मंगलवार, 10 सितंबर 2024

शिक्षण संस्थानों के लिए भी हैं वास्तु नियम

   देखने में आता है कि कुछ स्कूल, कॉलेज या शिक्षण संस्थानों में योग्य विद्यार्थी प्रवेश पाने से वंचित रह जाते हैं, तो कुछ संस्थान ऐसे भी होते हैं जहां शिक्षा का स्तर बेहतर होने के बाद भी कक्षाओं में सीटें खाली नजर आती हैं। इसका कारण उस संस्थान का वास्तु नियमों के अनुसार निर्मित अथवा व्यवस्थित न होना भी हो सकता है। स्कूल, कॉलेज एवं शिक्षण संस्थानों के लिए भी वास्तु शास्त्र में कुछ नियम दिए गए हैं, जिनका अनुपालन करके उस संस्थान को बुलंदियों पर ले जाया जा सकता है। 

   शिक्षण संस्थान कोई भी हो, उसकी दिशा और विदिशा को ध्यान में रखते हुए निम्नलिखित व्यवस्थाएं की जा सकती हैं-

@ उत्तर-पूर्व कोण (ईशान) में क्लास रूम/हॉस्टल/स्पोर्ट्स ग्राउंड। 

@ पूर्व में क्लास रूम/ प्रशासनिक विभाग/लाइब्रेरी। 

@ दक्षिण-पूर्व कोण (आग्नेय) में कैंटीन/ मनोरंजन कक्ष। 

@ दक्षिण में वाइस प्रिंसिपल/वाइस चांसलर कक्ष। 

@ दक्षिण-पश्चिम कोण (नैरुत्य) में प्रिंसिपल/डायरेक्टर/चांसलर कक्ष। 

@ पश्चिम में क्लास रूम/ एक्जामिनेशन डिपार्टमेंट/प्रैक्टिकल लैब। 

@ उत्तर-पश्चिम कोण (वायव्य) में स्टाफ रूम/टॉयलेट। 

@ उत्तर दिशा में क्लास रूम/एकाउंट्स विभाग/हॉस्टल/लाइब्रेरी/स्पोर्ट्स ग्राउंड। 

@ ब्रह्म स्थान (मध्य) में खुली जगह/प्रेयर ग्राउंड। 

   इन सब के अलावा क्लास रूम वर्गाकार या आयताकार हों तथा ब्लैकबोर्ड उत्तर या पूर्व दिशा की दीवार पर बनवाएं जिससे कि पढ़ाई करते समय विद्यार्थियों का चेहरा उत्तर या पूर्व में हो।-- प्रमोद कुमार अग्रवाल, ज्योतिष-वास्तु लेखक एवं सलाहकार, आगरा। 

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

सुप्रीम कोर्ट और इलाहाबाद हाईकोर्ट के महत्वपूर्ण आदेश

 Please Subscribe, Share & Like Our YouTube Channel 'Newsline Nation'::Pramod Kumar Agrawal