@ मकान के आसपास चारों ओर बनाई गई दीवार को कंपाउंड वॉल कहा जाता है। वास्तु शास्त्र के अनुसार दक्षिण व पश्चिम दिशा की कंपाउंड वॉल ऊंची एवं मोटी, जबकि पूर्व व उत्तर दिशा की कंपाउंड वॉल पतली एवं नीची होना आवश्यक है।
@ कंपाउंड वॉल बनाते समय इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि उत्तर पूर्व कोना (ईशान कोण) गोलाई में न हो क्योंकि इसके कारण ईशान कोण कट जाने से वास्तु दोष उत्पन्न हो जाता है।
@ अगर मकान में कंपाउंड वॉल की ऊंचाई एक मीटर या इससे अधिक रखी जाए तो दूसरी तरफ निर्मित वास्तु का कोई भी नकारात्मक एवं अशुभ प्रभाव उस मकान पर नहीं पड़ता है। -- प्रमोद कुमार अग्रवाल, वास्तु आचार्य एवं ज्योतिष-वास्तु लेखक, आगरा।
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