बुधवार, 9 जुलाई 2025

आगरा के एसएन मेडिकल कॉलेज में किडनी और हृदय रोगियों के लिए बढ़ीं सुविधाएं

                 प्रमोद कुमार अग्रवाल

आगरा के एसएन मेडिकल कॉलेज के कैथ लैब में किडनी और हृदय रोगियों के लिए एंजियोग्राफी और बिना स्टेंट के एंजियोप्लास्टी की सुविधाएं भी शुरू हो गई हैं। प्राइवेट हॉस्पिटलों की तुलना में यहां आधे से भी कम खर्चा होगा। वहीं आयुष्मान और असाध्य रोग योजना के लाभार्थियों का इलाज मुफ्त में होगा। 

     कैथ लैब के प्रभारी डॉक्टर बसंत गुप्ता ने बताया कि एसएन मेडिकल कॉलेज के सुपर स्पेशियलिटी सेंटर में कैथ लैब के शुरू होने के बाद पांच से छह हजार रुपये में एंजियोग्राफी और साठ से सत्तर हजार रुपये में एंजियोप्लास्टी की सुविधा मिल रही है। अब यहां किडनी की एंजियोग्राफी और बिना स्टेंट के एंजियोप्लास्टी की सुविधा भी दी जा रही है। 

    कैथ लैब के डॉक्टर सौरभ नागर ने बताया कि कैथ लैब शुरू होने से आगरा के अलावा फिरोजाबाद, मथुरा, मैनपुरी, अलीगढ़, एटा, इटावा, कासगंज और राजस्थान राज्य के धौलपुर समेत कई अन्य जिलों के मरीज इलाज के लिए आ रहे हैं। एंजियोग्राफी, एंजियोप्लास्टी और पेसमेकर के एक सौ से ज्यादा मरीजों द्वारा पंजीकरण कराया गया है। इसमें इमरजेंसी स्थिति वाले मरीजों के इलाज में प्राथमिकता दी जाती है। (न्यूज़लाइन ब्यूरो) 

नवोदय विद्यालय में प्रवेश के लिए 29 जुलाई तक कर सकते हैं आवेदन

               प्रमोद कुमार अग्रवाल 

  नवोदय विद्यालय समिति द्वारा जवाहर नवोदय विद्यालयों में कक्षा 6 में प्रवेश के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए प्रवेश प्रक्रिया को पूर्ण रूप से ऑनलाइन रखा गया है। इच्छुक एवं पात्र अभ्यर्थी आधिकारिक वेबसाइट पर अंतिम तिथि से पहले अपना पंजीकरण करा सकते हैं। 

   जवाहर नवोदय विद्यालय में प्रवेश के लिए पंजीकरण कराने के लिए बच्चे का मूल निवास प्रमाण पत्र उसी जिले का होना आवश्यक है जहां के लिए वह आवेदन कर रहा है। इसके अलावा बच्चे ने कक्षा 3, 4 और 5 की पढ़ाई सरकारी, सरकारी सहायता प्राप्त या सरकारी मान्यता प्राप्त विद्यालय से की हो। एक विद्यार्थी को केवल एक ही बार जवाहर नवोदय विद्यालय चयन परीक्षा में शामिल होने की अनुमति होगी। कुल सीटों की 75 प्रतिशत सीटें ग्रामीण क्षेत्र के छात्रों के लिए आरक्षित हैं। 
   जवाहर नवोदय विद्यालय में पात्र छात्रों का चयन प्रवेश परीक्षा के आधार पर होगा। परीक्षा का आयोजन 13 दिसंबर 2025 को सुबह 11:30 बजे से किया जाएगा। प्रवेश हेतु बच्चे का पंजीकरण कराने के लिए आधिकारिक वेबसाइट navoday.gov.in या cbseitms.rcil.gov.in पर जाकर मांगी गई जानकारी, फोटो, हस्ताक्षर, आवास प्रमाण पत्र और अपनी व्यक्तिगत जानकारी आदि सबमिट करनी होगी। सबमिट करने के बाद पेज का प्रिंट लेना आवश्यक है। (न्यूज़लाइन ब्यूरो) 

मॉडल बनेगा एसएन मेडिकल कॉलेज का बाल रोग विभाग

 

                 प्रमोद कुमार अग्रवाल

आगरा के एसएन मेडिकल कॉलेज के बाल रोग विभाग को उत्तर प्रदेश में मॉडल बनाने के लिए प्रस्ताव बना कर शासन को भेजा गया है। इसके तहत नया बहुमंजिला भवन बनाने, बच्चों से जुड़ी सभी तरह की बीमारियों का इलाज व सर्जरी की सुविधा देने, दो सौ बेड और जीवनरक्षक उपकरण लगाने, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित लैब और ऑपरेशन थियेटर होने जैसी सुविधाओं के लिए प्रस्ताव तैयार किया गया था। 

    प्राचार्य डॉक्टर प्रशांत गुप्ता ने बताया कि एसएन मेडिकल कॉलेज के बाल रोग विभाग को मॉडल बनाने के लिए योजना तैयार की गई है। इसमें बच्चों से जुड़ी किसी तरह की बीमारी की जांच, इलाज और सर्जरी की सुविधा एक ही बिल्डिंग में मिलेगी। बाल रोग विभाग के नए भवन में न्यूरो, गेस्ट्रो, कार्डियो और रेस्पिरेटरी मेडिसिन विभाग भी बनाया जाएगा। ओपीडी की सुविधा के साथ ही मस्तिष्क, हृदय, पेट और वक्ष रोग के विशेषज्ञ भी नियुक्त होंगे। 

