित करता है.

@  यदि मनुष्य के कर्म अच्छे हों, रहने एवं व्यापार करने वाली जगह वास्तु के अनुरूप बनी हुई हो तथा अपने इष्ट देव पर अटूट विश्वास हो तो कुंडली में बैठे ग्रह और भाग्य की प्रतिकूलता का बहुत ज्यादा अशुभ असर मनुष्य पर नहीं पड़ता है और जीवन यात्रा आसानी से चलती रहती है.-- प्रमोद कुमार अग्रवाल, वास्तु आचार्य एवं लेखक, आगरा। 

रविवार, 22 सितंबर 2024

वास्तु दोष दूर करने के लिए सहयोगी वस्तुएं

## किसी आवासीय या व्यावसायिक भवन के वास्तुदोष को दूर करने का सर्वश्रेष्ठ तरीका तो उस दोष को ही स्थाई रूप से हटा देना है, लेकिन कभी-कभी कई कारणों से यह संभव नहीं हो पाता है.

##  वास्तुशास्त्र एवं फेंग शुई के अनुसार पिरामिड, विंडचाइम, मछलीघर, श्रीयंत्र, वास्तुदोष निवारण यंत्र, दर्पण, क्रिस्टल बॉल, नमक, फिटकरी, पानी, रंग, पौधे, धार्मिक प्रतीक (जैसे ओम, स्वास्तिक, मंगल कलश, पंचागुलक हाथ आदि), गणपति, पंचमुखी हनुमान, मोरपंख, बांसुरी, तस्वीरें आदि के सही उपयोग से विभिन्न वास्तुदोषों के अशुभ असर से काफी हद तक बचा जा सकता है. 

## वास्तु दोष दूर करने वाली वस्तुओं का प्रयोग किसी अनुभवी एवं योग्य वास्तुविद् की सलाह के बाद ही करना चाहिए वरना फायदे की बजाय हानि उठानी पड़ सकती है.-- वास्त आचार्य एवं लेखक प्रमोद कुमार अग्रवाल, आगरा। 

वास्तु दोष दूर करने के लिए रखें एक्वेरियम

@ घर में जल तत्व के संतुलन हेतु एक्वेरियम रखा जाता है. वास्तु दोष दूर करने के साथ-साथ सकारात्मक ऊर्जा, सौभाग्य और प्रसन्नता पाने के लिए घर की उत्तर दिशा में ड्राइंग रूम या लॉबी में कम से कम नौ मछलियों वाला एक्वेरियम रखा जा सकता है. 

@ बेडरूम, किचन एवं ब्रह्मस्थान में एक्वेरियम नहीं रखना चाहिए अन्यथा मानसिक तनाव व नींद न आने की समस्या हो सकती है. किसी भी कार्य के लिए घर से बाहर जाते समय मछलियों का दर्शन करना शुभ माना गया है. 

@ एक्वेरियम एवं मछलियों की देखरेख एवं सफाई रखना बहुत जरुरी है. यदि कोई मछली मर जाए तो उसे तुरंत हटाकर नई मछली रख देनी चाहिए.-- प्रमोद कुमार अग्रवाल, वास्तु आचार्य एवं लेखक, आगरा। 

वास्तु दोष भी दूर करती है बांसुरी

भगवान श्री कृष्ण की प्रिय बांसुरी का उपयोग घर के वास्तु दोष दूर करने, पॉजिटिव एनर्जी लाने तथा अचानक आने वाली समस्याओं से बचाव के लिए आसान उपाय है. 

   इस हेतु लकड़ी या धातु की बांसुरी को घर के मुख्य द्वार, बेडरूम के दरवाजे, दीवार या बीम पर लगा सकते हैं, वहीं घर में सुख, शांति, प्रेम व उत्साह के लिए पूजाघर में बांसुरी के साथ मोरपंख रखना चाहिए.

   बीमार व्यक्ति शीघ्र स्वास्थ्य लाभ हेतु बांसुरी को अपने तकिये के नीचे रखकर सो सकते हैं.-- प्रमोद कुमार अग्रवाल, वास्तु आचार्य एवं लेखक, आगरा। 

उपयोगी वास्तु टिप्स

# नकद रकम, बैंक व डाकघर की पासबुक, चैक, बीमा व शेयर के कागज आदि रखने की आलमारी गलत दिशा में रखी हो तो अनावश्यक खर्चे बढ़ते हैं. इसलिए आलमारी को हमेशा दक्षिण या पश्चिम में ही रखें.

# मकान की किसी भी दिशा या कोण की दीवार से पेड़ की टहनियों का स्पर्श होना वास्तु दोष है, जिससे रोग,आर्थिक नुकसान,अनिद्रा व घर में कलह होने का अंदेशा बना रहता है. बचाव के लिए समय-समय पर उन टहनियों को छांटते रहें.- प्रमोद कुमार अग्रवाल, वास्तु आचार्य एवं लेखक, आगरा.

वास्तु नियमों के अनुसार करें साज-सज्जा

जगह की कमी व मकान की समस्या को देखते हुए आजकल एक या दो कमरों के छोटे मकान व फ्लैट प्रचलन में हैं, जिनमें वास्तु नियमों के अनुसार सभी व्यवस्थाएं होना असंभव है. ऐसी दशा में अगर उस मकान को पूर्ण वास्तु मानते हुए वहां की साज-सज्जा वास्तु नियमों के अनुरूप की जाए तो निश्चय ही वहां रहने वाले सुखी, संपन्न व निरोगी बने रह सकते हैं.

   इसके लिए चूल्हा आग्नेय कोण में, आलमारी व भारी सामान नैरुत्य कोण में, पानी से भरे बर्तन व पूजाघर ईशान कोण, उत्तर या पूर्व में, पूर्वजों की तस्वीर दक्षिण दीवार पर, घड़ी पूर्व, उत्तर या पश्चिम दीवार पर तथा सोने की व्यवस्था दक्षिण या पश्चिम दिशा में की जा सकती है.-- प्रमोद कुमार अग्रवाल, वास्तु आचार्य एवं लेखक, आगरा। 

शुक्रवार, 20 सितंबर 2024

गुरु ग्रह का प्रतिनिधित्व करता है ईशान कोण

# वास्तु शास्त्र के अनुसार किसी भी भवन की उत्तर-पूर्व दिशा ( ईशान कोण) गुरु ग्रह को प्रभावित करने वाली मानी गयी है. इस दिशा के स्वामी भगवान शिव तथा तत्व जल यानि पानी है. # यह दिशा किसी भी वास्तु के लिए सबसे अधिक महत्व रखती है और बद्धि, विवेक, साहस, धैर्य, सेहत, पुत्र, सम्पन्नता एवं सम्पत्ति प्रदान करती है. इसीलिए इस दिशा को नीचा, खुला, साफ-सुथरा व पवित्र बनाए रखने पर बल दिया जाता है. 

# ईशान कोण में मंदिर या पूजा स्थल बनाना श्रेष्ठ रहता है, लेकिन ध्यान यह रखना चाहिए कि मंदिर में केवल देवी-देवता ही स्थापित किए जाएं, किसी भी गुरु, साधु-महात्मा या मृत परिजनों की तस्वीर या मूर्ति को मंदिर में नहीं रखना चाहिए. 

# यह दिशा भूमिगत जल स्रोत जैसे हैण्डपंप, समर, अण्डरग्राउण्ड वाटर टैंक, बारामदा, बालकनी आदि बनवाने के लिए भी उत्तम है. 

# यहां टॉयलेट, स्टोर, कबाड़घर, ओवरहेड वाटर टैंक, सैप्टिक टैंक, सीढ़ी आदि बने होना वास्तु दोष है, जिससे कई मानसिक, शारीरिक व आर्थिक समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है. --प्रमोद कुमार अग्रवाल, वास्तु आचार्य एवं ज्योतिष-वास्तु लेखक, आगरा। 

मरीज को स्वस्थ रखने के लिए वास्तु टिप्स

# यदि घर-परिवार में कोई सदस्य किसी रोग से ग्रस्त हो तो शीघ्र स्वास्थ्य लाभ के लिए रोगी सदस्य को कमरे की दक्षिण-पश्चिम दिशा (नैरुत्य कोण) में सुलाएं और उसे दी जाने वाली दवाएं उत्तर-पूर्व दिशा (ईशान कोण) में रखते हुए ईशान कोण की तरफ मुंह करके ही सेवन कराएं.

# अगर रोगी को बेचैनी, घबराहट व परेशानी अधिक महसूस हो रही हो तो उसके कमरे के ईशान कोण में एक मिट्टी या तांबे के बर्तन में बर्फ के टुकड़े या ठंडा पानी डाल कर रख दें.

# अगर घर के मुखिया या प्रमुख व्यक्ति आए दिन बीमार बने रहते हैं और इलाज के बावजूद स्वास्थ्य में ज्यादा फायदा होता न दिख रहा हो तो घर के नैरुत्य कोण (दक्षिण-पश्चिम विदिशा) पर नजर डालिए. यदि घर का यह कोना खाली है तो तत्काल इस कोने में भारी सामान रख दें. नैरुत्य कोण में यदि कोई कमरा या कोठरी बनी हुई हो तो उसे कबाड़घर के रूप में उपयोग करना शुरू कर दें.--प्रमोद कुमार अग्रवाल, वास्तु आचार्य एवं लेखक, आगरा। 

सही दिशा में लगाएं मनी प्लांट

@ घर में सुख-समृद्धि एवं धन लाभ की अभिलाषा के साथ मनी प्लांट लगाया जाता है. गलत दिशा में लगा मनी प्लांट बजाय लाभ के, नुकसान भी पंहुचा सकता है.

@ मनी प्लांट को हमेशा घर में आग्नेय (दक्षिण-पूर्व) दिशा में ही लगाना चाहिए, क्योंकि इस दिशा के देवता गणेश व प्रतिनिधि ग्रह शुक्र हैं. दोनो ही मंगलकारी व सुख-समृद्धि देने वाले हैं.

@ मनी प्लांट को कभी भी ईशान (उत्तर-पूर्व) दिशा में नहीं लगाना चाहिए, क्योंकि इस दिशा के प्रतिनिधि ग्रह गुरु हैं जिनकी शत्रुता शुक्र ग्रह से है. इसलिए ईशान कोण में लगा मनी प्लांट नकारात्मक ऊर्जा और आर्थिक नुकसान दे सकता है.-- प्रमोद कुमार अग्रवाल, वास्तु आचार्य एवं लेखक, आगरा.

उपयोगी वास्तु टिप्स

@ घर के अंदर बंद व खराब घड़ी तथा इलेक्टॉनिक सामान, टूटे बर्तन व दर्पण, खंडित देव मूर्ति, केक्टस का पौधा और युद्ध, डरावने, हिंसक पशु व पक्षी के चित्र कभी न रखें अन्यथा घर में नकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह रहने से अशुभ फल मिलने लगते हैं.

@ घर के अंदर आंगन में अथवा मुख्य प्रवेश द्वार के पास पूर्व या उत्तर दिशा में तुलसी का पौधा लगाकर प्रतिदिन प्रात: व सांय शुद्ध घी का दीपक जलाना चाहिए. ऐसा करने से वास्तु दोष दूर होकर घर में सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है.--प्रमोद कुमार अग्रवाल, वास्तु आचार्य एवं लेखक, आगरा। 

मोरपंख से भी दूर हो सकता है वास्तु दोष

@ बांसुरी एवं मोरपंख भगवान श्रीकृष्ण को प्रिय हैं. इसलिए इनकी पूजा में दोनों का ही उपयोग होता है. वास्तु दोष निवारण में भी इनका अपना महत्व है.

@ घर व कार्यस्थल के वास्तु दोष को दूर करके सकारात्मक ऊर्जा लाने तथा परिवार में स्नेह-प्रेम, सद्भाव, शांति व उत्साह की वृद्धि के लिए मेन गेट, बेडरूम के दरवाजे व छत या टांड़ की बीम पर बांसुरी लगा सकते हैं. वहीं बीमारी से जल्दी छुटकारा पाने के लिए बांसुरी को तकिये के नीचे रखकर भी सो सकते हैं.

@ अगर घर का मेन गेट, किचन, मंदिर या बेडरूम गलत दिशा में हो तो, दो से सात की संख्या में कलावा या मौली बांध कर मोरपंख लगा सकते हैं.

@ पति-पत्नी के मध्य बेहतर रिश्ता बनाए रखने के लिए बेडरूम की पूर्व या उत्तर दिशा की दीवार पर राधा-कृष्ण की साथ में आलिंगनबद्ध या झूला झूलते हुए तस्वीर लगा सकते हैं.--प्रमोद कुमार अग्रवाल, वास्तु आचार्य एवं लेखक, आगरा। 

बेडरूम में ड्रेसिंग टेबल के लिए वास्तु नियम

महिलाओं के लिए ड्रेसिंग टेबल एक अनिवार्य आवश्यकता है. बेडरूम में इसे पूर्व या उत्तर दिशा में इस तरह रखना चाहिए कि सोते समय उसमें लगे दर्पण (शीशे) में शरीर का कोई भी अंग दिखाई न दे. यदि ऐसा है तो सोने से पहले ड्रेसिंग टेबल के दर्पण पर मोटा पर्दा या चादर ढ़क देनी चाहिए. 

   ड्रेसिंग टेबल की दराज में देवी-देवता के फोटो, मूर्ति या लॉकेट तथा किसी तरह की धारदार वस्तुएं भी नहीं रखनी चाहिए अन्यथा पति-पत्नी में तनाव व स्वास्थ्य समस्या होने की संभावना बनी रहती है.--प्रमोद कुमार अग्रवाल, वास्तु सलाहकार एवं लेखक, आगरा। 

नया घर वास्तु अनुरूप है या नहीं

यदि खरीदे गए नए घर में प्रवेश करने से पहले अथवा पुराने घर में मरम्मत या किसी भाग में फेरबदल कराने से पहले सब कुछ अच्छा चल रहा हो, घर में शांति, प्रेम व धन आगमन की स्थिति बेहतर रही हो, परंतु इसके बाद ही घर-परिवार में हारी-बीमारी, तनाव, अशांति, धन की हानि, तरक्की में रुकावट, व्यवसाय में नुकसान, बच्चों की पढ़ाई में बाधा, पति-पत्नी में कलह, शत्रु भय, चोरी, आगजनी व आकस्मिक दुर्घटना जैसी समस्याएं आने लगें तो यह माना जा सकता है कि खरीदा गया नया घर या पुराने घर में किया गया बदलाव वास्तु नियमों के विपरीत है. ऐसी दशा में किसी कुशल व अनुभवी वास्तुविद् की सलाह के अनुसार घर के वास्तु दोष को दूर करा लेना चाहिए, जिससे कि सुखद, सुरक्षित व कष्टमुक्त जीवन बिताया जा सके. --प्रमोद कुमार अग्रवाल, वास्तु आचार्य एवं ज्योतिष-वास्तु लेखक, आगरा। 

उपयोगी वास्तु टिप्स

@ घर की दक्षिण-पूर्व दिशा यानि आग्नेय कोण में पति-पत्नी का बेडरूम होना वास्तु शास्त्र के अनुसार दोषपूर्ण है. यदि ऐसा है तो पति-पत्नी में मनमुटाव, कलह व क्रोध के अलावा इस दिशा में सोने वालों में हाई ब्लडप्रेशर, डायबिटीज, अनिद्रा, तनाव और सिर में दर्द जैसी बीमारियां होने की संभावना बनी रहती है। 

@ वास्तु शास्त्र के अनुसार दक्षिण दिशा पवनपुत्र हनुमान जी के अतुलित बल के संदर्भ में अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है। दक्षिण दिशा में हनुमान जी की तस्वीर लगाने तथा नियमित रूप से लाल रंग के आसन पर बैठकर हनुमान चालीसा का पाठ करते रहने से घर में आने वाली सभी नकारात्मक प्रभाव और वास्तु दोष दूर होने लगते है, लेकिन इसके लिए यह आवश्यक है कि घर में मांसाहार एवं शराब आदि नशीले पदार्थों का सेवन बिल्कुल भी न किया जाए। --प्रमोद कुमार अग्रवाल, वास्तु आचार्य एवं लेखक, आगरा। 

गुरुवार, 19 सितंबर 2024

सकारात्मक ऊर्जा के लिए करें उपाय

वास्तु शास्त्र के अनुसार घर या कार्य स्थल पर सकारात्मक ऊर्जा यानि पॉजीटिव एनर्जी का होना जरूरी है वरना जीवन में कई समस्याओं व कठिनाईयों का सामना करना पड़ सकता है। इसके लिए यह आवश्यक है का वहां पूरी तरह सफाई रखें, बंद घड़ी व खराब उपकरण हटाएं, हिंसक पशु, युद्ध, डूबता सूरज या डूबता जहाज, रोने या उदासी वाले चित्र न लगाएं।

   इसके अलावा पढ़ने या काम करने वाली मेज पर कॉपी-किताबें या फाइलें फैली न हों, बेड पर बैठकर भोजन न करें, सोते समय सिर पूर्व या दक्षिण दिशा की तरफ ही रखें तथा जिस स्थान पर पूजाघर हो वहां शराब, मांस-मछली या अन्य मादक पदार्थों का सेवन न करें।-प्रमोद कुमार अग्रवाल, वास्तु सलाहकार एवं लेखक, आगरा। 

पानी से भरा बर्तन दूर करेगा वास्तु दोष

  घर या व्यापार स्थल के वास्तुदोष को कम (दूर) करने के लिए किचन, बाथरूम या पूजास्थल की पूर्व या उत्तर-पूर्व दिशा (ईशान कोण) में एक पानी से भरा मिट्टी या तांबे का बर्तन रखना चाहिए। 

   बर्तन में पानी कम होने पर उसमें और पानी डालते रहना चाहिए। वहीं धन लाभ के लिए भी घर या व्यापार स्थल की छत की पूर्व दिशा में पानी से भरा छोटा बर्तन रखा जा सकता है।--प्रमोद कुमार अग्रवाल, वास्तु सलाहकार एवं लेखक, आगरा। 

विवाह में देरी का कारण हो सकता है वास्तु दोष

   वास्तु शास्त्र का सम्बन्ध हमारे सम्पूर्ण जीवन से है। भवन और जमीन की स्थिति, शयन करने के तरीके, बेड की स्थिति आदि का प्रभाव किसी न किसी रूप में हमारे ऊपर अवश्य ही पड़ता है। वास्तु दोष होने पर कैरियर, धन, संतान, दाम्पत्य जीवन, संतान की पढ़ाई और उनके विवाह आदि में समस्याएँ आने लगती हैं। सब कुछ ठीक होने के बावजूद अगर विवाह योग्य लड़के अथवा लड़की के विवाह में अनावश्यक विलम्ब हो रहा हो तो इसका कारण जन्म कुंडली में ग्रह दोष या वास्तु दोष हो सकता है।

@ वास्तु के अनुसार गलत दिशा में लगाया गया बेड विवाह में बाधक होता है। लड़के को सदैव पूर्व या उत्तर-पूर्व दिशा अर्थात ईशान कोण में तथा लड़की को उत्तर-पश्चिम दिशा अर्थात वायव्य कोण में ही अपना बेड लगाना चाहिए। 

@ बेड दीवार से अलग हटकर लगाना चाहिए। दीवार से सटाकर लगाया हुआ बेड दोषपूर्ण माना जाता है। बेड पर बैठकर भोजन करने से बचना चाहिए। सोते समय करवट बायीं तरफ ही रहे। दाहिनी ओर करवट लेकर सोने से मानसिक अस्थिरता एवं नकारात्मकता बनी रहती है।

@ बेड के नीचे किसी तरह का कोई सामान, कागज, कबाड़ा आदि नहीं रखना चाहिए। अगर बेड बॉक्स वाला है तो इस बात का विशेष ध्यान रखें कि उसमें केवल ओढ़ने-बिछाने के कपडे, चादर, रजाई, गद्दे, तकिया आदि ही रखें जाएँ। अन्य सामान भरने से नकारात्मक ऊर्जा का संचार होने लगता है। जिससे विवाह में बाधा आती है। 

@जगह की कमी की वजह से यदि बॉक्स वाले बेड में अन्य सामान रखना मजबूरी हो तो इस नकारात्मक प्रभाव से बचने के लिए बेड के नीचे एक बाउल में समुद्री या सेंधा नमक रखें या फिर बेड के चारों पायों के नीचे तांबे की एक-एक स्प्रिंग लगा दें। -- प्रमोद कुमार अग्रवाल, वास्तु आचार्य एवं लेखक, आगरा। 

सही दिशा में लगा नल देता है शुभ प्रभाव

@ समस्त घरों में पानी की आपूर्ति के लिए नल और पानी की टंकी अथवा टैंक लगवाये जाते हैं. वास्तुशास्त्र के अनुसार घर में सही दिशा में लगाया गया नल शुभ प्रभाव देने के साथ-साथ धन की समस्या को भी दूर करता है. जिन घरों में वास्तु के नियमों के विपरीत नल, पानी की टंकी, बोरिंग आदि लगे होते हैं, उनमें कई तरह की समस्यायों का सामना करना पड़ सकता है.

@ वास्तु के अनुसार घर की पूर्व दिशा में नल या पानी की टंकी लगवाने से घर के मालिक के मान-सम्मान और ऐश्वर्य में वृद्धि होती है. इसी प्रकार घर की उत्तर दिशा में पानी का स्त्रोत अत्यंत लाभदायक और धन लाभ कराने वाला माना गया है. 

@ घर के ईशान कोण अर्थात उत्तर-पूर्व दिशा में नल, पानी की टंकी या बोरिंग लगवाने से शुभ प्रभाव मिलने के साथ ही आर्थिक उन्नति के भरपूर अवसर भी मिलने लगते हैं. वहीँ घर की पश्चिम दिशा में नल या पानी का स्त्रोत रखने से उस घर के सदस्यों को मानसिक एवं शारीरिक समस्याओं से जूझना पड़ सकता है. 

@ घर की दक्षिण दिशा में नल या पानी का स्त्रोत रखने से तरह-तरह के कष्टों का सामना करने की संभावनाएं बनी रहती हैं. विशेषकर घर की महिलाओं को ज्यादा कष्टों का सामना करना पड़ सकता है. 

@ दक्षिण-पूर्व दिशा में नल या पानी का कोई भी स्त्रोत होने से घर के मालिक के पुत्रों में विवाद रहता है, जबकि दक्षिण-पश्चिम दिशा में नल आदि होने से घर के सदस्यों को मृत्युतुल्य कष्ट मिलता है. घर के मध्य भाग में कोई कुंआ या पानी का भंडारण नहीं होना चाहिए।ऐसा होने से घर में बीमारियाँ, कलह और अर्थाभाव देखने को मिलता है. 

@ घर में लगे सभी नलों की उचित देख-रेख भी आवश्यक है. इस बात पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए कि घर में लगे किसी भी नल से पानी न टपकता हो. नलों से पानी का टपकना एक प्रकार का वास्तु दोष ही है. इसके कारण घर के मुखिया की आय कम होने लगती है, जबकि घर के खर्चे अधिक हो जाते हैं.  

@ घर में सुख, शांति और समृद्धि के लिए नल और पानी के समस्त स्त्रोतों को वास्तु के अनुसार सही दिशा में ही रखा जाना चाहिए। --प्रमोद कुमार अग्रवाल, वास्तु आचार्य एवं लेखक, आगरा। 

बेडरूम में डबल बेड या सिंगल बेड

  वास्तु शास्त्र के अनुसार बेडरूम में पति-पत्नी एवं दंपत्ति के लिए डबल बेड का प्रयोग करना ही उपयुक्त होता है। इनके लिए एक ही कमरे में अलग-अलग बेड रखने से आपसी रिश्ते खराब होने लगते हैं। 

   घर के दूसरे सदस्यों तथा भाई-बहन के लिए दो अलग-अलग बेड इस प्रकार लगाने चाहिए कि दोनों बेड के बीच कम से कम एक फुट से अधिक की दूरी हो।

   बेड रूम के दरवाजे व खिड़की के पास और छत की बीम के ठीक नीचे बेड रखना भी दोष पूर्ण माना गया है।--प्रमोद कुमार अग्रवाल, वास्तु आचार्य एवं लेखक, आगरा। 

बुधवार, 18 सितंबर 2024

वास्तु नियमों के अनुसार कोण की स्थिति

  वास्तु शास्त्र में दिशाओं के साथ-साथ कोण या विदिशाओं का भी अपना महत्व है। दो दिशाओं के मिलने का स्थान कोण कहलाता है। वास्तु नियमों के अनुसार भवन में सभी कोण समकोण यानि 90° के होने चाहिए। 

   किसी भी कोण के विकृत या कटा होने से वहां रहने वालों में धन व स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के अलावा आपसी कलह व संतान हानि की संभावना बनी रहती है। -- प्रमोद कुमार अग्रवाल, वास्तु आचार्य एवं लेखक, आगरा। 

ऊंची-नीची भूमि का प्रभाव

वास्तु शास्त्र में भूमि के चयन के अंतर्गत भूमि के ऊंची या नीची होने के प्रभाव का भी उल्लेख मिलता है जो इस प्रकार है: -

@  पूर्व, उत्तर तथा ईशान कोण की तरफ भूमि का नीची होना सभी तरह से शुभ फलदायी होता है, जबकि इस ओर की ऊंची भूमि धन विद्या व संतान नाशक एवं परिवार में कलह कराने वाली होती है। 

@  पश्चिम, दक्षिण, वायव्य तथा नैरित्य कोण की तरफ भूमि का ऊंची होना शुभ फलदायी माना जाता है, जबकि इस ओर भूमि के नीची होने से धन, संतान, सुख, शांति व सम्मान में कमी आती है तथा परिवार में वाद-विवाद व कलह देखने को मिलता है।--प्रमोद कुमार अग्रवाल, वास्तु आचार्य एवं लेखक, आगरा। 

दांपत्य जीवन में तनाव

@ ईशान कोण में शौचालय, आग्नेय कोण में पानी का स्रोत, नैरित्य कोण में गड्ढा या दक्षिण दिशा में अंडरग्राउंड वाटर टैंक होने से दांपत्य जीवन में तनाव होता है। 

@ बैडरूम से अटैच टॉयलेट होने पर उसका दरवाजा खुला रहे या धुलने वाले कपड़े बैडरूम में टांग दिए जाएं तो भी दांपत्य जीवन कलह पूर्ण होता है। 

@ बैडरूम में मंदिर या गैस का चूल्हा या स्टोव होने, कांटे दार पौधे लगाने, बैडरूम का ईशान कोण में होने तथा पलंग के नीचे कबाड़ या बेकार का सामान रखे होने के कारण भी पति-पत्नी के रिश्ते खराब होने लगते हैं।--प्रमोद कुमार अग्रवाल, वास्तु आचार्य एवं लेखक, आगरा। 

बेडरूम के लिए सही दिशा

@ परिवार के मुखिया का बेडरूम दक्षिण-पश्चिम दिशा (नैरित्य कोण)  के कमरे में रखें। 

@ अविवाहित बेटों का बेडरूम उत्तर-पूर्व दिशा की ओर बने कमरे में रखें। 

@ अविवाहित बेटियों और आने वाले मेहमानों का बेडरूम उत्तर-पश्चिम दिशा (वायव्य कोण) में रखें। 

