किसी भी भवन में होने वाले वास्तु दोष आर्थिक नुकसान, बीमारी, कैरियर में बाधा, व्यापार या व्यवसाय में घाटा, आकस्मिक दुर्घटना, मान सम्मान में कमी, परिवार के सदस्य का गलत रास्ते पर जाना जैसी बहुत सी समस्याओं की वजह हो सकते हैं। वहीं परिवार के किसी सदस्य द्वारा आत्महत्या करना भी वास्तु दोष की एक वजह हो सकता है।
वास्तु शास्त्र में ऐसे बहुत से दोषों का उल्लेख किया गया है, जिनके कारण परिवार के सदस्य मानसिक रूप से इतने त्रस्त हो जाते हैं कि वे आत्महत्या करने जैसा कदम उठाकर अपने पीछे परिवार को रोता बिलखता छोड़ जाते हैं। भवन में उत्तर-पूर्व कोण, दक्षिण-पूर्व कोण और दक्षिण-पश्चिम कोण दोषपूर्ण नहीं होने चाहिए, अन्यथा इन कोणों में बने कमरे में रहने वाले सदस्य मानसिक अवसाद, अशांति, तनाव, चिंता, उदासी, पागलपन आदि का शिकार हो सकते हैं। लगातार रहने वाले ये लक्षण जब उग्र रूप ले लेते हैं तो वह सदस्य आत्महत्या करने की कोशिश कर सकता है।
अनुभव में यह आया है कि जिन भवनों में उत्तर-पूर्व कोण हमेशा खुला, खाली व स्वच्छ रहता है, उत्तर पश्चिम क्षेत्र में हल्का वजनदार सामान रखा जाता है, दक्षिण पश्चिम क्षेत्र को ऊंचा व भारी रखा जाता है, ब्रह्म स्थान स्वच्छ व खाली रहता है और दक्षिण-पश्चिम एवं दक्षिण-पूर्व दिशा में किसी प्रकार का कोई गड्ढा, कुंआ या भूमिगत जल स्रोत नहीं होता, वहां रहने वाले लोग मानसिक रूप से अधिक स्वस्थ बने रहते हैं और कैसी भी परिस्थिति हो, आत्महत्या जैसा कदम नहीं उठाते।-- प्रमोद कुमार अग्रवाल, ज्योतिष-वास्तु लेखक एवं सलाहकार, आगरा
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