    कॉलेज के बाल रोग विभाग के अध्यक्ष डॉक्टर नीरज यादव ने बताया कि सरकार से प्रस्ताव की मंजूरी मिलने के बाद मॉडल बाल रोग विभाग में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित लैब और ऑपरेशन थियेटर से बच्चों की सभी बीमारियों का इलाज और सर्जरी वैज्ञानिक ढंग से हो सकेगी। इससे बच्चों के इलाज के लिए लोगों को दूसरे शहरों में नहीं जाना पड़ेगा। (न्यूज़लाइन ब्यूरो) 

शुक्रवार, 4 जुलाई 2025

सांस के मरीजों को भर्ती करने पर होगी कोरोना की जांच

                प्रमोद कुमार अग्रवाल

आगरा। सांस के मरीजों को अस्पताल में भर्ती करने की स्थिति में उनकी कोरोना की जांच आवश्यक रूप से करनी होगी, क्योंकि सांस के मरीजों में कोरोना का खतरा हो सकता है। इस संबंध में उत्तर प्रदेश शासन द्वारा गाइड लाइन जारी कर दी गई है। 

    आगरा के मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉक्टर अरुण श्रीवास्तव ने बताया कि सांस के मरीजों में कोरोना का अधिक खतरा है। ऐसे में सांस के मरीजों को अस्पताल में भर्ती करने के बाद उनकी कोरोना वायरस की जांच करनी होगी। इसके लिए एंटीजन किट का इस्तेमाल किया जा सकता है। रिपोर्ट के पॉजिटिव आने पर अस्पतालों को मुख्य चिकित्सा अधिकारी के कार्यालय में इसकी जानकारी देनी होगी। 

   मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने बताया कि एसएन मेडिकल कॉलेज आगरा की वायरोलॉजी लैब में भी आरटीसीपीआर जांच की सुविधा उपलब्ध है। एसएन एसएन मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी में भी आइसोलेशन वार्ड बना हुआ है। कोरोना वायरस से किसी को भी घबराने की जरूरत नहीं है। सभी डॉक्टरों द्वारा कोरोना से संबंधित गाइड लाइन का पालन करने के लिए कहा गया है। (न्यूज़लाइन ब्यूरो) 

मोबाइल फोन पर लंबी बातचीत से हो सकता है ब्रेन ट्यूमर

                  प्रमोद कुमार अग्रवाल

आगरा। मोबाइल फोन पर लंबी और देर तक लगातार बातचीत से ब्रेन ट्यूमर का खतरा हो सकता है। सिर में तेज दर्द, कमजोर नजर और शरीर का संतुलन बनाने में परेशानी हो तो यह जानलेवा ब्रेन ट्यूमर यानि मस्तिष्क के कैंसर के लक्षण हो सकते हैं। ऐसी स्थिति में देरी किए बगैर डॉक्टर से संपर्क कर जांच और इलाज कराकर जान बचाई जा सकती है। 

     यह कहना है आगरा के एसएन मेडिकल कॉलेज के न्यूरो सर्जरी विभाग के अध्यक्ष डॉक्टर गौरव धाकरे का। श्री धाकरे ने बताया कि मस्तिष्क में असामान्य रूप से कोशिकाओं में वृद्धि होने से गांठ बन जाती है, जिसे ट्यूमर कहा जाता है। ब्रेन ट्यूमर की वजह जन्मजात या रेडियो फ्रीक्वेंसी हो सकती है। मोबाइल फोन से निकलने वाली रेडियो फ्रीक्वेंसी मस्तिष्क की नसों पर दबाव डालती है जिससे कोशिकाओं में वृद्धि होने लगती है। 

     एसएन मेडिकल कॉलेज के न्यूरो सर्जन डॉक्टर मयंक अग्रवाल ने बताया कि शुरुआती चरण में ब्रेन ट्यूमर का पता चल जाए तो समुचित इलाज से यह पूरी तरह ठीक हो जाता है। ऐसे युवा जो मोबाइल फोन पर घंटों बातें करते हैं, उनमें सिर दर्द बढ़ने के साथ दिमाग की नसें भी प्रभावित होने लगती हैं। 

  डॉक्टर मयंक अग्रवाल ने बताया कि सिर में तेज व लगातार दर्द, चलने में परेशानी, बोलने में जीभ का लड़खड़ाना व चक्कर खाकर गिरना, मांसपेशियों व हाथ-पैरों में कमजोरी, दौरे पड़ना,नींद कम आना और नजर कमजोर होना जैसे लक्षण ब्रेन ट्यूमर के हो सकते हैं। बचाव के लिए मोबाइल फोन का कम इस्तेमाल करना चाहिए। ज्यादा लंबी बात करने के लिए स्पीकर ऑन किया जाना चाहिए। अगर परिवार में पहले किसी को ब्रेन ट्यूमर रहा है तो स्क्रीनिंग कराना चाहिए। (न्यूज़लाइन ब्यूरो) 

नगर निगम आगरा की खाली जमीन पर बनेंगे हॉस्पिटल और पार्किंग

                प्रमोद कुमार अग्रवाल

आगरा। नगर निगम द्वारा अपनी खाली जमीनों पर हॉस्पिटल, वेस्ट प्लांट, हेल्थ क्लीनिक, पार्किंग और स्टोर जैसे अन्य प्रोजेक्ट शुरू किए जाएंगे। इसके लिए निगम ने शहर के 10 से अधिक क्षेत्रों में 1.01 लाख वर्ग मीटर जमीन को चिह्नित किया है। 