@ विवाहित बच्चों का बेडरूम पश्चिम और दक्षिण दिशा में बने कमरे में रखें।

@ पढ़ने वाले बच्चों के लिए उत्तर-पूर्व या पश्चिम दिशा में स्टडी कम बेडरूम बना सकते हैं। -प्रमोद कुमार अग्रवाल, वास्तु आचार्य एवं लेखक, आगरा। 

उपयोगी वास्तु टिप्स

 @ दुकान या ऑफिस में बेहतर आर्थिक लाभ और प्रदर्शन के लिए उत्तर-पूर्व दिशा में अधिक से अधिक खाली जगह होनी आवश्यक है। वहीं पश्चिम और दक्षिण दिशा में अधिक सामान, फर्नीचर, आलमारी, रिकॉर्ड आदि रखने चाहिए। बैठते समय चेहरा उत्तर-पूर्व दिशा में हो तो ज्यादा अच्छे परिणाम मिलते हैं।

@ भवन के मुख्य द्वार के ठीक सामने बड़ा वृक्ष बच्चों के शारीरिक व मानसिक विकास में बाधा पहुंचाता है, बड़ा नाला, गंदे पानी से भरा गड्ढा, टूटी दीवार या खंडहर मकान वहां रहने वालों के लिए कष्ट व धन हानि देता है। जबकि कुआं या किसी दूसरे भवन के कोने का होना मानसिक समस्याएं देने वाला है।--प्रमोद कुमार अग्रवाल, ज्योतिष-वास्तु लेखक एवं सलाहकार, आगरा। 

सोमवार, 16 सितंबर 2024

सेहत के लिए गुणकारी हैं अखरोट

## सेहत के लिए गुणकारी अखरोट को ड्राई फ्रूट्स में शामिल किया गया है। अखरोट में फाइबर, एंटीऑक्सिडेंट, एंटीइंफ्लेमेटरी कंपाउंड ओमेगा-3 फैटी एसिड, पोटेशियम, विटामिन-ई, पॉलीफेनोल्स आदि तत्व पाए जाते हैं। 

## अखरोट के सेवन से हृदय, आंत्र,मस्तिष्क आदि अंग क्षतिग्रस्त होने से बचे रहते हैं, ब्लडप्रेशर नियंत्रित रहता है, मस्तिष्क की क्रियाशीलता बढ़ती है और शरीर में इम्यूनिटी पॉवर में वृद्धि होने लगती है। 

## अधिक मात्रा में अखरोट का सेवन नहीं करना चाहिए क्योंकि अखरोट पचने में भारी होते हैं और शरीर में उष्णता कफ व पित्त को बढ़ा सकते हैं। अखरोट को रात भर पानी में भिगोकर रखने के बाद सुबह खाया जा सकता है। -- प्रमोद कुमार अग्रवाल, आगरा। 

अस्थमा से बचाव के लिए जरूरी टिप्स

@ फेफड़ों को प्रभावित करने वाली बीमारी अस्थमा में सांस नलिकाओं में सूजन आने से सांस लेने में परेशानी होती है। इसे दमा भी कहते हैं। 

@ अस्थमा के मुख्य लक्षण हैं- सांस लेने के दौरान घरघराहट होना, सांस फूलना, सांस लेते समय सीटी बजने की आवाज आना, सीने में जकड़न व दर्द होना, थकान महसूस होना। 

@ अस्थमा होने के कारण हैं- विभिन्न कारणों से एलर्जी होना, पर्यावरणीय प्रदूषण, रेस्पिरेटरी सिंसिटियल वायरस से शिशुओं में श्वसन संक्रमण, परिवार में माता या पिता पक्ष के किसी सदस्य को अस्थमा होना। 

@ अस्थमा से बचने के लिए विशेषज्ञ डॉक्टर से इलाज कराएं, ठंडे पेय पदार्थ व ठंडी तासीर वाले भोजन से बचें, मांसाहारी भोजन न करें, विटामिन ए, सी व ई युक्त भोजन तथा हरी पत्तेदार सब्जियों का अधिक सेवन करें, पालतू पशु-पक्षियों से दूरी बनाए रखें और डॉक्टर की सलाह के बिना इन्हेलर व दवाएं बंद नहीं करें। -प्रमोद कुमार अग्रवाल, आगरा। 

याददाश्त कमज़ोर होने लगे तो रखें ध्यान

  उम्र बढ़ने के साथ-साथ लोगों के मस्तिष्क में सुस्ती आने से याददाश्त कमजोर होने लगती है। इसके अलावा दवाओं के दुष्प्रभाव आघात विटामिन की कमी तनाव मस्तिष्क में संक्रमण, अनिद्रा, आरामतलब जीवनचर्या आदि कारणों से भी याददाश्त कमजोर हो सकती है। 

    याददाश्त को मजबूत बनाए रखने के लिए दैनिक दिनचर्या का पालन करना बहुत जरूरी है। इसके अलावा समय का सदुपयोग, रात्रि में छह से आठ घंटे की बाधा रहित नींद योग व प्राणायाम, हाई ब्लडप्रेशर, डायबिटीज पर नियंत्रण और किसी भी तरह के नशीले पदार्थों के सेवन से परहेज करने से याददाश्त अच्छी बनी रहती है।   

   जिन लोगों की याददाश्त कमजोर होने लगे, उन्हें अपने रोजाना के कामों की सूची बना कर अपने साथ रखनी चाहिए। भोजन ताजा, घर पर बना और पौष्टिक होना चाहिए। बाजार में मिलने वाले अपदूषित खाद्य पदार्थ, कोल्ड ड्रिंक, मिर्च-मसाले और ज्यादा वसीय भोजन से परहेज करना चाहिए। सबसे महत्वपूर्ण बात, अपने परिवार और दोस्तों के साथ तनावमुक्त जीवन जीने की आदत भी याददाश्त को मजबूत बनाने में मददगार हो सकती है। -- प्रमोद कुमार अग्रवाल, आगरा। 

बेहतर स्वास्थ्य के लिए जरूरी टिप्स

 (नेचुरोपैथी पर आधारित जानकारी) 


# पीने के पानी का टीडीएस समय समय पर चैक कराते रहना जरूरी है, क्योंकि अधिक टीडीएस का पानी पीने से हड्डी संबंधी बीमारी होने की संभावना बढ़ जाती है। 

#  आरओ या किसी भी अन्य स्रोत का पानी पीने से पहले अगर पानी को मिट्टी के बर्तन जैसे घड़ा, सुराही आदि में भर कर रखा जाए तो शरीर को आवश्यक मिनिरल्स आसानी से मिल जाएंगे। 

# शरीर में अम्लता  बढ़ने से पेट, त्वचा लिवर, किडनी, मस्तिष्क से संबंधित बीमारी होने की संभावना बनी रहती है। इसलिए अपने डॉक्टर की सलाह से सदैव क्षारीय प्रकृति वाले आहार जैसे साबुत अनाज किशमिश अजवाइन, मौसम में आने वाले फल, हरी तरकारी, ब्रोकली, खीरा, बीन्स नट्स अंजीर आदि का सेवन करना चाहिए। -- प्रमोद कुमार अग्रवाल, आगरा

अधिक उम्र में अपने लिवर को रखें स्वस्थ

     (नेचुरोपैथी के सिद्धांतों पर आधारित) 


# भोजन करने से पहले हाथों को किसी अच्छे साबुन या हैंड वॉश से अच्छी तरह साफ कर लें। 

# निर्धारित दिनचर्या के अनुसार ही सात्विक भोजन करें। शाम को आठ बजे से पहले भोजन अवश्य कर लें। शाम का भोजन जितना कम रहे उतना अच्छा है। 

# भोजन के बाद मिठाई, आइसक्रीम, कोल्डड्रिंक, कोल्ड कॉफी, ठंडा नीबू पानी या ठंडा पानी न लें। 

# वैसे तो भोजन के तुरंत बाद पानी नहीं पीना चाहिए, लेकिन अगर पानी पीना है तो गुनगुना पानी पी सकते हैं। 

# बेकरी उत्पाद, अधिक ऑयली खाद्य पदार्थ, फास्ट फूड, दूध से बने उत्पाद, शराब, मांसाहारी भोजन, चाय आदि का सेवन न करें। फल और सब्जियों का सेवन अधिक करें। 

# भोजन करने के बाद तुरंत लेटने या बैठ कर काम में लगने की बजाय थोड़ा टहलें। 

# रात्रि में सोने से पहले ब्रश करना न भूलें। दांत नहीं हैं तो भी सैंधा नमक मिले गुनगुने पानी से कुुल्ला करके ही सोने जाएं। सुबह उठते ही एक या दो गिलास गुनगुना या सादा पानी पीएं। इससे लिवर की क्रियाशीलता अच्छी बनी रहेगी। -- प्रमोद कुमार अग्रवाल, आगरा।

वास्तु शास्त्र और पंचतत्व

@ वास्तु शास्त्र के सभी नियम और सिद्धांत दिशा, विदिशा एवं पंचतत्वों पर आधारित हैं। "जल, वायु, आकाश, पृथ्वी तथा अग्नि", पंचतत्व हैं।

@ किसी भी वास्तु में इन पंचतत्वों के संतुलित प्रयोग से वहां रहने या किसी तरह का काम करने वाले लोगों में "सुख-समृद्धि, धन व संतान लाभ, आरोग्य, मानसिक शांति" आदि सकारात्मक प्रभाव देखने को मिलते हैं। 

@ अगर किसी वजह से वास्तु के निर्माण में इन पंचतत्वों का संतुलित प्रयोग संभव न हो तो इनमें से केवल तीन तत्वों, "पृथ्वी, जल व अग्नि" को वास्तु के नियमानुसार स्थापित करने से भी उस वास्तु के उपयोग से सुखमय जीवन व्यतीत किया जा सकता है। 

@ माना जाता है कि वास्तु में पृथ्वी, जल व अग्नि के संतुलित प्रयोग से शेष दोनों तत्व, वायु व आकाश अपने आप ही संतुलित व अनुकूल हो जाते हैं।--प्रमोद कुमार अग्रवाल, वास्तु आचार्य एवं लेखक, आगरा। 

तस्वीर लगाने के लिए चुनें सही दिशा

@ परिवार के जीवित सदस्यों की तस्वीर पूर्व या उत्तर-पूर्व में लगाएं। 

@ परिवार के मृत सदस्यों (पूर्वजों) की तस्वीर दक्षिण, पश्चिम या दक्षिण-पश्चिम में लगाएं। 

@ प्रेरणा देने वाली तस्वीर उत्तर-पश्चिम में लगाएं। 

@ बेडरूम में राधा-कृष्ण के अलावा कोई और देवी-देवता की तस्वीर न लगाएं। 

@ लड़ाई-झगड़ा, युद्ध, क्रोध, रोना, इंतजार करती महिला,थका, परेशान या सोच-विचार में मग्न पुरुष, हिंसक जानवर, आदि तस्वीरें घर में कभी भी न लगाएं। ----प्रमोद कुमार अग्रवाल, वास्तु आचार्य एवं लेखक, आगरा। 

सफल व्यवसाय के लिए वास्तु नियम

वास्तु शास्त्र के अनुसार फैक्ट्री अथवा व्यावसायिक स्थल के लिए चिकनी मिटटी वाले भूखंड का चयन करना शुभ रहता है। व्यावसायिक भूखंड में न तो शल्य दोष होना चाहिए और न ही भूखंड किसी कब्रिस्तान या शमशान घाट के नजदीक होना चाहिए।

@ व्यवसाय की सफ़लता के लिए भूखंड का आकार आयताकार, वर्गाकार, षष्ठ या अष्ट भुजाकर होना चाहिए।

@ चेक बुक, पास बुक, जमा बही, मुक़दमे से सम्बंधित कागजात आदि हमेशा ईशान कोण या पूर्व दिशा में ही रखने चाहिए।

@ लेखा विभाग तथा लेखा अधिकारी के बैठने का स्थान व्यवसाय स्थल के उत्तरी भाग में रखना शुभ होता है।

@ टेलीफोन और फैक्स मशीन पश्चिम या उत्तर-पश्चिम दिशा में तथा कंप्यूटर को मेज की दायीं ओर रखना चाहिए।

@ मेज पर कभी भी फ़ाइलों का ढेर नहीं लगाना चाहिए। ऐसा करने से कार्यालय में नकारात्मक ऊर्जा प्रवाहित होती रहती है।--प्रमोद कुमार अग्रवाल, वास्तु आचार्य एवं लेखक, आगरा। 

दक्षिण दिशा में सिर करके सोएं

 वास्तु शास्त्र में माना गया है कि मनुष्य का सिर उत्तरी ध्रुव, जबकि पैर दक्षिणी ध्रुव होते हैं। इसलिए अच्छी नींद और बेहतर स्वास्थ्य के लिए सदैव दक्षिण दिशा की तरफ सिर करके सोने की सलाह दी जाती है। 

   इसी अवधारणा पर आधारित है भगवान के चरणों में सिर रख कर पूजा करना। भगवान के चरण भी दक्षिणी ध्रुव होते हैं। जब भगवान के चरणों में सिर नवाते हैं तो मनुष्य के शरीर की नकारात्मक उर्जा समाप्त होने लगती है तथा सकारात्मक ऊर्जा का सतत प्रवाह होने से शरीर के अंदर छुपे हुए समस्त विकार दूर हो जाते हैं। -- प्रमोद कुमार अग्रवाल, वास्तु आचार्य एवं लेखक, आगरा। 

