अगर किसी दुकानदार, व्यापारी अथवा व्यवसायी का मन अपने कार्यस्थल पर बैठने को नहीं करता हो तो उन्हें शुक्ल पक्ष के प्रथम बुधवार को श्वेत गणपति (सफेद रंग के गणेश जी) का पूजन करके गणेश जी की प्रतिमा को दुकान, व्यापार स्थल या कार्यालय के उत्तर पूर्व (ईशान) कोण में स्थित पूजा स्थल में स्थापित करना चाहिए। माना जाता है कि ऐसा करने से वास्तु दोष एवं राहु दोष दूर होकर भौतिक सुख समृद्धि आने लगती है। -- प्रमोद कुमार अग्रवाल, वास्तु आचार्य एवं ज्योतिष-वास्तु लेखक, आगरा।
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शनिवार, 14 सितंबर 2024
शुक्रवार, 13 सितंबर 2024
धन लाभ के लिए उत्तर-पूर्व में लगाएं दर्पण
@ अगर कोई दुकान, फैक्टरी, उद्योग या व्यापार लगातार घाटे में चल रहा है अथवा बंद होने की स्थिति में आ गया है, तो वहां उत्तर-पूर्व कोने (ईशान कोण) में एक आयताकार या वर्गाकार दर्पण लगा देने से आर्थिक लाभ मिलने की संभावना बढ़ सकती है। दर्पण का फ्रेम स्काई ब्ल्यू, सफेद या क्रीम कलर का हो तो परिणाम अच्छे मिलते हैं।
@ मकान के दरवाजे के पीछे (दरवाजे के अंदर वाले भाग में) दर्पण लगाना वास्तु दोष माना गया है, जिसके कारण घर की शांति भंग होने और स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां होने की संभावना बनी रहती है। लेकिन यदि दरवाजा उत्तर-पूर्व कोने (ईशान कोण) की तरफ है तो दरवाजे के पीछे दर्पण लगा सकते हैं।
@ कुछ घर रेलवे क्रॉसिंग अथवा पुल की तरफ पहले से ही बने होते हैं तो कुछ घर बाद में रेलवे क्रॉसिंग या पुल के बन जाने के कारण इनके नजदीक आ जाते हैं। दोनों ही स्थिति में ऐसे घरों की आर्थिक स्थिति पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। सरल शब्दों में कहा जाए तो रेलवे क्रॉसिंग या पुल की तरफ मेन गेट वाले घरों में आमदनी की तुलना में अनावश्यक खर्चे ज्यादा लगे रहते हैं। इस वास्तु दोष से बचने के लिए घर के बाहर मेन गेट पर उत्तल दर्पण लगा देना चाहिए। -- प्रमोद कुमार अग्रवाल, वास्तु आचार्य एवं ज्योतिष- वास्तु लेखक, आगरा।
वास्तु के अनुसार बनाएं कंपाउंड वॉल
@ मकान के आसपास चारों ओर बनाई गई दीवार को कंपाउंड वॉल कहा जाता है। वास्तु शास्त्र के अनुसार दक्षिण व पश्चिम दिशा की कंपाउंड वॉल ऊंची एवं मोटी, जबकि पूर्व व उत्तर दिशा की कंपाउंड वॉल पतली एवं नीची होना आवश्यक है।
@ कंपाउंड वॉल बनाते समय इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि उत्तर पूर्व कोना (ईशान कोण) गोलाई में न हो क्योंकि इसके कारण ईशान कोण कट जाने से वास्तु दोष उत्पन्न हो जाता है।
@ अगर मकान में कंपाउंड वॉल की ऊंचाई एक मीटर या इससे अधिक रखी जाए तो दूसरी तरफ निर्मित वास्तु का कोई भी नकारात्मक एवं अशुभ प्रभाव उस मकान पर नहीं पड़ता है। -- प्रमोद कुमार अग्रवाल, वास्तु आचार्य एवं ज्योतिष-वास्तु लेखक, आगरा।
बीम के नीचे सोने से हो सकती है स्वास्थ्य समस्या
@ छत पर बीम या किसी टांड़ (दुछत्ती) के नीचे सोने, बैठने, पढ़ाई या कोई दिमागी काम करने से बचना चाहिए अन्यथा मानसिक अस्थिरता, तनाव, बेचैनी, सिर दर्द, घबराहट, थकान और अनिद्रा जैसी समस्या हो सकती है।
@ जगह की कमी के कारण यदि बीम के नीचे सोना या बैठकर काम करना मजबूरी हो तो बीम पर 'फॉल्स सीलिंग' करवा लेना ही उपयुक्त उपाय है। -- प्रमोद कुमार अग्रवाल, ज्योतिष-वास्तु लेखक एवं सलाहकार, आगरा।
गुरुवार, 12 सितंबर 2024
कार्यालयों में लगाएं सही फोटो
दुकान, व्यापारिक अथवा व्यावसायिक स्थलों के ऑफिस में फोटो या सीनरी लगाने का चलन है। लेकिन कई बार जानकारी के अभाव में ऑफिस में ऐसे फोटो लगा दिए जाते हैं, जिनके कारण वहां नकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह होने से कई तरह की समस्याएं आने लगती हैं।
वास्तु सूत्रों के अनुसार किसी भी ऑफिस में दक्षिण दिशा की दीवार पर पहाड़ की फोटो या सीनरी लगाई जा सकती है, लेकिन ध्यान यह रखना है कि इसमें पानी या पानी का कोई स्रोत न हो। ऑफिस में दिवंगत माता-पिता, दादा-दादी या अन्य पूर्वजों की फोटो लगाने के लिए दक्षिण-पश्चिम दिशा उपयुक्त मानी गई है।
ऑफिस के पूर्वी उत्तर कोण में पानी का झरना, फुब्बारा या तैरती हुई मछलियों से जुड़ी फोटो या सीनरी लगाई जा सकती है। इस प्रकार लगाई गई फोटो या सीनरी सौभाग्य का सूचक माना जाती है।-- प्रमोद कुमार अग्रवाल, ज्योतिष-वास्तु लेखक एवं सलाहकार, आगरा।
मकान में न हो कोण वेध
मकान के मेन गेट के ठीक सामने किसी अन्य मकान का कोना होना एक ऐसा वास्तु दोष है, जिसके कारण उस मकान में रहने वाले लोगों को उनकी मेहनत का पूरा लाभ नहीं मिल पाता है और प्राय धन की कमी बनी रहती है। वास्तु शास्त्र में इसे कोण वेध माना गया है।
कोण वेध के दोष से बचने के लिए मेन गेट पर पर्दा या आरपार न दिखाई देने वाली प्लास्टिक की शीट लगा देनी चाहिए। साथ ही मेन गेट के अंदर एक दर्पण भी इस तरह लगा देना चाहिए जिससे कि गेट के अंदर आने वाले व्यक्ति की परछाई दर्पण में दिखाई दे। ऐसा करने से कोण वेध वास्तु दोष का अशुभ प्रभाव नहीं पड़ता और नकारात्मक ऊर्जा भी मकान में प्रवेश नहीं करती। -- प्रमोद कुमार अग्रवाल, ज्योतिष-वास्तु लेखक एवं सलाहकार आगरा।
पश्चिम दिशा में न हो बालकनी
जहां तक संभव हो, पश्चिम दिशा में बालकनी और बरामदा नहीं बनवाने चाहिए। इसका कारण यह है कि पश्चिम दिशा में अस्त होते समय सूर्य की किरणें स्वास्थ्य की दृष्टि से लाभकारी नहीं होती हैं।
अगर किसी मकान की पश्चिम दिशा में बालकनी या बरामदा पहले से ही बने हुए हैं, तो वहां शाम के समय मोटा पर्दा लगा सकते हैं, जिससे कि हानिकारक सूर्य की किरणों से बचाव हो सके। -- प्रमोद कुमार अग्रवाल, ज्योतिष-वास्तु लेखक एवं सलाहकार, आगरा।
उपयोगी वास्तु टिप्स
@ घर के दक्षिण-पश्चिम कोण (नैरुत्य कोण) में फर्श के ढ़लान का होना वास्तु दोष है। इसके कारण घर के स्वामी का स्वास्थ्य खराब रहने और धन व संपत्ति का नुकसान होने जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। बचाव के लिए फर्श के ढ़लान को नैरुत्य कोण से हटा देना चाहिए।
@ घर के अंदर कांटेदार और दूध वाले पेड़-पौधे नहीं लगाने चाहिए। जिस घर में कांटेदार पौधे होते हैं, वहां रहने वाले लोगों में ह्रदय एवं ब्लडप्रेशर रोग होने की संभावना रहती है। वहीं जिन पौधों को तोड़ने या काटने पर दूध जैसा द्रव निकलता है, उन्हें भी घर के अंदर लगाने से बचना चाहिए। क्योंकि ऐसे पौधों की वजह से घर में रहने वाले फेफड़े, किडनी व मूत्र संबंधी रोगों से पीड़ित हो सकते हैं।-- प्रमोद कुमार अग्रवाल, ज्योतिष-वास्तु लेखक एवं सलाहकार, आगरा।
बुधवार, 11 सितंबर 2024
गंदे पानी का जमाव बना सकता है कर्जदार
@ किसी दुकान, फैक्ट्री या व्यावसायिक स्थल के मेन गेट पर अथवा दक्षिण और पश्चिम दिशा में नाली व सीवर के गंदे पानी का जमाव वास्तु दोष की वजह बनता है, जिससे दुकान व व्यवसाय में रुकावटें आती हैं और उसके स्वामी पर कर्ज का बोझ बढ़ने की संभावना बनी रहती है। बचाव के लिए गंदे पानी का जमाव न होने दें।
@ मकान के पीछे की तरफ राजमार्ग होना वास्तु दोष है। इसके कारण तरक्की में बाधा के साथ-साथ दूसरों से अकारण अपमानित होने की संभावना रहती है। इस दोष से बचने लिए मकान के पीछे की दीवार पर एक अष्टकोणीय दर्पण (ठाकुर मिरर) लगाना चाहिए। -- प्रमोद कुमार अग्रवाल, वास्तु आचार्य एवं ज्योतिष-वास्तु लेखक, आगरा।
जीवन को प्रभावित कर सकता है भवन निर्माण
मनुष्य के जीवन से वास्तु शास्त्र का गहरा संबंध है। जिस भवन में मनुष्य रहता है, व्यवसाय या व्यापार करता है अथवा किसी अन्य रूप में भवन को काम में लाता है, वहां की वास्तु का प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष शुभ या अशुभ प्रभाव देर-सवेर उस पर पड़ता है।
सब कुछ ठीक होने के बाद भी भवन में एक या अधिक वास्तु दोष होने पर जीवन में कुछ न कुछ ऐसा घटित होने लगता है, जिसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती है। देखने में आता है कि वास्तु दोष की वजह से परिवार में बिखराव, आपसी तालमेल की कमी, परिवार के लोगों में मनमुटाव व कलह, धनार्जन में बाधा, शारीरिक व मानसिक रोग, पड़ौसियों से विवाद, अकाल मृत्यु, घर के सदस्यों का गलत आचरण व आपराधिक कार्यों में लिप्तता, बिना वजह मान-सम्मान व प्रतिष्ठा में कमी, शत्रुओं में वृद्धि, व्यवसाय व व्यापार में नुकसान, बिजली के उपकरणों व मशीनों आदि में बार-बार खराबी जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।
वास्तु शास्त्र कोई अंधविश्वास या कल्पना पर आधारित विषय नहीं है, बल्कि यह एक ऐसा मान्य विज्ञान है जो प्रकृति प्रदत्त पंच तत्वों, प्रभावशाली चुंबकीय क्षेत्र और आठ दिशाओं पर आधारित है तथा इसके नियमों के अनुरूप किया गया भवन निर्माण निश्चय ही वहां सकारात्मक ऊर्जा के प्रवाह को बनाए रखता है, जिससे जीवन में शुभता आने लगती है।
अगर किसी मनुष्य को लगता है कि उसके भवन में रहने, व्यापार या व्यवसाय करने के दौरान समस्याओं में वृद्धि हुई है या फिर उसका जीवन किसी भी अन्य रूप में प्रभावित हुआ है तो उसे किसी सुयोग्य व अनुभवी वास्तु सलाहकार से संपर्क करके भवन के वास्तु दोषों का पता लगा कर निराकरण कराना चाहिए जिससे कि भवन निर्माण का उसका उद्देश्य पूर्ण हो सके और सुखमय, सम्मानपूर्ण व सुव्यवस्थित जीवन जीने का उसका सपना साकार हो सके। -- प्रमोद कुमार अग्रवाल, ज्योतिष-वास्तु लेखक एवं सलाहकार, आगरा।
वास्तु शास्त्र में छिपा है सुखी जीवन का रहस्य
भारत में ज्योतिष और वास्तु को जीवन का एक ऐसा अद्भुत विज्ञान माना गया है, जिसके सिद्धांतों का अनुसरण करके धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष के दर्शन का अनुभव किया जा सकता है। किसी भूखण्ड पर आवासीय या व्यावसायिक भवन का निर्माण कराने के बाद उस निर्मित वास्तु का, रहने या व्यवसाय अथवा व्यापार के लिए उपयोग करने से धर्म एवं मोक्ष, दोनों ही प्रभावित होते हैं।
किसी भी वास्तु के उपयोग से सुनिश्चित सफलता तभी संभव है, जब वह सभी तरह के वास्तु दोषों से मुक्त हो तथा उस वास्तु में प्रवेश करने से पहले विधि विधान से वास्तु पूजन संपन्न करा दिया गया हो। धर्म, आध्यात्म और ज्योतिष के साथ वास्तु विज्ञान का समन्वय निश्चित ही मानव कल्याण की उस भावना को साकार करता है, जिसके लिए वास्तु नियम बनाए गए।
वास्तु शास्त्र के अनुसार वास्तु का निर्माण और उपयोग जीवन को सुरक्षित, सुखी, संपन्न और प्रसन्नता प्रदान करता है, इसमें किसी को कोई संदेह नहीं होना चाहिए। -- आचार्य प्रमोद कुमार अग्रवाल, ज्योतिष-वास्तु लेखक, आगरा।
रिश्तों को दें सम्मान, ग्रह रहेंगे बलवान
जन्म कुंडली में बैठे ग्रहों के शुभ-अशुभ फल के अनुसार उपाय किए जाते हैं। वो भी इस उद्देश्य से कि ग्रहों के शुभ फल मिलने से जीवन सुखी व संपन्न बन जाएगा। लेकिन हम अपने ही घर में उन सगे-संबंधियों की उपेक्षा व अपमान करते हैं जो किसी न किसी ग्रह से जुड़े होते हैं।
ऐसी दशा में जब मनोनुकूल परिणाम नहीं मिलते तो लोग ज्योतिष शास्त्र एवं उससे जुड़े विद्वानों की योग्यता और ज्ञान पर अंगुली उठाने लगते हैं। वे यह भूल जाते हैं कि ग्रहों की शुभता के लिए पहले घर से ही प्रयास करने की जरूरत होती है, बाद में दूसरे उपाय कारगर होते हैं।
ज्योतिष के अनुसार सूर्य ग्रह की शुभता के लिए पिता, चन्द्र ग्रह के लिए माता, मंगल ग्रह के लिए भाई, बुध ग्रह के लिए मित्र, बहन व बंधु, गुरु ग्रह के लिए संतान, शुक्र ग्रह के लिए पति-पत्नी, शनि ग्रह के लिए नौकर व कर्मचारी, राहु ग्रह के लिए शत्रु और केतु ग्रह की शुभता के लिए अन्य सगे-संबंधियों के साथ सम्मान और प्रेम का व्यवहार किया जाना आवश्यक है।
यदि हम अपने घर-परिवार के सदस्यों के साथ-साथ सभी नाते-रिश्तेदारों, मित्रों और परिचितों के साथ सदव्यवहार करें, उनके साथ किसी भी प्रकार का छल, उत्पीड़न, अन्याय न करें एवं उनको यथोचित आदर व सम्मान देते रहें तो ग्रहों के अशुभ प्रभाव से हमारा स्वत: ही बचाव होता रहेगा और तब हम सुखी, संपन्न एवं शांतिपूर्ण ढंग से जीवन जीने का आनंद लेते रहेंगे।--प्रमोद कुमार अग्रवाल, ज्योतिष-वास्तु लेखक एवं सलाहकार, आगरा।
टूटी खिड़कियों से हो सकती है आंखों में परेशानी