    सहायक नगर आयुक्त अशोक प्रिय गौतम ने बताया कि नगर निगम की जानकारी में आया है कि निगम की खाली पड़ी जमीनों पर अतिक्रमण और अवैध कब्जे हो रहे हैं। ऐसे में अब निगम ने खाली जमीनों को अतिक्रमण से मुक्त कराने के लिए अभियान चलाया है। इसके बाद इन जमीनों पर हरित उद्यान से लेकर भंडारण स्टोर व अन्य कार्य किए जाएंगे। 

    सहायक नगर आयुक्त ने बताया कि निगम द्वारा इसके लिए सिकंदरा, ककरेठा, कलाल खेरिया, बाबरपुर, बसई, जगनपुर और आवास विकास क्षेत्र में खाली पड़ी जमीनों को चिह्नित किया गया है। चिह्नित जमीनों की हदबंदी कराई जा रही है। भविष्य में सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देने के लिए इन जमीनों का उपयोग चार्जिंग स्टेशन, मल्टी लेवल पार्किंग और अन्य जनोपयोगी योजनाओं के क्रियान्वयन में काम में लाया जाएगा। (न्यूज़लाइन ब्यूरो) 

सभी सीएचसी पर जन औषधि केंद्रों पर मिलेंगी सस्ती दवाएं

               प्रमोद कुमार अग्रवाल

आगरा जिले के सभी अठारह सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (सीएचसी) पर अब मरीजों को 60 से 70 फीसदी तक सस्ती दवाएं मिलेंगी। इसके लिए सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर जन औषधि केंद्र खोल दिए गए हैं। 
   मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉक्टर अरुण श्रीवास्तव ने बताया कि सरकारी अस्पतालों में सरकारी दवाओं की कमी होने से लोगों को बाजार से मंहगी दवाएं निजी मेडिकल स्टोर से खरीदनी पड़ जाती हैं।इसलिए उत्तर प्रदेश शासन द्वारा सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर जन औषधि केंद्र खुलवा दिए गए हैं। जहां 450 से अधिक तरह की सस्ती दवाएं बिक्री के लिए उपलब्ध रहेंगी।

   मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने बताया कि जन औषधि केंद्रों पर सस्ती दवाओं के अलावा सस्ती दर पर सर्जिकल सामान भी मिलेगा। इनकी कीमत बाजार से करीब सत्तर फीसदी तक कम है। वर्तमान में एसएन मेडिकल कॉलेज, जिला अस्पताल, लेडी लायल, और मानसिक स्वास्थ्य संस्थान में पहले से ही जन औषधि केंद्र संचालित हो रहे हैं। (न्यूज़लाइन ब्यूरो) 

बच्चों को कई दिन से खांसी और बुखार होने पर कराएं टीबी की जांच

                 प्रमोद कुमार अग्रवाल

आगरा। बच्चों में कई दिन तक खांसी और बुखार बने रहने पर लापरवाही नहीं बरतें बल्कि जल्द से जल्द डॉक्टर से सलाह लेकर टीबी की जांच कराएं और पूरा इलाज कराएं। टीबी के बिगड़ जाने से बच्चों को गंभीर समस्या का सामना करना पड़ सकता है। 

    मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉक्टर अरुण श्रीवास्तव ने बताया कि बच्चों में टीबी रोग एक गंभीर समस्या है। अगर किसी बच्चे को कई दिनों तक खांसी हो, हफ्ते भर बुखार हो, वजन कम हो, भूख कम लगे, खांसी के साथ खून आए और शरीर में गांठे हों तो तुरंत टीबी की जांच कराएं। बच्चों में टीबी के इलाज में एंटी ट्यूबरकुलर ड्रग्स का उपयोग किया जाता है। वैसे तो टीबी का इलाज छह महीने तक चलता है, फिर भी बच्चे की उम्र और बीमारी की गंभीरता के आधार पर इलाज किया जाता है। टीबी से बचने के बाद स्वच्छता रखना जरूरी है। खांसी व जुकाम से पीड़ित लोगों से दूर रहने, पौष्टिक आहार लेने और नियमित रूप से व्यायाम करने से भी टीबी रोग से बचा जा सकता है। 

   मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने बताया कि टीबी रोग के बचाव और जागरूकता के लिए स्वास्थ्य विभाग की ओर से राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम चलाया जा रहा है। बच्चों को टीबी से बचाने के लिए समय पर बीसीजी का टीका अवश्य लगवाना चाहिए। टीबी रोग के उन्मूलन के लिए समुदाय स्तर पर लोगों का जागरूक होना बहुत जरूरी है। 

    जिला क्षय रोग अधिकारी डॉक्टर सुखेश गुप्ता ने बताया कि बच्चों में टीबी का शीघ्र उपचार कराने की आवश्यकता है, क्योंकि इनके लक्षण बड़ों की अपेक्षा अलग और कम स्पष्ट होते हैं। समय निकलने के बाद बच्चों में टीबी का निदान करना मुश्किल हो सकता है। इसलिए टीबी के शुरुआत लक्षण नजर आने के बाद शीघ्र निदान और प्रभावी इलाज से बच्चों का जीवन बचाया जा सकता है। (न्यूज़लाइन ब्यूरो) 

शुक्रवार, 27 जून 2025

आगरा जोन में पुलिस विभाग की जमीन का हो रहा है डिजिटलाइजेशन

                      प्रमोद कुमार अग्रवाल

 आगरा जोन में पुलिस विभाग की जमीन को चिह्नांकन करने के साथ ही डिजिटलाइजेशन का कार्य भी किया जा रहा है। इसका उद्देश्य जोन में पुलिस विभाग की जमीन की जानकारी करना और जमीन को विभागीय कार्यों के लिए इस्तेमाल में लाने के लिए कार्य योजना तैयार करना है। इससे पुलिस विभाग की जमीनों से संबंधित पूरी जानकारी आसानी से उपलब्ध हो सकेगी और पुलिस विभाग की आवासीय एवं अन्य समस्याओं को दूर किया जा सकेगा। 