स्वीमिंग पूल के लिए सही दिशा

  किसी भी तरह के भवन, घर, फ्लैट, होटल, रेस्टोरेंट, स्पा, जिम आदि में गलत दिशा में बना स्वीमिंग पूल स्वास्थ्य और आर्थिक विकास के लिए हानिकारक होता है। स्वीमिंग पूल के गलत दिशा में होने से अनावश्यक वाद-विवाद, लड़ाई-झगड़ा, मुकदमेबाजी और धन का अपव्यय होने की संभावनाएं भी बनी रहती है।

   इस वास्तु दोष को दूर करने के लिए एकमात्र उपाय स्वीमिंग पूल को पूर्व या उत्तर-पूर्व की ओर स्थानांतरित करना है,  क्योंकि वास्तु नियमों के अनुसार यह दिशा भूमिगत जल स्त्रोत अथवा अंडरग्राउंड जल भंडारण के लिए सर्वश्रेष्ठ मानी जाती है।-- प्रमोद कुमार अग्रवाल, वास्तु आचार्य एवं ज्योतिष-वास्तु लेखक, आगरा। 

रहने के लिए शुभ होता है चंद्रभेदी मकान

जो मकान पूर्व से पश्चिम दिशा की तरफ लंबा होता है 'सूर्यवेधी' और जो मकान उत्तर से दक्षिण दिशा की तरफ लंबा होता है 'चन्द्रवेधी' कहलाता है। वास्तु नियमों के अनुसार रहने के लिए चन्द्रवेधी मकान शुभ रहता है। ऐसे मकान में रहने से धन की कमी नहीं होती है और स्वास्थ्य समस्याएं भी कम परेशान करती हैं। 

    यदि मकान सूर्यवेधी है तो वहां उत्तर पूर्व दिशा में लॉन बनवाना चाहिए जिसमें हरी घास और छोटे आकार के पुष्प वाले पौधे लगा देने चाहिए। यदि केवल मंदिर बनवाना हो तो सूर्यवेधी या चन्द्रवेधी का विचार नहीं करना चाहिए। -- प्रमोद कुमार अग्रवाल, वास्तु आचार्य एवं लेखक, आगरा।

क्रिस्टल बॉल से दूर हो सकता है वास्तु दोष

##  किसी भी घर, दुकान, फैक्ट्री, ऑफिस, शोरूम, कार्यालय, संस्थान आदि के वास्तु दोष को दूर करने के लिए क्रिस्टल बॉल का उपयोग किया जा सकता है। यह एक प्रकार का श्वेत पारदर्शी पत्थर होता है जो प्राकृतिक या कृत्रिम प्रकाश को अपने चारों  ओर परावर्तित करके सकारात्मक ऊर्जा उत्पन्न करता है। 

  ##  क्रिस्टल बॉल में दिखाई देने वाले सात रंगों के प्रभाव से वास्तु दोष दूर होते हैं, आर्थिक लाभ होता है तथा भाग्य वृद्धि होती है। वास्तु दोष निवारक उपाय के रूप में क्रिस्टल बॉल को ड्राइंग रूम, डाइनिंग हॉल, स्टडी रूम, बालकनी या आंगन के बीचों बीच लगाया जा सकता है। -- प्रमोद कुमार अग्रवाल, वास्तु आचार्य एवं ज्योतिष-वास्तु लेखक, आगरा। 

उत्तर-पूर्व दिशा में करें शिव की आराधना

@ भवन की उत्तर-पूर्व दिशाओं के मध्य की दिशा ईशान कोण कहलाती है। वास्तु शास्त्र के अनुसार इस दिशा के स्वामी भगवान शिव होने से यह दिशा सबसे पवित्र मानी जाती है। बुद्धि, ज्ञान, विवेक, धैर्य, साहस, धन व संतान सुख, सुख-समृद्धि आदि प्राप्त करने के लिए ईशान कोण में मंदिर स्थापित करके पूजा करना श्रेष्ठ होता है।  

@ भगवान शिव को प्रसन्न करने और मनवांछित फल पाने के लिए उत्तर या पूर्व दिशा अथवा ईशान कोण की तरफ चेहरा करके "ऊँ नम: शिवाय" का उच्चारण करते हुए शिव लिंग पर गंगा जल, बेलपत्र,धतूरा आदि अर्पित कर भगवान शिव की पूजा-अर्चना करनी चाहिए और शुद्ध घी का दीपक प्रज्ज्वलित करना चाहिए। -- प्रमोद कुमार अग्रवाल, वास्तु आचार्य एवं ज्योतिष-वास्तु लेखक, आगरा। 

शनिवार, 14 सितंबर 2024

किरायेदार के लिए भी है सही दिशा

@ वास्तु शास्त्र के अनुसार किराएदार को हमेशा घर के वायव्य कोण (उत्तर-पश्चिम दिशा) में बना कमरा या पोर्शन ही किराए पर देना चाहिए। वहीं नैऋत्य कोण (दक्षिण-पश्चिम दिशा)  में बने कमरे या पोर्शन में भवन स्वामी को स्वयं ही रहना चाहिए। 

@ वायव्य कोण के अलावा किसी अन्य दिशा या विदिशा में किराएदार को बसाना उचित नहीं माना गया है, क्योंकि ऐसे किराएदारों के मकान मालिक के साथ संबंध खराब होने एवं उनके बीच कलह होने की संभावना बनी रहती है तथा वे आगे चलकर मकान खाली करने में भी मकान मालिक के लिए सरदर्दी पैदा कर सकते हैं।-- प्रमोद कुमार अग्रवाल, वास्तु आचार्य एवं लेखक, आगरा। 

किचन में न हो मंगल गुरु योग

वास्तु शास्त्र के अनुसार किचन में मंदिर या पूजा स्थल नहीं होना चाहिए। यदि किचन में मंदिर हो या मंदिर के ठीक ऊपर बिजली का मीटर अथवा बिजली का कोई उपकरण लगा हुआ हो तो ऐसे स्थान पर मंगल-गुरु योग प्रभावी होने से अशुभ फल मिलने लगते हैं, जिससे घर के मालिक या उसके किसी पुत्र को रक्त संबंधी रोग होने तथा घर के सदस्यों के घमण्डी व तुनकमिजाज होने की संभावना बनी रहती है।-- प्रमोद कुमार अग्रवाल, वास्तु आचार्य एवं लेखक, आगरा। 

वास्तु दोष निवारण के लिए क्रिस्टल बॉल

किसी भी घर, दुकान, फैक्ट्री, ऑफिस, शोरूम, कार्यालय, संस्थान आदि के वास्तु दोष को दूर करने के लिए क्रिस्टल बॉल का उपयोग किया जा सकता है। यह एक प्रकार का श्वेत पारदर्शी पत्थर होता है जो प्राकृतिक या कृत्रिम प्रकाश को अपने चारों ओर परावर्तित करके सकारात्मक ऊर्जा उत्पन्न करता है। 

   क्रिस्टल बॉल में दिखाई देने वाले सात रंगों के प्रभाव से वास्तु दोष दूर होते हैं, आर्थिक लाभ होता है तथा भाग्य वृद्धि होती है। वास्तु दोष निवारक उपाय के रूप में क्रिस्टल बॉल को ड्राइंग रूम, डाइनिंग हॉल, स्टडी रूम, बालकनी या आंगन के बीचों बीच लगाया जा सकता है। -- प्रमोद कुमार अग्रवाल, वास्तु आचार्य एवं ज्योतिष-वास्तु लेखक, आगरा। 

ऊंचा ईशान कोण होता है कष्टकारी

वास्तु शास्त्र में ईशान कोण को सबसे महत्वपूर्ण माना गया है। जिन भवनों में ईशान कोण ऊंचा होता है, वहां भवन स्वामी को जीवन भर काफी आर्थिक संकटों का सामना करना पड़ सकता है। 

  इस स्थिति से बचने के लिए भवन के ईशान कोण को सबसे नीचा, खुला और स्वच्छ रखना आवश्यक है। वहीं भवन के दक्षिण-पश्चिम कोण (नैरित्य कोण) को सबसे ऊंचा रखना भवन स्वामी के लिए लाभकारी होता है। -- प्रमोद कुमार अग्रवाल, वास्तु आचार्य एवं ज्योतिष- वास्तु लेखक, आगरा। 

लाभकारी है श्वेत गणपति का पूजन

अगर किसी दुकानदार, व्यापारी अथवा व्यवसायी का मन अपने कार्यस्थल पर बैठने को नहीं करता हो तो उन्हें शुक्ल पक्ष के प्रथम बुधवार को श्वेत गणपति (सफेद रंग के गणेश जी) का पूजन करके गणेश जी की प्रतिमा को दुकान, व्यापार स्थल या कार्यालय के उत्तर पूर्व (ईशान) कोण में स्थित पूजा स्थल में स्थापित करना चाहिए। माना जाता है कि ऐसा करने से वास्तु दोष एवं राहु दोष दूर होकर भौतिक सुख समृद्धि आने लगती है। -- प्रमोद कुमार अग्रवाल, वास्तु आचार्य एवं ज्योतिष-वास्तु लेखक, आगरा। 

शुक्रवार, 13 सितंबर 2024

धन लाभ के लिए उत्तर-पूर्व में लगाएं दर्पण

@ अगर कोई दुकान, फैक्टरी, उद्योग या व्यापार लगातार घाटे में चल रहा है अथवा बंद होने की स्थिति में आ गया है, तो वहां उत्तर-पूर्व कोने (ईशान कोण) में एक आयताकार या वर्गाकार दर्पण लगा देने से आर्थिक लाभ मिलने की संभावना बढ़ सकती है। दर्पण का फ्रेम स्काई ब्ल्यू, सफेद या क्रीम कलर का हो तो परिणाम अच्छे मिलते हैं। 

@ मकान के दरवाजे के पीछे (दरवाजे के अंदर वाले भाग में) दर्पण लगाना वास्तु दोष माना गया है, जिसके कारण घर की शांति भंग होने और स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां होने की संभावना बनी रहती है। लेकिन यदि दरवाजा उत्तर-पूर्व कोने (ईशान कोण) की तरफ है तो दरवाजे के पीछे दर्पण लगा सकते हैं। 

@ कुछ घर रेलवे क्रॉसिंग अथवा पुल की तरफ पहले से ही बने होते हैं तो कुछ घर बाद में रेलवे क्रॉसिंग या पुल के बन जाने के कारण इनके नजदीक आ जाते हैं। दोनों ही स्थिति में ऐसे घरों की आर्थिक स्थिति पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। सरल शब्दों में कहा जाए तो रेलवे क्रॉसिंग या पुल की तरफ मेन गेट वाले घरों में आमदनी की तुलना में अनावश्यक खर्चे ज्यादा लगे रहते हैं। इस वास्तु दोष से बचने के लिए घर के बाहर मेन गेट पर उत्तल दर्पण लगा देना चाहिए। -- प्रमोद कुमार अग्रवाल, वास्तु आचार्य एवं ज्योतिष- वास्तु लेखक, आगरा। 

वास्तु के अनुसार बनाएं कंपाउंड वॉल

@ मकान के आसपास चारों ओर बनाई गई दीवार को कंपाउंड वॉल कहा जाता है। वास्तु शास्त्र के अनुसार दक्षिण व पश्चिम दिशा की कंपाउंड वॉल ऊंची एवं मोटी, जबकि पूर्व व उत्तर दिशा की कंपाउंड वॉल पतली एवं नीची होना आवश्यक है। 

@ कंपाउंड वॉल बनाते समय इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि उत्तर पूर्व कोना (ईशान कोण) गोलाई में न हो क्योंकि इसके कारण ईशान कोण कट जाने से वास्तु दोष उत्पन्न हो जाता है। 

@ अगर मकान में कंपाउंड वॉल की ऊंचाई एक मीटर या इससे अधिक रखी जाए तो दूसरी तरफ निर्मित वास्तु का कोई भी नकारात्मक एवं अशुभ प्रभाव उस मकान पर नहीं पड़ता है। -- प्रमोद कुमार अग्रवाल, वास्तु आचार्य एवं ज्योतिष-वास्तु लेखक, आगरा। 

बीम के नीचे सोने से हो सकती है स्वास्थ्य समस्या

@ छत पर बीम या किसी टांड़ (दुछत्ती) के नीचे सोने, बैठने, पढ़ाई या कोई दिमागी काम करने से बचना चाहिए अन्यथा मानसिक अस्थिरता, तनाव, बेचैनी, सिर दर्द, घबराहट, थकान और अनिद्रा जैसी समस्या हो सकती है।

@ जगह की कमी के कारण यदि बीम के नीचे सोना या बैठकर काम करना मजबूरी हो तो बीम पर 'फॉल्स सीलिंग' करवा लेना ही उपयुक्त उपाय है। -- प्रमोद कुमार अग्रवाल, ज्योतिष-वास्तु लेखक एवं सलाहकार, आगरा। 

गुरुवार, 12 सितंबर 2024

कार्यालयों में लगाएं सही फोटो

दुकान, व्यापारिक अथवा व्यावसायिक स्थलों के ऑफिस में फोटो या सीनरी लगाने का चलन है। लेकिन कई बार जानकारी के अभाव में ऑफिस में ऐसे फोटो लगा दिए जाते हैं, जिनके कारण वहां नकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह होने से कई तरह की समस्याएं आने लगती हैं। 

   वास्तु सूत्रों के अनुसार किसी भी ऑफिस में दक्षिण दिशा की दीवार पर पहाड़ की फोटो या सीनरी लगाई जा सकती है, लेकिन ध्यान यह रखना है कि इसमें पानी या पानी का कोई स्रोत न हो। ऑफिस में दिवंगत माता-पिता, दादा-दादी या अन्य पूर्वजों की फोटो लगाने के लिए दक्षिण-पश्चिम दिशा उपयुक्त मानी गई है। 

