जन्म कुंडली में बैठे ग्रहों के शुभ-अशुभ फल के अनुसार उपाय किए जाते हैं। वो भी इस उद्देश्य से कि ग्रहों के शुभ फल मिलने से जीवन सुखी व संपन्न बन जाएगा। लेकिन हम अपने ही घर में उन सगे-संबंधियों की उपेक्षा व अपमान करते हैं जो किसी न किसी ग्रह से जुड़े होते हैं।
ऐसी दशा में जब मनोनुकूल परिणाम नहीं मिलते तो लोग ज्योतिष शास्त्र एवं उससे जुड़े विद्वानों की योग्यता और ज्ञान पर अंगुली उठाने लगते हैं। वे यह भूल जाते हैं कि ग्रहों की शुभता के लिए पहले घर से ही प्रयास करने की जरूरत होती है, बाद में दूसरे उपाय कारगर होते हैं।
ज्योतिष के अनुसार सूर्य ग्रह की शुभता के लिए पिता, चन्द्र ग्रह के लिए माता, मंगल ग्रह के लिए भाई, बुध ग्रह के लिए मित्र, बहन व बंधु, गुरु ग्रह के लिए संतान, शुक्र ग्रह के लिए पति-पत्नी, शनि ग्रह के लिए नौकर व कर्मचारी, राहु ग्रह के लिए शत्रु और केतु ग्रह की शुभता के लिए अन्य सगे-संबंधियों के साथ सम्मान और प्रेम का व्यवहार किया जाना आवश्यक है।
यदि हम अपने घर-परिवार के सदस्यों के साथ-साथ सभी नाते-रिश्तेदारों, मित्रों और परिचितों के साथ सदव्यवहार करें, उनके साथ किसी भी प्रकार का छल, उत्पीड़न, अन्याय न करें एवं उनको यथोचित आदर व सम्मान देते रहें तो ग्रहों के अशुभ प्रभाव से हमारा स्वत: ही बचाव होता रहेगा और तब हम सुखी, संपन्न एवं शांतिपूर्ण ढंग से जीवन जीने का आनंद लेते रहेंगे।--प्रमोद कुमार अग्रवाल, ज्योतिष-वास्तु लेखक एवं सलाहकार, आगरा।
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