    एडीजी जोन अनुपम कुलश्रेष्ठ ने बताया कि आगरा, मथुरा, फिरोजाबाद, मैनपुरी, अलीगढ़ और हाथरस जनपदों में पुलिस विभाग की जमीनों का चिह्नांकन किया जा रहा है। इसके बाद राजस्व विभाग में जमीन के रिकॉर्ड की जांच कराई जाएगी। इसके लिए जमीन से संबंधित खसरा और खतौनी सहित पूरा विवरण मांगा गया है। इन जमीनों के चिह्नांकन के बाद एप के माध्यम से डिजिटलाइजेशन कराया जाएगा, जिससे कि पुलिस विभाग की जमीन के संबंध में पूरी जानकारी एक क्लिक पर उपलब्ध हो सके। (न्यूज़लाइन ब्यूरो) 

टीथर्ड ड्रोन कैमरों से होगी ताजमहल की निगरानी

                    प्रमोद कुमार अग्रवाल

 विश्वप्रसिद्ध ताजमहल की सुरक्षा के लिए टीथर्ड ड्रोन और एक सौ और कैमरों के माध्यम से निगरानी करने के लिए योजना तैयार की गई है। टीथर्ड ड्रोन की मदद से रेड जोन के साथ ही यलो और ग्रीन जोन में होने वाली सभी गतिविधियों पर नजर रखी जा सकेगी। 

    डीसीपी सिटी सोनम कुमार ने बताया कि एएसआई और सीआईएसएफ के अधिकारियों के साथ संपन्न हुई बैठक में ताजमहल की सुरक्षा व्यवस्था को और भी पुख्ता करने के लिए विचार विमर्श किया गया। इसके तहत मिले एंटी ड्रोन सिस्टम की मदद से ताजमहल के पांच सौ मीटर के दायरे में उड़ने वाले ड्रोन को गिरा दिया जाएगा। ड्रोन उड़ाने वाले ऑपरेटर की पहचान भी संभव हो सकेगी। 

    उन्होंने बताया कि टीथर्ड ड्रोन एक ऐसा विशेष ड्रोन है जो एक बार में बारह से चौदह घंटे तक की उड़ान भर सकता है। इसको एक रस्सी से बांध कर निश्चित ऊँचाई तक उड़ाया जा सकता है। इसमें लगे हाई रिज्योल्यूशन कैमरे दिन और रात संदिग्धों पर नजर रखने में सक्षम हैं। इसके वीडियो और सर्विलांस से पुलिस प्रशासन को काफी मदद मिलेगी। 

   डीसीपी सिटी ने बताया कि टीथर्ड ड्रोन के दो बार ट्रायल हो चुके हैं और जल्द ही इसे परिसर में लगा दिया जाएगा। ताजमहल परिसर के रेड और यलो जोन में सीसीटीवी कैमरों की संख्या में भी वृद्धि की जा रही है। वर्तमान में रेड जोन में 55 सीसीटीवी कैमरे लगे हैं। अब इनकी संख्या 150 तक की जा रही है। इन कैमरों की मदद से ताजमहल के चप्पे चप्पे पर नजर रखी जा सकेगी। यलो जोन में पुलिस कर्मियों की संख्या भी बढ़ाई जाएगी। (न्यूज़लाइन ब्यूरो) 

सांस और अस्थमा के मरीजों के लिए फायदेमंद है अनुलोम विलोम प्राणायाम

                     प्रमोद कुमार अग्रवाल

 सांस और अस्थमा जैसी बीमारी के शिकार मरीजों को सामान्य गति वाले प्राणायाम ही करने चाहिए। तेज गति वाले प्राणायाम ऐसे मरीजों को नुकसान भी पहुंचा सकते हैं। कोई भी प्राणायाम करने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह अवश्य लेनी चाहिए। 

    एसएन मेडिकल कॉलेज के वक्ष एवं क्षय रोग विभाग के अध्यक्ष डॉक्टर गजेंद्र सिंह ने बताया कि सांस और अस्थमा के मरीजों के लिए अनुलोम विलोम प्राणायाम फायदेमंद है। इस प्राणायाम में एक मध्यम गति से सांस लेने और छोड़ने की प्रक्रिया की जाती है। इससे श्वसन नलिकाओं के सिकुड़ने की संभावना नहीं होती है और फेंफड़ों में हवा की कुछ मात्रा भी बनी रहती है। 

   डॉक्टर सिंह ने बताया कि सांस और अस्थमा के मरीजों को कपालभाति प्राणायाम करने से बचना चाहिए क्योंकि इस प्राणायाम में सांस लेने और छोड़ने की गति अपेक्षाकृत अधिक होती है। इससे सांस छोड़ने के दौरान दबाव के कारण श्वसन नलिकाओं के सिकुड़ने की संभावना हो सकती है।

 डॉक्टर सिंह ने बताया कि सांस और अस्थमा के मरीजों को कोई भी व्यायाम या प्राणायाम करने से पहले अपने डॉक्टर या विशेषज्ञ डॉक्टर से परामर्श कर लेना चाहिए। इसके साथ ही अपनी मर्जी से दवाएं और इनहेलर का प्रयोग बंद नहीं कर देना चाहिए। (न्यूज़लाइन ब्यूरो) 