   ऑफिस के पूर्वी उत्तर कोण में पानी का झरना, फुब्बारा या तैरती हुई मछलियों से जुड़ी फोटो या सीनरी लगाई जा सकती है। इस प्रकार लगाई गई फोटो या सीनरी सौभाग्य का सूचक माना जाती है।-- प्रमोद कुमार अग्रवाल, ज्योतिष-वास्तु लेखक एवं सलाहकार, आगरा। 

मकान में न हो कोण वेध

मकान के मेन गेट के ठीक सामने किसी अन्य मकान का कोना होना एक ऐसा वास्तु दोष है, जिसके कारण उस मकान में रहने वाले लोगों को उनकी मेहनत का पूरा लाभ नहीं मिल पाता है और प्राय धन की कमी बनी रहती है। वास्तु शास्त्र में इसे कोण वेध माना गया है। 

   कोण वेध के दोष से बचने के लिए मेन गेट पर पर्दा या आरपार न दिखाई देने वाली प्लास्टिक की शीट लगा देनी चाहिए। साथ ही मेन गेट के अंदर एक दर्पण भी इस तरह लगा देना चाहिए जिससे कि गेट के अंदर आने वाले व्यक्ति की परछाई दर्पण में दिखाई दे। ऐसा करने से कोण वेध वास्तु दोष का अशुभ प्रभाव नहीं पड़ता और नकारात्मक ऊर्जा भी मकान में प्रवेश नहीं करती। -- प्रमोद कुमार अग्रवाल, ज्योतिष-वास्तु लेखक एवं सलाहकार आगरा। 

पश्चिम दिशा में न हो बालकनी

जहां तक संभव हो, पश्चिम दिशा में बालकनी और बरामदा नहीं बनवाने चाहिए। इसका कारण यह है कि पश्चिम दिशा में अस्त होते समय सूर्य की किरणें स्वास्थ्य की दृष्टि से लाभकारी नहीं होती हैं। 

   अगर किसी मकान की पश्चिम दिशा में बालकनी या बरामदा पहले से ही बने हुए हैं, तो वहां शाम के समय मोटा पर्दा लगा सकते हैं, जिससे कि हानिकारक सूर्य की किरणों से बचाव हो सके। -- प्रमोद कुमार अग्रवाल, ज्योतिष-वास्तु लेखक एवं सलाहकार, आगरा। 

उपयोगी वास्तु टिप्स

@ घर के दक्षिण-पश्चिम कोण (नैरुत्य कोण) में फर्श के ढ़लान का होना वास्तु दोष है। इसके कारण घर के स्वामी का स्वास्थ्य खराब रहने और धन व संपत्ति का नुकसान होने जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। बचाव के लिए फर्श के ढ़लान को नैरुत्य कोण से हटा देना चाहिए। 

@ घर के अंदर कांटेदार और दूध वाले पेड़-पौधे नहीं लगाने चाहिए। जिस घर में कांटेदार पौधे होते हैं, वहां रहने वाले लोगों में ह्रदय एवं ब्लडप्रेशर रोग होने की संभावना रहती है। वहीं जिन पौधों को तोड़ने या काटने पर दूध जैसा द्रव निकलता है, उन्हें भी घर के अंदर लगाने से बचना चाहिए। क्योंकि ऐसे पौधों की वजह से घर में रहने वाले फेफड़े, किडनी व मूत्र संबंधी रोगों से पीड़ित हो सकते हैं।-- प्रमोद कुमार अग्रवाल, ज्योतिष-वास्तु लेखक एवं सलाहकार, आगरा। 

बुधवार, 11 सितंबर 2024

गंदे पानी का जमाव बना सकता है कर्जदार

@ किसी दुकान, फैक्ट्री या व्यावसायिक स्थल के मेन गेट पर अथवा दक्षिण और पश्चिम दिशा में नाली व सीवर के गंदे पानी का जमाव वास्तु दोष की वजह बनता है, जिससे दुकान व व्यवसाय में रुकावटें आती हैं और उसके स्वामी पर कर्ज का बोझ बढ़ने की संभावना बनी रहती है। बचाव के लिए गंदे पानी का जमाव न होने दें।

@  मकान के पीछे की तरफ राजमार्ग होना वास्तु दोष है। इसके कारण तरक्की में बाधा के साथ-साथ दूसरों से अकारण अपमानित होने की संभावना रहती है। इस दोष से बचने लिए मकान के पीछे की दीवार पर एक अष्टकोणीय दर्पण (ठाकुर मिरर) लगाना चाहिए। -- प्रमोद कुमार अग्रवाल, वास्तु आचार्य एवं ज्योतिष-वास्तु लेखक, आगरा। 

जीवन को प्रभावित कर सकता है भवन निर्माण

   मनुष्य के जीवन से वास्तु शास्त्र का गहरा संबंध है। जिस भवन में मनुष्य रहता है, व्यवसाय या व्यापार करता है अथवा किसी अन्य रूप में भवन को काम में लाता है, वहां की वास्तु का प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष शुभ या अशुभ प्रभाव देर-सवेर उस पर पड़ता है। 

   सब कुछ ठीक होने के बाद भी भवन में एक या अधिक वास्तु दोष होने पर जीवन में कुछ न कुछ ऐसा घटित होने लगता है, जिसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती है। देखने में आता है कि वास्तु दोष की वजह से परिवार में बिखराव, आपसी तालमेल की कमी, परिवार के लोगों में मनमुटाव व कलह, धनार्जन में बाधा, शारीरिक व मानसिक रोग, पड़ौसियों से विवाद, अकाल मृत्यु, घर के सदस्यों का गलत आचरण व आपराधिक कार्यों में लिप्तता, बिना वजह मान-सम्मान व प्रतिष्ठा में कमी, शत्रुओं में वृद्धि, व्यवसाय व व्यापार में नुकसान, बिजली के उपकरणों व मशीनों आदि में बार-बार खराबी जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। 

   वास्तु शास्त्र कोई अंधविश्वास या कल्पना पर आधारित विषय नहीं है, बल्कि यह एक ऐसा मान्य विज्ञान है जो प्रकृति प्रदत्त पंच तत्वों, प्रभावशाली चुंबकीय क्षेत्र और आठ दिशाओं पर आधारित है तथा इसके नियमों के अनुरूप किया गया भवन निर्माण निश्चय ही वहां सकारात्मक ऊर्जा के प्रवाह को बनाए रखता है, जिससे जीवन में शुभता आने लगती है। 

   अगर किसी मनुष्य को लगता है कि उसके भवन में रहने, व्यापार या व्यवसाय करने के दौरान समस्याओं में वृद्धि हुई है या फिर उसका जीवन किसी भी अन्य रूप में प्रभावित हुआ है तो उसे किसी सुयोग्य व अनुभवी वास्तु सलाहकार से संपर्क करके भवन के वास्तु दोषों का पता लगा कर निराकरण कराना चाहिए जिससे कि भवन निर्माण का उसका उद्देश्य पूर्ण हो सके और सुखमय, सम्मानपूर्ण व सुव्यवस्थित जीवन जीने का उसका सपना साकार हो सके। -- प्रमोद कुमार अग्रवाल, ज्योतिष-वास्तु लेखक एवं सलाहकार, आगरा। 

वास्तु शास्त्र में छिपा है सुखी जीवन का रहस्य

   भारत में ज्योतिष और वास्तु को जीवन का एक ऐसा अद्भुत विज्ञान माना गया है, जिसके सिद्धांतों का अनुसरण करके धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष के दर्शन का अनुभव किया जा सकता है। किसी भूखण्ड पर आवासीय या व्यावसायिक भवन का निर्माण कराने के बाद उस निर्मित वास्तु का, रहने या व्यवसाय अथवा व्यापार के लिए उपयोग करने से धर्म एवं मोक्ष, दोनों ही प्रभावित होते हैं। 

   किसी भी वास्तु के उपयोग से सुनिश्चित सफलता तभी संभव है, जब वह सभी तरह के वास्तु दोषों से मुक्त हो तथा उस वास्तु में प्रवेश करने से पहले विधि विधान से वास्तु पूजन संपन्न करा दिया गया हो। धर्म, आध्यात्म और ज्योतिष के साथ वास्तु विज्ञान का समन्वय निश्चित ही मानव कल्याण की उस भावना को साकार करता है, जिसके लिए वास्तु नियम बनाए गए। 

   वास्तु शास्त्र के अनुसार वास्तु का निर्माण और उपयोग जीवन को सुरक्षित, सुखी, संपन्न और प्रसन्नता प्रदान करता है, इसमें किसी को कोई संदेह नहीं होना चाहिए। -- आचार्य प्रमोद कुमार अग्रवाल, ज्योतिष-वास्तु लेखक, आगरा। 

रिश्तों को दें सम्मान, ग्रह रहेंगे बलवान

 जन्म कुंडली में बैठे ग्रहों के शुभ-अशुभ फल के अनुसार उपाय किए जाते हैं। वो भी इस उद्देश्य से कि ग्रहों के शुभ फल मिलने से जीवन सुखी व संपन्न बन जाएगा। लेकिन हम अपने ही घर में उन सगे-संबंधियों की उपेक्षा व अपमान करते हैं जो किसी न किसी ग्रह से जुड़े होते हैं। 

   ऐसी दशा में जब मनोनुकूल परिणाम नहीं मिलते तो लोग ज्योतिष शास्त्र एवं उससे जुड़े विद्वानों की योग्यता और ज्ञान पर अंगुली उठाने लगते हैं। वे यह भूल जाते हैं कि ग्रहों की शुभता के लिए पहले घर से ही प्रयास करने की जरूरत होती है, बाद में दूसरे उपाय कारगर होते हैं। 

   ज्योतिष के अनुसार सूर्य ग्रह की शुभता के लिए पिता, चन्द्र ग्रह के लिए माता, मंगल ग्रह के लिए भाई, बुध ग्रह के लिए मित्र, बहन व बंधु, गुरु ग्रह के लिए संतान, शुक्र ग्रह के लिए पति-पत्नी, शनि ग्रह के लिए नौकर व कर्मचारी, राहु ग्रह के लिए शत्रु और केतु ग्रह की शुभता के लिए अन्य सगे-संबंधियों के साथ सम्मान और प्रेम का व्यवहार किया जाना आवश्यक है। 

   यदि हम अपने घर-परिवार के सदस्यों के साथ-साथ सभी नाते-रिश्तेदारों, मित्रों और परिचितों के साथ सदव्यवहार करें, उनके साथ किसी भी प्रकार का छल, उत्पीड़न, अन्याय न करें एवं उनको यथोचित आदर व सम्मान देते रहें तो ग्रहों के अशुभ प्रभाव से हमारा स्वत: ही बचाव होता रहेगा और तब हम सुखी, संपन्न एवं शांतिपूर्ण ढंग से जीवन जीने का आनंद लेते रहेंगे।--प्रमोद कुमार अग्रवाल, ज्योतिष-वास्तु लेखक एवं सलाहकार, आगरा।

टूटी खिड़कियों से हो सकती है आंखों में परेशानी

सही दिशा एवं संख्या में लगी खिडकियां, भवन के अंदर सकारात्मक ऊर्जा के प्रवाह में सहायक होती हैं। खिडकियां सदैव बाहर या अंदर की तरफ खुलने वाली होनी चाहिए। सरकने वाली (स्लाइडिंग) खिडकियां बनाना ठीक नहीं होता। वहीं भवन में कोई भी खिड़की टूटी हुई नहीं होनी चाहिए। अन्यथा वहां रहने वाले लोगों की आंखों में कष्ट (नेत्र रोग) रहने की संभावना बनी रहती है। -- प्रमोद कुमार अग्रवाल, ज्योतिष-वास्तु लेखक एवं सलाहकार, आगरा। 

मंगलवार, 10 सितंबर 2024

उपयोगी वास्तु टिप्स

 @ धन वृद्धि के लिए चंद्रवेधी मकान को शुभ माना गया है। उत्तर से दक्षिण में लंबा मकान चंद्रवेधी होता है।

@ त्रिकोणीय जमीन पर कभी भी मकान नहीं बनवाना चाहिए वरना आकस्मिक दुर्घटनाओं से जान व माल के नुकसान की संभावना रहती है। 

@ शयन कक्ष में एक से अधिक प्रवेश द्वार न हों अन्यथा कमरे की पॉजिटिव एनर्जी एक द्वार से आकर दूसरे से बाहर निकलती रहेगी। खिड़कियां एक से अधिक हो सकती हैं। 

@ घर की सीढ़ियां टूटी-फूटी या असुविधाजनक नहीं होनी चाहिए अन्यथा परिवार में अशांति और कलह की संभावना बढ़ जाती है। -- प्रमोद कुमार अग्रवाल, ज्योतिष-वास्तु लेखक एवं सलाहकार, आगरा। 

शुभ कार्य के लिए शुभ है पुष्य नक्षत्र

 ज्योतिष के अनुसार पुष्य नक्षत्र के स्वामी देवगुरु बृहस्पति हैं। बृहस्पतिवार और रविवार को पुष्य नक्षत्र होना अत्यंत शुभ माना जाता है। इन दोनों दिनों में कोई भी शुभ कार्य किया जा सकता है।

   वहीं सोमवार, मंगलवार, बुधवार और शनिवार को पुष्य नक्षत्र का होना मध्यम फलदायी होता है। इन दिनों में भी शुभ कार्य किए जा सकते हैं। 

    शुक्रवार के दिन पुष्य नक्षत्र के होने से उत्पात नामक योग बनता है। इसलिए जब तक उत्पात योग रहे, तब तक कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए। -- प्रमोद कुमार अग्रवाल, ज्योतिष-वास्तु लेखक एवं सलाहकार, आगरा। 

