मंगलवार, 10 जून 2025

बच्चों और किशोरों में बढ़ रही है डायबिटीज़

आगरा (प्रमोद कुमार अग्रवाल)। बच्चों और किशोरों में टाइप-1 डायबिटीज बढ़ रही है। इन्हें इंसुलिन देनी पड़ रही है। बच्चों में बढ़ती इस बीमारी से डॉक्टर चिंतित हैं। बच्चों और किशोरों को इस बीमारी से बचाने के लिए इलाज के साथ ही अन्य सावधानी बरतने की जरूरत है।  

   एसएन मेडिकल कॉलेज के डायबिटीज ओपीडी प्रभारी डॉक्टर प्रभात अग्रवाल ने बताया कि कॉलेज की हर शुक्रवार को ओपीडी कॉम्प्लेक्स-दो में डायबिटीज के मरीजों के लिए ओपीडी चल रही है। इसमें 281 मरीज रजिस्टर्ड हैं, जिनमें 276 बच्चे हैं। इनमें भी 271 बालक और 5 बालिकाएं हैं। इनकी उम्र एक साल से लेकर 16 साल तक है। इन मरीजों में ऑटो इम्युन बीमारी के कारण इंसुलिन नहीं बन रही है। इससे टाइप-1 डायबिटीज हो रही है। 


     डॉक्टर अग्रवाल ने बताया कि ऑटो इम्युन बीमारी में रोग प्रतिरोधक क्षमता विपरीत कार्य करने लगती है। इसमें प्रतिरक्षा प्रणाली स्वस्थ कोशिकाओं को हमला करके नष्ट कर देती है। इस बीमारी में थकान, जोडों में दर्द व सूजन, त्वचा पर चकत्ते पड़ना, बेवजह बुखार और वजन कम होने जैसे लक्षण दिखाई देते हैं।   
 
    एसएन मेडिकल कॉलेज के डॉक्टर आशीष गौतम ने बताया कि टाइप वन डायबिटीज में प्रतिरक्षा प्रणाली अग्नाशय में इंसुलिन बनाने वाली बीटा कोशिकाओं को नष्ट कर देती है। इसके कारण इंसुलिन बनना बंद हो जाता है। ऐसे में मरीजों को इंसुलिन दी जाती है। मुंह का सूखना, बार बार प्यास लगना, बार बार पेशाब आना और भूख ज्यादा लगना भी टाइप वन डायबिटीज के खतरे की संभावना होती है। ऐसे लक्षण होने पर डायबिटीज की जांच अवश्य करा लेनी चाहिए। (न्यूज़लाइन ब्यूरो) 

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