सोमवार, 23 सितंबर 2024

कर्म,भाग्य और वास्तु

@ मनुष्य के जीवन में कर्म की प्रधानता को महत्व दिया गया है, परंतु परम सत्य यह भी है कि प्रत्येक मनुष्य का अपना भाग्य भी जीवन को सर्वाधिक प्रभावित करता है.

@  यदि मनुष्य के कर्म अच्छे हों, रहने एवं व्यापार करने वाली जगह वास्तु के अनुरूप बनी हुई हो तथा अपने इष्ट देव पर अटूट विश्वास हो तो कुंडली में बैठे ग्रह और भाग्य की प्रतिकूलता का बहुत ज्यादा अशुभ असर मनुष्य पर नहीं पड़ता है और जीवन यात्रा आसानी से चलती रहती है.-- प्रमोद कुमार अग्रवाल, वास्तु आचार्य एवं लेखक, आगरा। 

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