ज्योतिष में हंस योग

 जन्म कुंडली में जब केंद्र में बृहस्पति ग्रह, उच्च के हों अथवा अपनी राशि में बैठे हों तो यह स्थिति हंस योग कहलाती है। कर्क राशि में बृहस्पति उच्च के और धनु व मीन राशि में बृहस्पति स्व राशि के माने जाते हैं। जिन लोगों की कुंडली में हंस योग होता है वे सदैव सम्मानित होते हैं और उनके कार्य की प्रशंसा भी होती है। -- प्रमोद कुमार अग्रवाल, ज्योतिष-वास्तु लेखक एवं सलाहकार, आगरा

विवाह के लिए शुभ नक्षत्र

 ज्योतिष के अनुसार लड़की या लड़के के विवाह के लिए शुभ नक्षत्र देखना आवश्यक माना गया है। रोहिणी, उत्तरा फाल्गुनी, उत्तरा भाद्रपद, उत्तराषाढ़, रेवती, मूल, स्वाति, मृगशिरा, मघा, अनुराधा और हस्त नक्षत्रों को विवाह के हैं। -- प्रमोद कुमार अग्रवाल, ज्योतिष-वास्तु लेखक एवं सलाहकार, आगरा।

अनबूझ मुहूर्त

 पूनम की पड़वा भली अर अमावस की बीज। 

अणु बूझ्या मुहरत भला कै तैरस के तीज।।

    राजस्थान के एक कवि द्वारा रचित इस दोहे में किसी भी कार्य को करने के लिए अनबूझ मुहूर्त के बारे में बताया गया है। जिसके अनुसार पूर्णमासी के बाद आने वाली प्रतिपदा तिथि (पड़वा), त्रयोदशी तिथि (तेरस) एवं तृतीया तिथि (तीज) और अमावस्या के बाद शुक्ल पक्ष की द्वितिया तिथि (दौज) अनबूझ मुहूर्त होती हैं। इन तिथियों में किसी काम को करने के लिए मुहूर्त नहीं देखा जाता है और काम में भी सफलता मिलती है। -- प्रमोद कुमार अग्रवाल, ज्योतिष-वास्तु लेखक एवं सलाहकार, आगरा। 

बेहतरी के लिए रखें उत्तर-पूर्व दिशा का ध्यान

  वास्तु शास्त्र के अनुसार उत्तर दिशा के देवता धन प्रदान करने वाले कुबेर हैं, जबकि ईशान कोण (उत्तर-पूर्व विदिशा) के देवता बुद्धि प्रदाता ब्रहस्पति हैं। बुद्धि और धन के बल पर ही कोई भी कार्य, चाहे वह खुद का व्यापार हो या व्यवसाय अथवा किसी दूसरे के लिए किया जाने वाला शारीरिक व मानसिक श्रम, आसानी से सफलता पूर्वक संपन्न किया जा सकता है। 

   किसी भी वास्तु में रहने, व्यापार या व्यवसाय करने के दौरान अपेक्षित लाभ प्राप्त करने के लिए यह आवश्यक है कि उस वास्तु में उत्तर और पूर्व दिशाओं का विशेष ध्यान रखा जाए, जिससे कि वहां ब्रहस्पति और कुबेर देवताओं की कृपा सदैव बनी रहे। इसीलिए वास्तु नियमों में उत्तर व पूर्व दिशाओं को खाली, खुला, नीचा, स्वच्छ और वास्तु दोष से मुक्त रखा जाना अनिवार्य बताया गया है। 

   उत्तर और पूर्व दिशाओं में किसी भी तरह के भारी निर्माण, शौचालय, कबाड़ घर, किचन, सैप्टिक टैंक, सीढ़ियां, ओवरहेड पानी की टंकी, विशालकाय पेड़ का होना वास्तु दोष का कारण बनता है। जिसकी वजह से शारीरिक व मानसिक रोग, मांगलिक कार्यों में रुकावट, कर्ज में वृद्धि, घन की कमी, पितृ दोष आदि समस्याएं आने लगती हैं। इसलिए उत्तर-पूर्व दिशाओं को दोष मुक्त बनाए रखकर भी बेहतर जीवन का आनंद लिया जा सकता है।-- प्रमोद कुमार अग्रवाल, ज्योतिष-वास्तु लेखक एवं सलाहकार, आगरा। 

ईशान कोण में टॉयलेट है तो करें उपाय

  किसी भवन के उत्तर-पूर्व कोने (ईशान कोण) में जाने-अनजाने बना हुआ टॉयलेट वास्तु की दृष्टि से दोषपूर्ण माना गया है। जिस भवन के पूर्व या उत्तर दिशा में आम रास्ता हो तो, वहां ईशान कोण में टॉयलेट का होना अधिक दुखदायी होता है। जिससे परिवार में अशांति, जटिल रोग और अनैतिक कार्यों से धन व सम्मान की हानि होने की संभावना रहती है। 

   अगर भवन के ईशान कोण में टॉयलेट है तो उसे स्थायी रूप से बंद करना या फिर केवल बाथरूम के रूप मे उपयोग करना ही बेहतर है। लेकिन जगह की कमी के कारण ये संभव नहीं है तो टॉयलेट के दरवाजे के बाहरी भाग में एक बड़ा दर्पण इस तरह लगा दें कि वह दक्षिण-पश्चिम कोण से आसानी से नज़र आए। 

   यदि किसी वजह से दर्पण लगाना भी संभव न हो तो टॉयलेट के अंदर कांच के एक बाउल में साबुत या पिसा नमक या फिटकरी के टुकड़े रखें, साथ ही टॉयलेट के दरवाजे के बाहरी भाग में शिकार करते हुए या मुंह फाड़ते हुए शेर का एक बड़ा चित्र लगा दें। रखे गए नमक या फिटकरी को हर महीने पानी में बहाकर नया रख दें। -- प्रमोद कुमार अग्रवाल, ज्योतिष-वास्तु लेखक एवं सलाहकार, आगरा। 

शिक्षण संस्थानों के लिए भी हैं वास्तु नियम

   देखने में आता है कि कुछ स्कूल, कॉलेज या शिक्षण संस्थानों में योग्य विद्यार्थी प्रवेश पाने से वंचित रह जाते हैं, तो कुछ संस्थान ऐसे भी होते हैं जहां शिक्षा का स्तर बेहतर होने के बाद भी कक्षाओं में सीटें खाली नजर आती हैं। इसका कारण उस संस्थान का वास्तु नियमों के अनुसार निर्मित अथवा व्यवस्थित न होना भी हो सकता है। स्कूल, कॉलेज एवं शिक्षण संस्थानों के लिए भी वास्तु शास्त्र में कुछ नियम दिए गए हैं, जिनका अनुपालन करके उस संस्थान को बुलंदियों पर ले जाया जा सकता है। 

   शिक्षण संस्थान कोई भी हो, उसकी दिशा और विदिशा को ध्यान में रखते हुए निम्नलिखित व्यवस्थाएं की जा सकती हैं-

@ उत्तर-पूर्व कोण (ईशान) में क्लास रूम/हॉस्टल/स्पोर्ट्स ग्राउंड। 

@ पूर्व में क्लास रूम/ प्रशासनिक विभाग/लाइब्रेरी। 

@ दक्षिण-पूर्व कोण (आग्नेय) में कैंटीन/ मनोरंजन कक्ष। 

@ दक्षिण में वाइस प्रिंसिपल/वाइस चांसलर कक्ष। 

@ दक्षिण-पश्चिम कोण (नैरुत्य) में प्रिंसिपल/डायरेक्टर/चांसलर कक्ष। 

@ पश्चिम में क्लास रूम/ एक्जामिनेशन डिपार्टमेंट/प्रैक्टिकल लैब। 

@ उत्तर-पश्चिम कोण (वायव्य) में स्टाफ रूम/टॉयलेट। 

@ उत्तर दिशा में क्लास रूम/एकाउंट्स विभाग/हॉस्टल/लाइब्रेरी/स्पोर्ट्स ग्राउंड। 

@ ब्रह्म स्थान (मध्य) में खुली जगह/प्रेयर ग्राउंड। 

   इन सब के अलावा क्लास रूम वर्गाकार या आयताकार हों तथा ब्लैकबोर्ड उत्तर या पूर्व दिशा की दीवार पर बनवाएं जिससे कि पढ़ाई करते समय विद्यार्थियों का चेहरा उत्तर या पूर्व में हो।-- प्रमोद कुमार अग्रवाल, ज्योतिष-वास्तु लेखक एवं सलाहकार, आगरा। 

आत्महत्या की वजह भी हो सकती है वास्तु दोष

किसी भी भवन में होने वाले वास्तु दोष आर्थिक नुकसान, बीमारी, कैरियर में बाधा, व्यापार या व्यवसाय में घाटा, आकस्मिक दुर्घटना, मान सम्मान में कमी, परिवार के सदस्य का गलत रास्ते पर जाना जैसी बहुत सी समस्याओं की वजह हो सकते हैं। वहीं परिवार के किसी सदस्य द्वारा आत्महत्या करना भी वास्तु दोष की एक वजह हो सकता है। 

   वास्तु शास्त्र में ऐसे बहुत से दोषों का उल्लेख किया गया है, जिनके कारण परिवार के सदस्य मानसिक रूप से इतने त्रस्त हो जाते हैं कि वे आत्महत्या करने जैसा कदम उठाकर अपने पीछे परिवार को रोता बिलखता छोड़ जाते हैं। भवन में उत्तर-पूर्व कोण, दक्षिण-पूर्व कोण और दक्षिण-पश्चिम कोण दोषपूर्ण नहीं होने चाहिए, अन्यथा इन कोणों में बने कमरे में रहने वाले सदस्य मानसिक अवसाद, अशांति, तनाव, चिंता, उदासी, पागलपन आदि का शिकार हो सकते हैं। लगातार रहने वाले ये लक्षण जब उग्र रूप ले लेते हैं तो वह सदस्य आत्महत्या करने की कोशिश कर सकता है।

   अनुभव में यह आया है कि जिन भवनों में उत्तर-पूर्व कोण हमेशा खुला, खाली व स्वच्छ रहता है, उत्तर पश्चिम क्षेत्र में हल्का वजनदार सामान रखा जाता है, दक्षिण पश्चिम क्षेत्र को ऊंचा व भारी रखा जाता है, ब्रह्म स्थान स्वच्छ व खाली रहता है और दक्षिण-पश्चिम एवं दक्षिण-पूर्व दिशा में किसी प्रकार का कोई गड्ढा, कुंआ या भूमिगत जल स्रोत नहीं होता, वहां रहने वाले लोग मानसिक रूप से अधिक स्वस्थ बने रहते हैं और कैसी भी परिस्थिति हो, आत्महत्या जैसा कदम नहीं उठाते।-- प्रमोद कुमार अग्रवाल, ज्योतिष-वास्तु लेखक एवं सलाहकार, आगरा

सुखी मातृत्व के लिए वास्तु टिप्स

# नवयुगल के मध्य अच्छे संबंध, शांति, प्रेम और इच्छित संतान प्राप्ति के लिए भी वास्तु शास्त्र में कुछ नियम दिए गए हैं। सानंद जीवन व्यतीत करने के लिए नवविवाहित जोड़े को पश्चिम दिशा में बना बेडरूम देना चाहिए। 

 # गर्भावस्था के दौरान गर्भवती महिला को कभी भी उत्तर-पूर्व और दक्षिण-पूर्व में बने कमरे में नहीं सुलाना चाहिए।  साथ ही इस बात का भी ध्यान रखना चाहिए कि उसके कमरे में अंधेरा न रहे तथा कमरे की दीवारों पर गहरा लाल, काला या कोई अन्य तड़क-भड़क वाला रंग न हो रहा हो। 

 # बच्चे के जन्म के बाद जच्चा और बच्चा, दोनों को पश्चिम दिशा में बने कमरे में सुलाना चाहिए। कमरे में शुद्ध हवा के लिए पूर्व या उत्तर दिशा में खिड़कियां हों। यदि कमरे में दक्षिण दिशा में खिड़कियां हों तो उन्हें बंद ही रखें या फिर सुबह कुछ समय के लिए ही खोलें। दोपहर और शाम के समय खिड़कियों को बंद ही रखें। -- प्रमोद कुमार अग्रवाल, ज्योतिष-वास्तु लेखक एवं सलाहकार, आगरा। 

महत्वपूर्ण वास्तु टिप्स

 @ दक्षिण-पश्चिम क्षेत्र में सोने से गृह स्वामी का वर्चस्व घर और व्यापार पर कायम रहता है। यह भी जरूरी है कि इस क्षेत्र में कोई खिड़की, दरवाजा या रोशनदान न हो।

@ एक दीवार से मिले हुए दो मकान भवन स्वामी के लिए कष्टदायी होते हैं। इसलिए हर मकान की अलग-अलग दीवार होना आवश्यक है। 

@ उत्तर दिशा में रखा गया भारी सामान बीमारियों का कारण हो सकता है। जगह की कमी होने से अगर उत्तर दिशा में सामान रखना मजबूरी हो तो दीवार से कम से कम छह इंच दूर हटाकर रख सकते हैं।

@ घर की सीढ़ियां टूटी-फूटी या असुविधाजनक नहीं होनी चाहिए अन्यथा परिवार में अशांति और कलह की संभावना बढ़ जाती है। -- प्रमोद कुमार अग्रवाल, ज्योतिष-वास्तु लेखक एवं सलाहकार, आगरा

उपयोगी वास्तु टिप्स

## आग्नेय कोण (दक्षिण-पूर्व कोना) का संबंध स्वास्थ्य से होता है। इसके दूषित होने से घर में बीमारियों का वास होता है। इस दिशा में पानी का कोई भी स्रोत नहीं रखना चाहिए। बीमारी से बचाव के लिए आग्नेय कोण में लाल रंग का बल्व जला सकते हैं।

