@ गणेश जी की आराधना भवन के वास्तु दोषों को कम करने में सहायक होती है. अगर भवन के मुख्य द्वार पर बाहर की ओर एकदंत गणेश जी की मूर्ति या चित्र लगाएं तो उसके दूसरी तरफ ठीक उसी जगह पर अंदर की ओर वैसे ही गणेश जी की दूसरी प्रतिमा या चित्र इस तरह लगाएं कि गणेश जी की पीठ मिली रहें.
@ भवन के जिस भाग में वास्तु दोष हो उस स्थान पर शुद्ध घी मिश्रित सिन्दूर से दीवार पर स्वास्तिक बना दें.
@ घर, दुकान या व्यापार स्थल के किसी भी भाग में गणेश जी की प्रतिमा अथवा चित्र लगा सकते हैं, किन्तु इतना ध्यान रखें कि इनका मुख दक्षिण दिशा या नैऋत्य कोण में न रहे.
@ सर्व मंगल के लिए सिन्दूरी रंग के तथा सुख, समृद्धि व शांति के लिए सफेद रंग के गणेश जी की आराधना उत्तम मानी गई है. गणेश जी की मूर्ति अथवा चित्र में सूंड उनके बाएं हाथ की ओर घूमी हुई हो, दाएं हाथ की ओर घूमी हुई सूंड वाले गणेश जी की आराधना कठिन होती है।-- प्रमोद कुमार अग्रवाल, वास्तु लेखक एवं सलाहकार, आगरा।
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें