@ किसी भी भवन में जल यानि पानी का कोई भी स्रोत जैसे बोरिगं, ट्यूबवैल, कुआं, हैंडपंप, भूमिगत जल टैंक आदि सदैव उत्तर-पूर्व दिशा (ईशान कोण) में ही होना चाहिए. वास्तु की दृष्टि से यह शुभ माना गया है.
@ उत्तर-पूर्व के अलावा किसी दूसरी दिशा में जल स्रोत के होने से निम्न समस्याएं हो सकती हैं :-
* दक्षिण में - महिलाओं को कष्ट;
* पश्चिम में - पेट एवं इन्द्रिय रोग;
* उत्तर-पश्चिम में - शत्रुओं से परेशानी;
* दक्षिण-पूर्व में - पुत्र संतान से कष्ट;
* दक्षिण-पश्चिम में - मृत्यु के समान कष्ट;
* ब्रह्मस्थान (मध्य) में - धन की हानि.
-- प्रमोद कुमार अग्रवाल, सलाहकार एवं वास्तु लेखक, आगरा
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