प्रमोद कुमार अग्रवाल
सांस और अस्थमा जैसी बीमारी के शिकार मरीजों को सामान्य गति वाले प्राणायाम ही करने चाहिए। तेज गति वाले प्राणायाम ऐसे मरीजों को नुकसान भी पहुंचा सकते हैं। कोई भी प्राणायाम करने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह अवश्य लेनी चाहिए।
एसएन मेडिकल कॉलेज के वक्ष एवं क्षय रोग विभाग के अध्यक्ष डॉक्टर गजेंद्र सिंह ने बताया कि सांस और अस्थमा के मरीजों के लिए अनुलोम विलोम प्राणायाम फायदेमंद है। इस प्राणायाम में एक मध्यम गति से सांस लेने और छोड़ने की प्रक्रिया की जाती है। इससे श्वसन नलिकाओं के सिकुड़ने की संभावना नहीं होती है और फेंफड़ों में हवा की कुछ मात्रा भी बनी रहती है।
डॉक्टर सिंह ने बताया कि सांस और अस्थमा के मरीजों को कपालभाति प्राणायाम करने से बचना चाहिए क्योंकि इस प्राणायाम में सांस लेने और छोड़ने की गति अपेक्षाकृत अधिक होती है। इससे सांस छोड़ने के दौरान दबाव के कारण श्वसन नलिकाओं के सिकुड़ने की संभावना हो सकती है।
डॉक्टर सिंह ने बताया कि सांस और अस्थमा के मरीजों को कोई भी व्यायाम या प्राणायाम करने से पहले अपने डॉक्टर या विशेषज्ञ डॉक्टर से परामर्श कर लेना चाहिए। इसके साथ ही अपनी मर्जी से दवाएं और इनहेलर का प्रयोग बंद नहीं कर देना चाहिए। (न्यूज़लाइन ब्यूरो)
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