## वास्तु शास्त्र के अनुसार भूखंड खरीदते समय सबसे अच्छी दिशा उत्तर-पूर्व मानी गई है, लेकिन भूखंड किसी भी दिशा में हो, यदि उस पर निर्माण कार्य वास्तु शास्त्र के आधार पर कराया जाए तो सभी दिशाएं लाभप्रद होती हैं।

## जिस कमरे में सीढ़ी शुरू या समाप्त होती है, वहां किसी भी रोगी को नहीं रखना चाहिए। वरना जल्दी फायदा नहीं होगा। 

## सोते समय पैर हमेशा ठोस दीवार की तरफ होने चाहिए। इससे प्राणिक ऊर्जा बढ़ने के साथ-साथ स्वास्थ्य भी ठीक बना रहता है। 

## सीढ़ियों के नीचे खाली जगह में शौचालय बनवाने से स्वास्थ्य समस्या और मंदिर व तिजोरी बनवाने से कई तरह की विपत्तियों का सामना करना पड़ सकता है। -- प्रमोद कुमार अग्रवाल, ज्योतिष-वास्तु लेखक एवं सलाहकार।

उपयोगी ज्योतिष टिप्स

 @ जन्म कुंडली में जब केंद्र में बृहस्पति ग्रह, उच्च के हों अथवा अपनी राशि में बैठे हों तो यह स्थिति हंस योग कहलाती है। कर्क राशि में बृहस्पति उच्च के और धनु व मीन राशि में बृहस्पति स्व राशि के माने जाते हैं। जिन लोगों की कुंडली में हंस योग होता है वे सदैव सम्मानित होते हैं और उनके कार्य की प्रशंसा भी होती है।

@ ज्योतिष के अनुसार पुष्य नक्षत्र के स्वामी देवगुरु बृहस्पति हैं। बृहस्पतिवार और रविवार को पुष्य नक्षत्र होना अत्यंत शुभ माना जाता है। इन दोनों दिनों में कोई भी शुभ कार्य किया जा सकता है। वहीं सोमवार, मंगलवार, बुधवार और शनिवार को पुष्य नक्षत्र का होना मध्यम फलदायी होता है। इन दिनों में भी शुभ कार्य किए जा सकते हैं।

@ शुक्रवार के दिन पुष्य नक्षत्र के होने से उत्पात नामक योग बनता है। इसलिए जब तक उत्पात योग रहे, तब तक कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए। -- प्रमोद कुमार अग्रवाल, ज्योतिष-वास्तु लेखक एवं सलाहकार, आगरा

वास्तु के अनुसार बनाएं सीढियां

  मनुष्य के लिए रहने का भवन अथवा कमरा एक ऐसा मज़बूत सुरक्षा कवच होता है, जिसमें रहते हुए वह स्वयं को निश्चिन्त और सुरक्षित महसूस करता है। वास्तु शास्त्र के नियमों के अनुसार बने भवन अथवा कमरे में मनुष्य अपने जीवन में प्राप्त सुख-सुविधाओं का बिना किसी व्यवधान के उपभोग कर सकता है। 

* भवन निर्माण के दौरान भवन में अन्य निर्माण के साथ-साथ छत पर जाने के लिए सीढ़ियाँ भी बनवाई जाती हैं। वास्तु नियमों के अनुसार सीढ़ियाँ भवन के नैऋत्य कोण अर्थात दक्षिण-पश्चिम दिशा में ही दक्षिण से पश्चिम की ओर जाती हुईं बनवानी चाहिए। 

* सीढ़ियाँ हमेशा दाहिनी ओर ही होनी चाहिए। बायीं ओर सीढ़ियाँ बनवाना शुभ नहीं होता है। स्थान के अभाव में सीढ़ियाँ पश्चिम या उत्तर दिशा में भी बनवाई जा सकती हैं। 

* सीढ़ियाँ बनवाते समय इस बात का विशेष ध्यान रखना चाहिए कि सीढ़ियों में पगतियों की संख्या सदैव विषम अर्थात पांच, सात, नौ, ग्यारह, सत्रह ही हों। 

* अगर सीढ़ियाँ घुमावदार हैं तो उनमें रेलिंग अवश्य लगवाएं। सीढ़ियों को कभी भी चिकना और त्रिकोण आकार में नहीं बनवाएं तथा सीढ़ियों के मध्य का अंतर नौ इंच से अधिक भी न रखें। 

* इस बात का भी ध्यान रखें कि भवन के मुख्य द्वार के सामने सीढ़ियाँ नहीं दिखाई देनी चाहिए। 

* वास्तु शास्त्र के अनुसार सीढ़ियों के नीचे पूजा स्थल, शयन कक्ष, बैठक अथवा शौचालय नहीं बनवाना चाहिए। भवन निर्माण के समय यदि जगह कम पड़ रही हो तो ऐसी स्थिति में सीढ़ियों के नीचे स्नानघर या स्टोर रूम बनवाने पर कोई रोक नहीं है।

* सीढ़ियों में अँधेरा रहना शुभ नहीं माना गया है, इसलिए सीढ़ियों में प्रकाश की समुचित व्यवस्था होनी आवश्यक है।-- प्रमोद कुमार अग्रवाल, ज्योतिष-वास्तु लेखक एवं सलाहकार, आगरा।

वास्तु दोष : कारण और निवारण

   किसी आवासीय या व्यावसायिक भवन में वास्तु दोष होना कई तरह की समस्याओं का कारण होता है, जिनका आसानी से पता लगाया जा सकता है। वास्तु दोष की जानकारी होने पर उसके निवारण के लिए उपाय भी संभव है। यहां हम कुछ ऐसे वास्तु दोषों का उल्लेख कर रहे हैं जो सामान्य रूप से जीवन में देखे अथवा अनुभव किये जाते हैं।

@@ भवन में रहने वाले लोगों का मन अशांत रहता हो अथवा उनमें नास्तिकता की भावना बढ़ रही हो तो वहां उत्तर-पूर्व यानी ईशान दिशा दोषपूर्ण हो सकती है। निवारण के लिए इस दिशा को खाली और साफ़ रखना चाहिए तथा इस दिशा में सरस्वती यंत्र सिद्ध करके स्थापित कर देना चाहिए।

@@ भवन में आए दिन आग लगने की घटनाएं हों अथवा अकारण ही वहां के सदस्यों में क्लेश या वाद-विवाद होता हो तो दक्षिण-पूर्व यानी आग्नेय दिशा दोषपूर्ण हो सकती है। उपाय के लिए इस दिशा में वास्तु दोष निवारण यंत्र सिद्ध करके शुक्ल पक्ष के मंगलवार को स्थापित कर देना चाहिए। इस दिशा में कभी भी पानी का कोई स्रोत न रखें। एक साथ पानी और अग्नि को भी इस दिशा में नहीं रखना चाहिए।

@@  परिवार के सदस्यों में यदि आलस्य और नींद न आने की समस्या दिखाई दे रही हो तो, आय से अधिक खरचा हो तथा प्रयासों के बावजूद आय के स्थाई साधन न बन पा रहे हों तो इसका कारण उत्तर दिशा का दक्षिण दिशा से अधिक ऊंचा होना अथवा अन्य दोष होना हो सकता है। निवारणार्थ उत्तर दिशा को साफ़ रखें और श्री यंत्र को सिद्ध करके स्थापित करें वहीँ, सदैव दक्षिण दिशा की ओर सिर करके सोने की आदत डालें।

@@ बनते हुए कामों में रुकावट आना तथा टोना-टोटका या बुरी आत्माओं का असर बने रहना भवन के ब्रह्म स्थल के भारी एवं दोषपूर्ण होने की वजह हो सकता है। इसलिए भवन के इस अत्यंत महत्वपूर्ण भाग को हमेशा खाली, साफ़ एवं खुला रखना ही श्रेष्ठ उपाय है। ब्रह्म स्थल में तुलसी जी को रखना और नियमित रूप से जल चढ़ाकर दीपक जलाना भी वास्तु दोष के  निवारण का  आसान तरीका है।

@@ अगर भवन में अक्सर चोरी की घटनाएं होती हैं तो इसका कारण दक्षिण-पश्चिम यानी नैऋत्य दिशा का खुला या नीचा होना माना जाता है। इस दोष के निवारण के लिए इस दिशा को बंद रखते हुए सिद्ध किया हुआ राहु यंत्र स्थापित करने से सकारात्मक परिणाम मिलते हैं।-- प्रमोद कुमार अग्रवाल, ज्योतिष-वास्तु लेखक एवं सलाहकार, आगरा। 

सोमवार, 9 सितंबर 2024

वास्तु के अनुसार देव पूजा के लिए स्थान

जीवन में सुख, शांति, संपन्नता और रोगों से छुटकारा पाने के लिए हम सभी अपने-अपने तरीके से पूजा-पाठ, जप, तप, मंत्र जप, यज्ञ, दान आदि द्वारा ईश्वर को प्रसन्न करके उनकी कृपा पाने की कोशिश करते हैं, परंतु कई बार निरंतर प्रयासों के बाद भी अपेक्षित लाभ नहीं मिलता, तब जीवन में निराशा और नकारात्मकता हावी होने लगती है तथा ईश्वर भक्ति से मन विचलित होने लगता है। इसका कारण देव पूजा स्थल का उचित दिशा में वास्तु के अनुरूप न होना भी हो सकता है।

     कहा ये जाता है कि ईश्वर सर्वत्र विद्यमान हैं, लेकिन वास्तु शास्त्र में देव पूजा के लिए अलग-अलग दिशाओं को महत्व दिया गया है। वहीँ धार्मिक कार्यों के निष्पादन में सदैव पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठना ही उचित माना गया है। वास्तु नियमों के अनुसार अगर हम देव पूजा स्थल के उद्देश्य से दिशाओं पर चर्चा करें तो पूर्व दिशा में सूर्योदय होने से यह दिशा सूर्य देव तथा सूर्यवंशी प्रभु श्री राम की पूजा के लिए उत्तम है। इस दिशा में श्री राम दरबार का चित्र लगाकर पूजा की जा सकती है। पश्चिम दिशा का संबंध बृहस्पति यानि गुरु से होता है, इसलिए यहां अपने आराध्य एवं आध्यात्मिक, धार्मिक अथवा शैक्षिक गुरु की पूजा का स्थल बनाया जा सकता है।

   उत्तर दिशा को कुबेर की दिशा कहा गया है। अतः इस दिशा में धन की देवी महालक्ष्मी और बुद्धि प्रदाता श्री गणेश जी का पूजा स्थल शुभ फलदायी होता है। उत्तर दिशा के महत्व को देखते हुए ही धन वृद्धि के लिए धन रखने वाली अलमारी या तिजोरी का मुख उत्तर दिशा में ही खुलने को उचित माना जाता है। दक्षिण दिशा में महाकाली या पवन पुत्र हनुमान जी की पूजा के लिए स्थल बनाया जा सकता है। माना जाता है कि दक्षिणमुखी हनुमान जी की आराधना करने से सभी प्रकार के रोग, समस्याओं और कष्टों से छुटकारा मिलने लगता है।

    उत्तर-पूर्व दिशा अर्थात ईशान कोण को घर या व्यापारिक स्थल पर मंदिर या पूजा स्थल बनाने के लिए सर्वाधिक उपयुक्त स्थान माना जाता है। यह दिशा भगवान शिव और पंच देवोँ की पूजा के लिए श्रेष्ठ है। कुलदेवी की पूजा के लिए उत्तर-पश्चिम दिशा अर्थात वायव्य कोण निर्धारित किया गया है। यहां अपने कुल की देवी की स्थापना करके उनकी पूजा-अर्चना की जा सकती है।-- प्रमोद कुमार अग्रवाल, ज्योतिष-वास्तु लेखक एवं सलाहकार, आगरा। 

रंगों का असर और स्वास्थ्य

 जिस प्रकार सूर्य के प्रकाश में सात रंगों का समन्वय होता है, उसी तरह मनुष्य के शरीर में भी सात रंगों की किरणें निश्चित अनुपात में रहती हैं। सौर मंडल में मौजूद विभिन्न ग्रहों से उत्सर्जित होने वाली अंतरिक्ष की चुंबकीय अल्ट्राकॉस्मिक किरणों के प्रभाव से यदि किसी रंग की किरणों की सक्रियता असंतुलित हो जाती है तो शरीर में रोग उत्पन्न हो जाते हैं। 


   प्राकृतिक चिकित्सा के अंतर्गत सौर मंडल में मौजूद ग्रहों से निकलने वाली किरणों के सिद्धांत को स्वीकार करते हुए रोगों के उपचार पर बल दिया गया है। इसके लिए रोग की प्रकृति के अनुसार अलग-अलग रंग की कांच की बोतलों में तीन चौथाई भाग तक जल भरकर व सूर्य की रौशनी में रखकर सूर्य-तापित जल तैयार कर रोगी को पिलाया जाता है। 


    शरीर में जिस ग्रह की कॉस्मिक रश्मियों की कमी हो, उस ग्रह से संबंधित रत्न की भस्म या जल के रूप में औषधि तैयार कर रोगी को दी जाती है। इसके अलावा रोगी की कुंडली के विश्लेषण के बाद उचित रत्न धारण कराने से भी रोग निवारण में मदद मिलती है। -- प्रमोद कुमार अग्रवाल, ज्योतिष-वास्तु लेखक एवं सलाहकार, आगरा।

उपयोगी वास्तु टिप्स (8)