बरसात में भीगने से हो सकते हैं फंगल इंफेक्शन व पेट के रोग

                  प्रमोद कुमार अग्रवाल

बरसात के मौसम में वर्षा के पानी में भीगने और उमस से टायफाइड, त्वचा, कान और पेट के रोग होने की परेशानी बढ़ रही हैं। इसके अलावा इस मौसम में फंगल इंफेक्शन, एलर्जी, बाल टूटने और खुजली के कारण जख्म बनने की शिकायत भी आ रही हैं। 

   एसएन मेडिकल कॉलेज के त्वचा रोग के विभाग अध्यक्ष डॉक्टर यतेंद्र चाहर ने बताया कि त्वचा रोग विभाग की ओपीडी में इन दिनों जो मरीज आ रहे हैं उनमें बगल, जांघ, गर्दन पर फंगल इंफेक्शन, लाल दाने और एलर्जी की परेशानी मिली है। बरसात के मौसम में संक्रमण के कारण खुजली बढ़ रही है, जिससे जख्म भी बन रहे हैं। 

   डॉक्टर चाहर ने बताया कि मरीजों में बाल टूटने, सिर की एलर्जी, कान में पानी चले जाने से कान में दर्द, सूजन व खुजली, अपदूषित खान-पान की वजह से पेट में दर्द, उल्टी, दस्त, टायफाइड की परेशानी हो रही है। इन समस्याओं से बचने के लिए लोगों को बरसात के मौसम में कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए। 

   त्वचा रोग के विभाग अध्यक्ष ने बताया कि बरसात में भीगने पर गीले कपड़े देर तक पहनने से बचना और शरीर व बालों को सूखा रखना जरूरी है। बालों को सुखाने के लिए देर तक बालों को बांधकर न रखें। बाजार में बिकने वाले गले व पहले से काट कर रखे हुए फल, अपदूषित खाद्य सामग्री आदि न खाएं। पानी उबाल कर ठंडा करके पीएं। कान में पानी चले जाने की वजह से संक्रमण होने पर विशेषज्ञ डॉक्टर को दिखाएं। (न्यूज़लाइन ब्यूरो) 

सोमवार, 16 जून 2025

भारतीय न्याय संहिता, 2023 की महत्वपूर्ण धाराएं

* धारा-64: बलात्कार के लिए सजा (भारतीय दंड संहिता की धारा-376 ) 

* धारा-74: महिला की लज्जा भंग करने के आशय से हमला (भादंसं की धारा-354) 
* धारा-80: दहेज मृत्यु (भादंसं की धारा-304-B) 
* धारा-85: महिला के पति या नातेदार द्वारा क्रूरता (भादंसं की धारा-498A) 
* धारा-103: हत्या के लिए सजा (भादंसं की धारा-302)
* धारा-109: हत्या करने की कोशिश (भादंसं की धारा-307) 
* धारा-108: आत्महत्या के लिए दुष्प्रेरण ( भादंसं की धारा-306) 
* धारा-152: भारत की संप्रभुता, एकता और अखंडता को खतरे में डालने वाला कार्य करना 
* धारा-281: सार्वजनिक मार्ग पर लापरवाही से वाहन चलाना (भादंसं की धारा-279) 
* धारा-308: उद्दापन (भादंसं की धारा-385-389) 
* धारा-316: आपराधिक न्यासभंग के लिए सजा (भादंसं की धारा-406) 
* धारा-316: सरकारी सेवक, बैंकर, व्यापारी या एजेंट द्वारा आपराधिक न्यासभंग (भादंसं की धारा-409) 
* धारा-318: छल या धोखाधड़ी (भादंसं की धारा-420) 
* धारा-351(2&3): आपराधिक अभित्रास (भादंसं की धारा-506) 
*धारा-352: लोकशांति भंग करने को प्रकोपित करने के आशय से अपमान करना (भादंसं की धारा-504) 
*धारा-356: मानहानि (भादंसं की धारा-499) 

मंगलवार, 10 जून 2025

तेज धूप और गर्मी से हो रहे हैं डायरिया, पेट दर्द व बुखार, बरतें सावधानी

आगरा (प्रमोद कुमार अग्रवाल)। तेज धूप और गर्मी के चलते इन दिनों डायरिया, पेट दर्द, कमजोरी, घबराहट और बुखार से लोग पीड़ित हो रहे हैं। धूप में काम करने वाले लोगों में ये समस्या ज्यादा देखने को मिल रही है। बचाव के लिए समुचित सावधानी बरतने की जरूरत है। 

   एसएन मेडिकल कॉलेज के मेडिसिन विभाग के डॉक्टर चंद्र प्रकाश गौतम ने बताया कि तेज धूप के कारण मरीजों की संख्या बढ़ रही है। मरीजों में बुखार, पेट दर्द, उल्टी व दस्त और कमजोरी की परेशानी मिल रही है। कमला नगर निवासी बाल रोग विशेषज्ञ डॉक्टर युवराज सिंह ने बताया कि गर्मी के मौसम में बाजार के दूषित भोजन और दूषित पानी से बच्चों में डायरिया और टायफाइड के लक्षण दिखाई दे रहे हैं। समय पर इलाज नहीं कराने से शरीर में पानी की कमी होने पर बच्चों की हालत गंभीर भी हो सकती है। 

    डॉक्टर सिंह ने बताया कि गर्मी और तेज धूप के कारण होने वाली समस्याओं से बचने के लिए बच्चों को बाजार में खुले व गंदगी में बिकने वाली खाने-पीने की सामग्री से बचाना चाहिए। कुछ भी खाने से पहले हाथों को अच्छी तरह से साबुन से साफ करना जरूरी है। किसी फंक्शन में ज्यादा खाने से भी बचना चाहिए। इस मौसम में आने वाले रसदार फल, ककड़ी, खीरा, नारियल पानी, संतरा, तरबूज, खरबूजा आदि का सेवन अवश्य करें। इससे शरीर में पानी की कमी नहीं होगी और शरीर को जरूरी पोषक तत्व भी मिल जाएंगे। (न्यूज़लाइन ब्यूरो) 

