प्रमोद कुमार अग्रवाल
आगरा। बच्चों में कई दिन तक खांसी और बुखार बने रहने पर लापरवाही नहीं बरतें बल्कि जल्द से जल्द डॉक्टर से सलाह लेकर टीबी की जांच कराएं और पूरा इलाज कराएं। टीबी के बिगड़ जाने से बच्चों को गंभीर समस्या का सामना करना पड़ सकता है।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉक्टर अरुण श्रीवास्तव ने बताया कि बच्चों में टीबी रोग एक गंभीर समस्या है। अगर किसी बच्चे को कई दिनों तक खांसी हो, हफ्ते भर बुखार हो, वजन कम हो, भूख कम लगे, खांसी के साथ खून आए और शरीर में गांठे हों तो तुरंत टीबी की जांच कराएं। बच्चों में टीबी के इलाज में एंटी ट्यूबरकुलर ड्रग्स का उपयोग किया जाता है। वैसे तो टीबी का इलाज छह महीने तक चलता है, फिर भी बच्चे की उम्र और बीमारी की गंभीरता के आधार पर इलाज किया जाता है। टीबी से बचने के बाद स्वच्छता रखना जरूरी है। खांसी व जुकाम से पीड़ित लोगों से दूर रहने, पौष्टिक आहार लेने और नियमित रूप से व्यायाम करने से भी टीबी रोग से बचा जा सकता है।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने बताया कि टीबी रोग के बचाव और जागरूकता के लिए स्वास्थ्य विभाग की ओर से राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम चलाया जा रहा है। बच्चों को टीबी से बचाने के लिए समय पर बीसीजी का टीका अवश्य लगवाना चाहिए। टीबी रोग के उन्मूलन के लिए समुदाय स्तर पर लोगों का जागरूक होना बहुत जरूरी है।
जिला क्षय रोग अधिकारी डॉक्टर सुखेश गुप्ता ने बताया कि बच्चों में टीबी का शीघ्र उपचार कराने की आवश्यकता है, क्योंकि इनके लक्षण बड़ों की अपेक्षा अलग और कम स्पष्ट होते हैं। समय निकलने के बाद बच्चों में टीबी का निदान करना मुश्किल हो सकता है। इसलिए टीबी के शुरुआत लक्षण नजर आने के बाद शीघ्र निदान और प्रभावी इलाज से बच्चों का जीवन बचाया जा सकता है। (न्यूज़लाइन ब्यूरो)
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