@ भवन के प्रवेश द्वार पर हल्दी और चावल के आटे की पीठी से हाथ को मांगलिक चिंह के रूप में छापा जाता है। हाथ कर्म का प्रतीक है जबकि हाथ की चारों अंगुलियां व अंगूठा पंच तत्वों (जल, वायु, अग्नि, पृथ्वी व आकाश) का द्योतक है। माना जाता है कि इससे घर में सुख, शांति, आरोग्य और आपसी सद्भाव बना रहता है।
@ किसी भी जमीन में पूर्व और उत्तर दिशाओं में ढलान का होना उत्तम माना जाता है। दक्षिण व पश्चिम दिशा की तरफ जमीन में ढलान होने से रोग, धन का अपव्यय, अशांति व कलह होने की संभावना बनी रहती है।
@ प्राचीन काल से ही स्वास्तिक का प्रयोग मांगलिक चिह्न के रूप में किया जाता रहा है। यह गणेश जी के लिप्यात्मक स्वरूप के अलावा चारों दिशाओं का प्रतीक भी है। मकान के मुख्य द्वार के दोनों ओर शुद्ध घी व सिंदूर मिलाकर स्वास्तिक चिह्न बनाने से वहां नकारात्मक ऊर्जा से बचाव होता है और परिवार में सुख-समृद्धि व शांति बनी रहती है।-वास्तु आचार्य एवं लेखक प्रमोद कुमार अग्रवाल, आगरा।
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