@ वास्तु शास्त्र के अनुसार किराएदार को हमेशा घर के वायव्य कोण (उत्तर-पश्चिम दिशा) में बना कमरा या पोर्शन ही किराए पर देना चाहिए। वहीं नैऋत्य कोण (दक्षिण-पश्चिम दिशा) में बने कमरे या पोर्शन में भवन स्वामी को स्वयं ही रहना चाहिए।
@ वायव्य कोण के अलावा किसी अन्य दिशा या विदिशा में किराएदार को बसाना उचित नहीं माना गया है, क्योंकि ऐसे किराएदारों के मकान मालिक के साथ संबंध खराब होने एवं उनके बीच कलह होने की संभावना बनी रहती है तथा वे आगे चलकर मकान खाली करने में भी मकान मालिक के लिए सरदर्दी पैदा कर सकते हैं।-- प्रमोद कुमार अग्रवाल, वास्तु आचार्य एवं लेखक, आगरा।
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