# वास्तु शास्त्र के अनुसार घर के अंदर पूर्व या उत्तर दिशा में बाथरूम (केवल नहाने के लिए), लैट्रीन (शौचालय) पश्चिम या वायव्य कोण से हटकर उत्तर में या दक्षिण दिशा में बनवा सकते हैं। बाथरूम व लैट्रीन, दोनों एक साथ पश्चिमी वायव्य कोण व पूर्वी आग्नेय कोण में बनाए जा सकते हैं।
# वास्तु शास्त्र के अनुसार पृथ्वी, जल, वायु, अग्नि और आकाश को पंचतत्व माना गया है। इनमें से जल जीवन का अमृत है। जल का दान करना शुभ होता है। इसलिए जितना संभव हो, जल का दान करते रहें।
# घर की उत्तर-पूर्व दिशा में बने फर्श का दक्षिण-पश्चिम में बने फर्श से कुछ ऊंचा होना वास्तु दोष है। इस दोष से बचने के लिए दक्षिण-पश्चिम के फर्श को ऊंचा कराएं अथवा पश्चिम दिशा के कोने में एक चबूतरा बनवाएं।-- प्रमोद कुमार अग्रवाल, ज्योतिष-वास्तु लेखक एवं सलाहकार, आगरा।
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