लोको पायलट के तनाव को दूर करने के लिए रेलवे की पहल

आगरा (प्रमोद कुमार अग्रवाल)। रेलवे द्वारा लोको पायलटों की थकान दूर करने और उन्हें तनाव मुक्त रखने के लिए अनोखी पहल की गई है। इसके तहत आगरा कैंट रेलवे स्टेशन के पास रनिंग रूम में लोको पायलटों को योग और ध्यान कराया जाएगा। साथ ही उनके ठहरने और आराम के लिए वातानुकूलित कक्ष की व्यवस्था भी की गई है। 

     आगरा रेल मंडल की जन संपर्क अधिकारी प्रशस्ति श्रीवास्तव ने बताया कि उत्तर मध्य रेलवे के प्रयागराज डिवीजन में सबसे पहले इस व्यवस्था की शुरुआत की गई थी। अब आगरा डिवीजन के अंतर्गत आगरा कैंट रेलवे स्टेशन के पास रनिंग रूम में ट्रेन मैनेजर, लोकों पायलट और सहायक लोको पायलट के आराम के लिए विशेष व्यवस्थाओं के साथ रनिंग रूम को बेहतर बनाया गया है। 

    जन संपर्क अधिकारी ने बताया कि रनिंग रूम में एक योग कक्ष बनाया गया है। जहां लोको पायलट ड्यूटी करने के बाद योग कर सकते हैं। उनके लिए आर्ट ऑफ लिविंग के प्रशिक्षु रखे गए हैं। रनिंग रूम में इन रेल कर्मियों के ठहरने के लिए वातानुकूलित कक्ष हैं। जिनमें डबल बेड लगाए गए हैं। वे यहां बारह घंटे आराम कर सकते हैं। (न्यूज़लाइन ब्यूरो) 

बच्चों और किशोरों में बढ़ रही है डायबिटीज़

आगरा (प्रमोद कुमार अग्रवाल)। बच्चों और किशोरों में टाइप-1 डायबिटीज बढ़ रही है। इन्हें इंसुलिन देनी पड़ रही है। बच्चों में बढ़ती इस बीमारी से डॉक्टर चिंतित हैं। बच्चों और किशोरों को इस बीमारी से बचाने के लिए इलाज के साथ ही अन्य सावधानी बरतने की जरूरत है।  

   एसएन मेडिकल कॉलेज के डायबिटीज ओपीडी प्रभारी डॉक्टर प्रभात अग्रवाल ने बताया कि कॉलेज की हर शुक्रवार को ओपीडी कॉम्प्लेक्स-दो में डायबिटीज के मरीजों के लिए ओपीडी चल रही है। इसमें 281 मरीज रजिस्टर्ड हैं, जिनमें 276 बच्चे हैं। इनमें भी 271 बालक और 5 बालिकाएं हैं। इनकी उम्र एक साल से लेकर 16 साल तक है। इन मरीजों में ऑटो इम्युन बीमारी के कारण इंसुलिन नहीं बन रही है। इससे टाइप-1 डायबिटीज हो रही है। 


     डॉक्टर अग्रवाल ने बताया कि ऑटो इम्युन बीमारी में रोग प्रतिरोधक क्षमता विपरीत कार्य करने लगती है। इसमें प्रतिरक्षा प्रणाली स्वस्थ कोशिकाओं को हमला करके नष्ट कर देती है। इस बीमारी में थकान, जोडों में दर्द व सूजन, त्वचा पर चकत्ते पड़ना, बेवजह बुखार और वजन कम होने जैसे लक्षण दिखाई देते हैं।   
 
    एसएन मेडिकल कॉलेज के डॉक्टर आशीष गौतम ने बताया कि टाइप वन डायबिटीज में प्रतिरक्षा प्रणाली अग्नाशय में इंसुलिन बनाने वाली बीटा कोशिकाओं को नष्ट कर देती है। इसके कारण इंसुलिन बनना बंद हो जाता है। ऐसे में मरीजों को इंसुलिन दी जाती है। मुंह का सूखना, बार बार प्यास लगना, बार बार पेशाब आना और भूख ज्यादा लगना भी टाइप वन डायबिटीज के खतरे की संभावना होती है। ऐसे लक्षण होने पर डायबिटीज की जांच अवश्य करा लेनी चाहिए। (न्यूज़लाइन ब्यूरो) 

बार-बार तेल के उपयोग से बढ़ रहे हैं कैंसर और हृदय रोग के मरीज

              (प्रमोद कुमार अग्रवाल)  

   घर, रेस्टोरेंट, होटल, खाने की स्टॉल आदि में तेल को बार-बार गर्म करके उसमें खाद्य सामग्री बनाने और फिर उनका सेवन करने से कैंसर और हृदय रोगियों की संख्या में बढ़ोत्तरी हो रही है। इसके कारण रक्त में कॉलेस्ट्रोल बढ़ने से धमनियां संकुचित होने लगती हैं, जिससे हृदय आघात का खतरा बढ़ जाता है। 

