किसी भवन के उत्तर-पूर्व कोने (ईशान कोण) में जाने-अनजाने बना हुआ टॉयलेट वास्तु की दृष्टि से दोषपूर्ण माना गया है। जिस भवन के पूर्व या उत्तर दिशा में आम रास्ता हो तो, वहां ईशान कोण में टॉयलेट का होना अधिक दुखदायी होता है। जिससे परिवार में अशांति, जटिल रोग और अनैतिक कार्यों से धन व सम्मान की हानि होने की संभावना रहती है।
अगर भवन के ईशान कोण में टॉयलेट है तो उसे स्थायी रूप से बंद करना या फिर केवल बाथरूम के रूप मे उपयोग करना ही बेहतर है। लेकिन जगह की कमी के कारण ये संभव नहीं है तो टॉयलेट के दरवाजे के बाहरी भाग में एक बड़ा दर्पण इस तरह लगा दें कि वह दक्षिण-पश्चिम कोण से आसानी से नज़र आए।
यदि किसी वजह से दर्पण लगाना भी संभव न हो तो टॉयलेट के अंदर कांच के एक बाउल में साबुत या पिसा नमक या फिटकरी के टुकड़े रखें, साथ ही टॉयलेट के दरवाजे के बाहरी भाग में शिकार करते हुए या मुंह फाड़ते हुए शेर का एक बड़ा चित्र लगा दें। रखे गए नमक या फिटकरी को हर महीने पानी में बहाकर नया रख दें। -- प्रमोद कुमार अग्रवाल, ज्योतिष-वास्तु लेखक एवं सलाहकार, आगरा।
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