मंगलवार, 10 सितंबर 2024

अनबूझ मुहूर्त

 पूनम की पड़वा भली अर अमावस की बीज। 

अणु बूझ्या मुहरत भला कै तैरस के तीज।।

    राजस्थान के एक कवि द्वारा रचित इस दोहे में किसी भी कार्य को करने के लिए अनबूझ मुहूर्त के बारे में बताया गया है। जिसके अनुसार पूर्णमासी के बाद आने वाली प्रतिपदा तिथि (पड़वा), त्रयोदशी तिथि (तेरस) एवं तृतीया तिथि (तीज) और अमावस्या के बाद शुक्ल पक्ष की द्वितिया तिथि (दौज) अनबूझ मुहूर्त होती हैं। इन तिथियों में किसी काम को करने के लिए मुहूर्त नहीं देखा जाता है और काम में भी सफलता मिलती है। -- प्रमोद कुमार अग्रवाल, ज्योतिष-वास्तु लेखक एवं सलाहकार, आगरा। 

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

नो पार्किंग में में बस रोकने पर होगी कार्रवाई

आगरा (प्रमोद कुमार अग्रवाल। शहर के चार प्रमुख स्थानों पर रोडवेज बसों के रुकने पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। भगवान टॉकीज, अबूउलाह दरगाह, वाटर ...