   यह कहना है हृदय रोग विशेषज्ञों का। हृदय रोग और कॉलेस्ट्रोल के बढ़ते मरीजों के मद्देनजर खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन और नेशनल चैंबर की संयुक्त बैठक में वक्ताओं ने व्यापारियों को सलाह दी कि खाद्य तेल को अधिकतर तीन बार ही उपयोग में लाया जाए। 
   हृदय रोग विशेषज्ञ डॉक्टर राज कुमार गुप्ता ने बताया कि तेल को बार-बार गर्म करने से पॉलिसाइक्लिक एरोमैटिक हाइड्रोकार्बन और एल्डीहाइड जैसे कार्सिनोजेनिक तत्व भी बढ़ जाते हैं। इससे शरीर में सूजन और कैंसर का खतरा अधिक हो जाता है। इसलिए एक बार गर्म किए गए तेल को तीन बार से ज्यादा इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। खाद्य सामग्री पकाने के लिए उतना ही तेल लेना चाहिए जितना उस समय के लिए जरूरी हो। 
    सहायक आयुक्त खाद्य द्वितीय शशांक त्रिपाठी ने बताया कि खाद्य सामग्री बनाते समय तेल को अधिकतम तीन बार ही उपयोग में लाना चाहिए। इसके बाद बचे हुए तेल को बायो डीजल बनाने वाली कंपनियों को बेच सकते हैं। अगर कोई खाद्य सामग्री निर्माता ऐसा नहीं करता है तो खाद्य विभाग द्वारा डोम-24 यंत्र के माध्यम से उपयोग में लाए जा रहे तेल की टोटल पोलर कंपाउंड्स (टीपीसी) की जांच की जाएगी। अगर जांच में टीपीसी 25 से अधिक मिला तो मौके पर ही तेल को नष्ट करा दिया जाएगा। 
    मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी राजेश गुप्ता ने बैठक में व्यापारियों के तेरह सूत्री सवालों पर विस्तार से जानकारी दी। बैठक में विवेक जैन, संजय गोयल, संजय अग्रवाल, विकास चतुर्वेदी, राजेश अग्रवाल, सीताराम अग्रवाल, प्रवीन गोयल आदि मौजूद रहे। (न्यूज़लाइन ब्यूरो) 

मंगलवार, 13 मई 2025

आंखों की सेहत बिगाड़ रही है तेज धूप और गर्मी

             (प्रमोद कुमार अग्रवाल) 

 तेज धूप और गर्मी अब आंखों को भी बीमार बना रही है। आंखों में जलन, सूखापन, किरकिराहट और लालपन जैसे लक्षण नजर आएंगे तो तुरंत नेत्र रोग विशेषज्ञ से इलाज कराना चाहिए। 

    एसएन मेडिकल कॉलेज के नेत्र रोग विभाग की अध्यक्ष डॉक्टर स्निग्धा जैन ने बताया कि तेज धूप और गर्मी में लगातार काम करने या फिर घूमने के कारण आंखों की बीमारियों में वृद्धि हो रही है। ऐसे में अपनी मर्जी से घरेलू उपचार का सहारा लेना अथवा किसी मेडिकल स्टोर से डॉक्टर के परामर्श के बगैर आई ड्रॉप आंखों में डालना नुकसान पहुंचा सकता है।   

     डॉक्टर जैन ने बताया कि गर्मी के मौसम में आंखों को बीमार होने से बचाने के लिए तेज धूप में सीधे बाहर निकलने के बजाय आंखों पर रंगीन चश्मा लगा कर ही निकलना चाहिए। मोटर साइकिल और स्कूटी चलाते समय हेलमेट पहनने से आंखों को गर्मी से बचाया जा सकता है। 

    नेत्र रोग विभागाध्यक्ष ने बताया कि आंखों में किसी तरह का कोई इन्फेक्शन होने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करके उनकी सलाह के अनुसार ही दवाओं का उपयोग करना चाहिए। आंखों में किरकिराहट और खुजली होने पर आंखों को रगड़ना नहीं चाहिए बल्कि साफ पानी के छींटे हल्के हाथ से मारने चाहिए। (न्यूज़लाइन ब्यूरो) 

गर्मी के मौसम में रखें सेहत का ध्यान

                (प्रमोद कुमार अग्रवाल) 

 सूरज की तपिश और गर्म हवाओं के चलते लोगों को पेट में दर्द, उल्टी, दस्त, चक्कर आना जैसी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। सरकारी अस्पतालों में मरीजों की संख्या में तेजी से वृद्धि हो रही है। ऐसे मौसम में सेहत का ध्यान रखना बहुत जरूरी है। 

    एसएन मेडिकल कॉलेज के इमरजेंसी प्रभारी डॉक्टर मनीष बंसल ने बताया कि गर्मी के इस मौसम में खानपान के मामले में लापरवाही बरतने पर डायरिया और फूड पॉयजनिंग के मरीजों की संख्या बढ़ी है। गर्मी के चलते ब्लडप्रेशर में उतार चढ़ाव होने से घबराहट और चक्कर आने की परेशानी मिल रही है। दस्त होने से शरीर में पानी की कमी के मरीज भी आ रहे हैं। 

   इमरजेंसी प्रभारी ने बताया कि जो लोग बाहर का दूषित खाना खा रहे हैं, उनमें उल्टी, दस्त और बुखार के लक्षण नजर आ रहे हैं। खासकर बच्चों में इसका ज्यादा असर मिल रहा है। ऐसे में लोगों को सेहत के प्रति सचेत रहने की आवश्यकता है। गर्मी के असर से बचने के लिए धूप में निकलते समय सिर को सूती कपड़े से ढककर निकलें। टाइट कपड़े पहनने के बजाय ढीले कपड़े पहनें। 
   डॉक्टर बंसल ने बताया कि गर्मी के मौसम में चाय, कॉफी, एल्कोहल, कोल्ड ड्रिंक, तंबाकू के सेवन से परहेज करें। तला हुआ और बाजार का अपदूषित भोजन न करें। तरबूज, खरबूज, ककड़ी, खीरा, प्याज, टमाटर, सलाद, संतरा, नारियल पानी, अंगूर, पपीता, रसबरी आदि का भरपूर सेवन करें। दोपहर के समय घर से बाहर जाने से बचें। दिन भर में चार से पांच लीटर पानी पिएं। (न्यूज़लाइन ब्यूरो) 

