@ वास्तु शास्त्र के सभी नियम और सिद्धांत दिशा, विदिशा एवं पंचतत्वों पर आधारित हैं। "जल, वायु, आकाश, पृथ्वी तथा अग्नि", पंचतत्व हैं।
@ किसी भी वास्तु में इन पंचतत्वों के संतुलित प्रयोग से वहां रहने या किसी तरह का काम करने वाले लोगों में "सुख-समृद्धि, धन व संतान लाभ, आरोग्य, मानसिक शांति" आदि सकारात्मक प्रभाव देखने को मिलते हैं।
@ अगर किसी वजह से वास्तु के निर्माण में इन पंचतत्वों का संतुलित प्रयोग संभव न हो तो इनमें से केवल तीन तत्वों, "पृथ्वी, जल व अग्नि" को वास्तु के नियमानुसार स्थापित करने से भी उस वास्तु के उपयोग से सुखमय जीवन व्यतीत किया जा सकता है।
@ माना जाता है कि वास्तु में पृथ्वी, जल व अग्नि के संतुलित प्रयोग से शेष दोनों तत्व, वायु व आकाश अपने आप ही संतुलित व अनुकूल हो जाते हैं।--प्रमोद कुमार अग्रवाल, वास्तु आचार्य एवं लेखक, आगरा।
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