 @ वास्तु शास्त्र के अनुसार घरों में उत्तर, पूर्व और उत्तर-पूर्व दिशाओं में घास या छोटे पौधे लगाए जा सकते हैं। जलीय व ठंडक देने वाले पौधे दक्षिण व दक्षिण-पूर्व दिशा में लगा सकते हैं। जबकि बड़े वृक्षों के लिए दक्षिण या दक्षिण-पश्चिम दिशा श्रेष्ठ मानी गई है।

@ घरों में काम न आने वाले सामान को कबाड़ घर में रखा जाता है। वास्तु शास्त्र के अनुसार कबाड़ घर हमेशा दक्षिण-पश्चिम विदिशा (नैऋत्य कोण) में या उसके नज़दीक ही बनाना चाहिए। उत्तर व पूर्व दिशा, ईशान कोण या आग्नेय कोण में भूल कर भी कबाड़ नहीं रखना चाहिए। कबाड़ घर में सोना, पूजा घर बनाना और दीवारों पर देवी-देवता की तस्वीर लगाना दोषपूर्ण होता है।

@ किसी भी भवन में दक्षिण दिशा की तुलना में उत्तर दिशा में अधिक खाली जगह छोड़नी चाहिए। इसी तरह पश्चिम दिशा की अपेक्षा पूर्व दिशा में भी अधिक खाली जगह छोड़नी चाहिए। इसके विपरीत होने पर वास्तु दोष होता है और इससे जीवन में समस्याएं और कष्ट का सामना करना पड़ता है।-प्रमोद कुमार अग्रवाल, लेखक एवं सलाहकार, आगरा

उपयोगी वास्तु टिप्स (7)

##  छत पर रखी जाने वाली पानी की टंकी को दक्षिण-पश्चिम या पश्चिम क्षेत्र में एक प्लेटफार्म बनाकर ही रखना चाहिए और इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि टंकी का पानी ओवरफ्लो या लीक न हो। अन्यथा आर्थिक नुकसान की संभावना बनी रहेगी।

## किचन में गैस दक्षिण-पूर्व विदिशा यानि आग्नेय कोण में हो। साथ ही भोजन बनाते समय महिला का मुख पूर्व दिशा में रहे। दक्षिण दिशा में मुख करके भोजन बनाने से स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।

## जिन लोगों की जन्म कुंडली में राहु अशुभ फल दे रहा हो, उन्हें आग्नेय कोण (दक्षिण-पूर्व विदिशा) में बनी किचन में बैठ कर भोजन करना चाहिए।

## मकान की उत्तर-पूर्व विदिशा (ईशान कोण) में पति-पत्नी को नहीं सोना चाहिए। वास्तु के अनुसार यह स्थिति दोनों में से किसी की बीमारी का कारण बन सकती है। -- प्रमोद कुमार अग्रवाल, ज्योतिष-वास्तु लेखक एवं सलाहकार, आगरा। 

उपयोगी वास्तु टिप्स (6)

 @ घर में वाहन की पार्किंग या पशुओं को बांधने के लिए उत्तर-पश्चिम कोण या विदिशा सही मानी गई है। कभी भी  उत्तर-पूर्व दिशा में पार्किंग नहीं रखनी चाहिए।

@ वास्तु शास्त्र के अनुसार नए घर में प्रवेश करने से पहले वास्तु पूजन आवश्यक है। वास्तु पूजा करवाए बिना नए घर में प्रवेश करने से अनेक रोग व कष्टों का सामना करना पड़ सकता है।

@ किचन में दक्षिण-पश्चिम दिशा में खाना पकाने के लिए गैस का चूल्हा, स्टोव, अंगीठी, ओवन, इलेक्ट्रिक चूल्हा आदि का होना वास्तु दोष है। इसके कारण घर में रहने वाली महिलाओं का स्वास्थ्य खराब होने की संभावना बनी रहती है। यदि ऐसा है तो किचन में चूल्हा आदि को दक्षिण-पूर्व दिशा (आग्नेय कोण) की तरफ शिफ्ट कर देना चाहिए।--प्रमोद कुमार अग्रवाल, वास्तु आचार्य एवं लेखक, आगरा। 

उपयोगी वास्तु टिप्स (5)

 # वास्तु शास्त्र के अनुसार भवन के मुख्य द्वार पर जुड़वां मछलियों का चित्र बनाने या फिर जुडवां मछलियां लटकाने से परिवार में सुख व समृद्धि बनी रहती है।

# घर की उत्तर-पूर्व दिशा को महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दिशा में भूमिगत जल स्रोत, बरामदा, पूजा घर, मंदिर, पोर्टिको, खुली जगह, बेसमेंट, बालकनी आदि बनवा सकते हैं। लेकिन इस दिशा में कोई भी भारी निर्माण, लैट्रिन, दीवार, सीढ़ी आदि के होने से धन, स्वास्थ्य व संतान संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।

# घर के किसी भी कमरे में युद्ध के फोटो, इंद्रजाल के समान काल्पनिक फोटो, राक्षस, पहाड़ व जंगल के फोटो, नग्न या रोते हुए बच्चे, महिला व पुरुष के फोटो, हिंसक व जंगली जानवरों के फोटो अथवा गरीबी या भयानक स्थिति को दर्शाने वाले फोटो कभी भी नहीं लगाने चाहिए। -- प्रमोद कुमार अग्रवाल, वास्तु आचार्य एवं लेखक,आगरा।

उपयोगी वास्तु टिप्स (4)

 @ भवन के प्रवेश द्वार पर हल्दी और चावल के आटे की पीठी से हाथ को मांगलिक चिंह के रूप में छापा जाता है। हाथ कर्म का प्रतीक है जबकि हाथ की चारों अंगुलियां व अंगूठा पंच तत्वों (जल, वायु, अग्नि, पृथ्वी व आकाश) का द्योतक है। माना जाता है कि इससे घर में सुख, शांति, आरोग्य और आपसी सद्भाव बना रहता है। 

@ किसी भी जमीन में पूर्व और उत्तर दिशाओं में ढलान का होना उत्तम माना जाता है। दक्षिण व पश्चिम दिशा की तरफ जमीन में ढलान होने से रोग, धन का अपव्यय, अशांति व कलह होने की संभावना बनी रहती है।

@ प्राचीन काल से ही स्वास्तिक का प्रयोग मांगलिक चिह्न के रूप में किया जाता रहा है। यह गणेश जी के लिप्यात्मक स्वरूप के अलावा चारों दिशाओं का प्रतीक भी है। मकान के मुख्य द्वार के दोनों ओर शुद्ध घी व सिंदूर मिलाकर स्वास्तिक चिह्न बनाने से वहां नकारात्मक ऊर्जा से बचाव होता है और परिवार में सुख-समृद्धि व शांति बनी रहती है।-वास्तु आचार्य एवं लेखक प्रमोद कुमार अग्रवाल, आगरा।

उपयोगी वास्तु टिप्स (3)

# भवन की दक्षिण-पश्चिम दिशा में बना हुआ शयन कक्ष भवन स्वामी के लिए शुभ रहता है। जबकि पश्चिम दिशा में बना हुआ शयन कक्ष टूरिंग का काम करने वाले भवन स्वामी के लिए अच्छा माना जाता है।

# किसी भी दुकान, ऑफिस अथवा व्यापारिक स्थल में बैठते समय अपना मुख उत्तर पूर्व दिशा की तरफ रखना चाहिए। इसके साथ-साथ आलमारी, फर्नीचर, रिकॉर्ड, भारी सामान आदि हमेशा पश्चिम व दक्षिण दिशा में ही रखना चाहिए। ऐसा करने से आर्थिक लाभ की स्थिति बनती है और आश्चर्यजनक प्रगति देखने को मिलती है।

# किराये के मकान में वास्तु के अनुसार बदलाव करना संभव नहीं होता। इसलिए जहां तक संभव हो मंदिर ईशान कोण में, गैस चूल्हा आग्नेय कोण में, भारी सामान दक्षिण पश्चिम में और पलंग का सिरहाना दक्षिण या पश्चिम दिशा में रखना चाहिए। एक कमरे के मकान में भी यही व्यवस्था करने से बहुत सी समस्याओं का समाधान होता है।- प्रमोद कुमार अग्रवाल, ज्याोतिष-वास्तु लेखक एवं सलाहकार, आगरा। 

उपयोगी वास्तु टिप्स (2)

 # वास्तु शास्त्र के अनुसार घर के अंदर पूर्व या उत्तर दिशा में बाथरूम (केवल नहाने के लिए), लैट्रीन (शौचालय) पश्चिम या वायव्य कोण से हटकर उत्तर में या दक्षिण दिशा में बनवा सकते हैं। बाथरूम व लैट्रीन, दोनों एक साथ पश्चिमी वायव्य कोण व पूर्वी आग्नेय कोण में बनाए जा सकते हैं।

# वास्तु शास्त्र के अनुसार पृथ्वी, जल, वायु, अग्नि और आकाश को पंचतत्व माना गया है। इनमें से जल जीवन का अमृत है। जल का दान करना शुभ होता है। इसलिए जितना संभव हो, जल का दान करते रहें।

# घर की उत्तर-पूर्व दिशा में बने फर्श का दक्षिण-पश्चिम में बने फर्श से कुछ ऊंचा होना वास्तु दोष है। इस दोष से बचने के लिए दक्षिण-पश्चिम के फर्श को ऊंचा कराएं अथवा पश्चिम दिशा के कोने में एक चबूतरा बनवाएं।-- प्रमोद कुमार अग्रवाल, ज्योतिष-वास्तु लेखक एवं सलाहकार, आगरा।

उपयोगी वास्तु टिप्स (1)

 # किसी भवन के नैऋत्य कोण (दक्षिण-पश्चिम कोना), आग्नेय कोण (दक्षिण-पूर्व कोना) और वायव्य कोण (उत्तर-पश्चिम कोना) की दिशा में गड्ढा या कुआं नहीं होना चाहिए। ऐसा होने से उस भवन में रहने वाले लोगों में आपसी कलह और अशांति बनी रहती है।

# अगर किचन आग्नेय कोण के अलावा किसी दूसरी जगह है तो किचन में गैस या स्टोव आदि को आग्नेय कोण में रखें और रात में किचन की सफाई के बाद उत्तर दिशा की दीवार के पास तांबे के लोटे में पानी भरकर रखें। दूसरे दिन यानि सुबह उस पानी को पौधों में डाल दें। 

# मकान में अगर अनाज या खाद्य पदार्थ रखने के लिए अलग से स्टोर बनाना हो तो, उत्तर-पश्चिम विदिशा (वायव्य कोण) शुभ होती है। इससे घर में अन्न आदि की कमी नहीं रहती। ऐसे स्टोर को कभी भी खाली नहीं छोड़ना चाहिए बल्कि स्टोर में थोड़ा बहुत अन्न या अन्य खाद्य पदार्थ अवश्य रखने चाहिए। ---- प्रमोद कुमार अग्रवाल, ज्योतिष-वास्तु लेखक एवं सलाहकार, आगरा

वास्तु और स्वास्थ्य

शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य की दृष्टि से भी वास्तु के नियम अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। जिस वास्तु में किचन, टॉयलेट, मास्टर बेडरूम और सीढ़ियों की स्थिति वास्तु नियमों के विपरीत होती है, ईशान कोण दोषपूर्ण होता है एवं उत्तर व पूर्व दिशा की तुलना में दक्षिण दिशा अधिक नीची होती है, वहां रहने वाले लोगों का स्वास्थ्य किसी न किसी रूप में प्रभावित होता है। 

   शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ रहने के लिए यह आवश्यक है कि वास्तु दोषमुक्त हो। अगर जगह की कमी के कारण या किसी अन्य कारण से वास्तु दोष बना हुआ है तो किसी योग्य एवं अनुभवी वास्तु विशेषज्ञ से संपर्क करके वास्तु दोषों का निवारण करा लेना चाहिए। क्योंकि लंबे समय तक दोषपूर्ण वास्तु में रहने से आर्थिक और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के बढ़ने की संभावना बनी रहती है। -- प्रमोद कुमार अग्रवाल, वास्तु आचार्य, आगरा।

गुरुवार, 5 सितंबर 2024

बारिश के मौसम में त्वचा पर संक्रमण का खतरा

बारिश के मौसम में वायरल बुखार के साथ ही त्वचा रोग के मरीजों की संख्या में भी बढ़ोत्तरी हो गई है। इनमें ज्यादातर को त्वचा में दाने, लाली, खुजली और जलन की समस्या है। त्वचा संक्रमण का इलाज नहीं कराने पर रोग गंभीर रूप ले सकता है। 

    एसएन मेडिकल कॉलेज के त्वचा रोग विभाग के अध्यक्ष डॉक्टर यतेंद्र चाहर ने बताया कि त्वचा में संक्रमण का कारण मौसम में नमी का होना है। नमी की वजह से कपड़ों पर फंगस और जीवाणु पनप रहे हैं। इससे बचने के लिए कपड़ों को सीधी धूप में सुखाना चाहिए। धूप नहीं निकल रही हो तो कपड़ों पर प्रेस करके सुखाने के बाद ही पहनना चाहिए। तंग कपड़े पहनकर न रहें। 
   डॉक्टर चाहर ने बताया कि बारिश के मौसम में त्वचा रोगों से बचने के लिए कभी भी गीले कपड़े व जूते नहीं पहनें। गीले कपड़े बदलकर तुरंत सूती कपड़े पहनकर बैठें। अपने कपड़े, हेयरब्रश, मौजे व जूते आदि किसी से भी शेयर नहीं करें। बालों को धोने के बाद अच्छे से सूखने के बाद ही बांधकर। नहाते समय अपने नाखूनों और नाखूनों के नीचे के हिस्से को अच्छी तरह साफ करें। -- प्रमोद कुमार अग्रवाल (न्यूज़लाइन ब्यूरो)

सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट इलाहाबाद के महत्वपूर्ण आदेश

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