हॉस्पिटल जा रहे हैं तो रखें सावधानी, वरना हो सकता है संक्रमण

                     (प्रमोद कुमार अग्रवाल) 

हॉस्पिटल जाते समय पर्याप्त सावधानी बरतना बहुत जरूरी है। थोड़ी सी भी लापरवाही सेहत पर भारी पड़ सकती है। इसकी वजह है हॉस्पिटल के वातावरण में अदृश्य कीटाणु और विषाणु मौजूद रहते हैं जो टीबी, निमोनिया, खांसी, जुकाम, फंगल इंफेक्शन समेत दूसरी कई बीमारियों से स्वस्थ व्यक्ति को भी बीमार बना सकते हैं। यह बात एसएन मेडिकल कॉलेज में एयरबोर्न इंफेक्शन कंट्रोल विषय पर संपन्न हुई वर्कशॉप के दौरान विशेषज्ञ डॉक्टरों द्वारा अपने व्याख्यान में व्यक्त किए गए। 

    एसएन मेडिकल कॉलेज के माइक्रो-बायलॉजी विभाग के अध्यक्ष डॉक्टर अंकुर गोयल ने कहा कि हॉस्पिटल में एयरबोर्न और ब्लडबोर्न से संक्रमित होने का खतरा अधिक होता है। पहले से प्रयोग की जा चुकी सिरिंज या फिर अन्य दूषित चीजों के कारण एचआईवी, हेपेटाइटिस बी और हेपेटाइटिस सी का खतरा बना रहता है। वहीं आईसीयू, ओपीडी और वार्ड में कीटाणु व विषाणु अधिक होने के कारण लापरवाही के चलते मरीज और तीमारदार एकदूसरे से संक्रमित होने लगते हैं। 

  माइक्रो-बायलॉजी विभाग की डॉक्टर आरती अग्रवाल के कहा कि हॉस्पिटलों में कीटाणु और विषाणु मौजूद रहते हैं। जिन लोगों की इम्युनिटी पॉवर कमजोर होती है या फिर पहले से ही उन्हें कोई बीमारी होती है, जीवाणु और विषाणु के संपर्क में आकर टीबी, स्वाइन फ्ल्यू, फंगल इंफेक्शन, खांसी, जुकाम, बुखार आदि से पीड़ित हो सकते हैं। 

   वक्ष एवं क्षय रोग विभाग के अध्यक्ष डॉक्टर संतोष कुमार और डॉक्टर जीवी सिंह ने बताया कि टीबी के कीटाणुओं की वजह से मरीजों में मल्टी ड्रग रेसिस्टेंस की परेशानी बढ़ रही है। ऐसे मरीजों के नजदीक आने या इनके संपर्क में रहने वाले तीमारदार व लोग भी टीबी के कीटाणुओं के संपर्क में आकर मरीज हो सकते हैं। 

   डॉक्टर नीतू चौहान और डॉक्टर प्रज्ञा शाक्य ने बताया कि हॉस्पिटल आने से पहले और हॉस्पिटल में आने के दौरान समुचित सावधानी बरतना बहुत जरूरी है। मरीजों, तीमारदारों और हॉस्पिटल स्टाफ को अपने हाथों को समय समय पर सैनिटाइज करते रहने के साथ ही मुंह व नाक पर मास्क लगा कर रहना चाहिए। हॉस्पिटल के वार्ड, ओपीडी और आईसीयू में मेडिकल वेस्ट को मानक के अनुसार निस्तारण करने पर जोर देने की आवश्यकता है। 

   वर्कशॉप में डॉक्टरो ने सुझाव देते हुए कहा कि हॉस्पिटल को कीटाणुओं और विषाणुओं से मुक्त रखने के लिए अच्छी क्वालिटी के फिनायल से पोछा लगा कर स्वच्छ रखना चाहिए। मेडिकल स्टाफ को एयरबोर्न इंफेक्शन से बचाने के लिए ट्रेनिंग दी जाए। हॉस्पिटल के वार्ड, ओपीडी और आईसीयू में वेंटिलेशन की बेहतर व्यवस्था हो। हॉस्पिटल में आने वाले खांसी, जुकाम व बुखार के मरीजों और तीमारदारों के लिए अलग से जगह तय करना जरूरी है। हॉस्पिटल स्टाफ को अपने हाथों में ग्लब्स और चेहरे पर अच्छी क्वालिटी का मास्क पहन कर की रहना चाहिए। 

  वर्कशॉप में एसएन मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉक्टर प्रशांत गुप्ता, डॉक्टर टीपी सिंह, डॉक्टर बृजेश शर्मा, डॉक्टर संजीव लवानियां, डॉक्टर पारुल गर्ग, डॉक्टर अविजित कुमार, डॉक्टर अखिल प्रताप, डॉक्टर विकास कुमार आदि ने भी व्याख्यान दिए। (न्यूज़लाइन ब्यूरो) 



हृदय रोग से बचाव के लिए सक्रिय रहना जरूरी

 हृदय रोग का खतरा कम करने के लिए दिनभर की छोटी-छोटी गतिविधियों का ध्यान रखना आवश्यक है। विशेषज्ञों के अनुसार शारीरिक सक्रियता से हृदय रोग का...