सोमवार, 9 सितंबर 2024

वास्तु और स्वास्थ्य

शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य की दृष्टि से भी वास्तु के नियम अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। जिस वास्तु में किचन, टॉयलेट, मास्टर बेडरूम और सीढ़ियों की स्थिति वास्तु नियमों के विपरीत होती है, ईशान कोण दोषपूर्ण होता है एवं उत्तर व पूर्व दिशा की तुलना में दक्षिण दिशा अधिक नीची होती है, वहां रहने वाले लोगों का स्वास्थ्य किसी न किसी रूप में प्रभावित होता है। 

   शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ रहने के लिए यह आवश्यक है कि वास्तु दोषमुक्त हो। अगर जगह की कमी के कारण या किसी अन्य कारण से वास्तु दोष बना हुआ है तो किसी योग्य एवं अनुभवी वास्तु विशेषज्ञ से संपर्क करके वास्तु दोषों का निवारण करा लेना चाहिए। क्योंकि लंबे समय तक दोषपूर्ण वास्तु में रहने से आर्थिक और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के बढ़ने की संभावना बनी रहती है। -- प्रमोद कुमार अग्रवाल, वास्तु आचार्य, आगरा।

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