सही दिशा एवं संख्या में लगी खिडकियां, भवन के अंदर सकारात्मक ऊर्जा के प्रवाह में सहायक होती हैं। खिडकियां सदैव बाहर या अंदर की तरफ खुलने वाली होनी चाहिए। सरकने वाली (स्लाइडिंग) खिडकियां बनाना ठीक नहीं होता। वहीं भवन में कोई भी खिड़की टूटी हुई नहीं होनी चाहिए। अन्यथा वहां रहने वाले लोगों की आंखों में कष्ट (नेत्र रोग) रहने की संभावना बनी रहती है। -- प्रमोद कुमार अग्रवाल, ज्योतिष-वास्तु लेखक एवं सलाहकार, आगरा।
मंगलवार, 10 सितंबर 2024
उपयोगी वास्तु टिप्स
@ धन वृद्धि के लिए चंद्रवेधी मकान को शुभ माना गया है। उत्तर से दक्षिण में लंबा मकान चंद्रवेधी होता है।
@ त्रिकोणीय जमीन पर कभी भी मकान नहीं बनवाना चाहिए वरना आकस्मिक दुर्घटनाओं से जान व माल के नुकसान की संभावना रहती है।
@ शयन कक्ष में एक से अधिक प्रवेश द्वार न हों अन्यथा कमरे की पॉजिटिव एनर्जी एक द्वार से आकर दूसरे से बाहर निकलती रहेगी। खिड़कियां एक से अधिक हो सकती हैं।
@ घर की सीढ़ियां टूटी-फूटी या असुविधाजनक नहीं होनी चाहिए अन्यथा परिवार में अशांति और कलह की संभावना बढ़ जाती है। -- प्रमोद कुमार अग्रवाल, ज्योतिष-वास्तु लेखक एवं सलाहकार, आगरा।
शुभ कार्य के लिए शुभ है पुष्य नक्षत्र
ज्योतिष के अनुसार पुष्य नक्षत्र के स्वामी देवगुरु बृहस्पति हैं। बृहस्पतिवार और रविवार को पुष्य नक्षत्र होना अत्यंत शुभ माना जाता है। इन दोनों दिनों में कोई भी शुभ कार्य किया जा सकता है।
वहीं सोमवार, मंगलवार, बुधवार और शनिवार को पुष्य नक्षत्र का होना मध्यम फलदायी होता है। इन दिनों में भी शुभ कार्य किए जा सकते हैं।
शुक्रवार के दिन पुष्य नक्षत्र के होने से उत्पात नामक योग बनता है। इसलिए जब तक उत्पात योग रहे, तब तक कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए। -- प्रमोद कुमार अग्रवाल, ज्योतिष-वास्तु लेखक एवं सलाहकार, आगरा।
ज्योतिष में हंस योग
जन्म कुंडली में जब केंद्र में बृहस्पति ग्रह, उच्च के हों अथवा अपनी राशि में बैठे हों तो यह स्थिति हंस योग कहलाती है। कर्क राशि में बृहस्पति उच्च के और धनु व मीन राशि में बृहस्पति स्व राशि के माने जाते हैं। जिन लोगों की कुंडली में हंस योग होता है वे सदैव सम्मानित होते हैं और उनके कार्य की प्रशंसा भी होती है। -- प्रमोद कुमार अग्रवाल, ज्योतिष-वास्तु लेखक एवं सलाहकार, आगरा
विवाह के लिए शुभ नक्षत्र
ज्योतिष के अनुसार लड़की या लड़के के विवाह के लिए शुभ नक्षत्र देखना आवश्यक माना गया है। रोहिणी, उत्तरा फाल्गुनी, उत्तरा भाद्रपद, उत्तराषाढ़, रेवती, मूल, स्वाति, मृगशिरा, मघा, अनुराधा और हस्त नक्षत्रों को विवाह के हैं। -- प्रमोद कुमार अग्रवाल, ज्योतिष-वास्तु लेखक एवं सलाहकार, आगरा।
अनबूझ मुहूर्त
पूनम की पड़वा भली अर अमावस की बीज।
अणु बूझ्या मुहरत भला कै तैरस के तीज।।
राजस्थान के एक कवि द्वारा रचित इस दोहे में किसी भी कार्य को करने के लिए अनबूझ मुहूर्त के बारे में बताया गया है। जिसके अनुसार पूर्णमासी के बाद आने वाली प्रतिपदा तिथि (पड़वा), त्रयोदशी तिथि (तेरस) एवं तृतीया तिथि (तीज) और अमावस्या के बाद शुक्ल पक्ष की द्वितिया तिथि (दौज) अनबूझ मुहूर्त होती हैं। इन तिथियों में किसी काम को करने के लिए मुहूर्त नहीं देखा जाता है और काम में भी सफलता मिलती है। -- प्रमोद कुमार अग्रवाल, ज्योतिष-वास्तु लेखक एवं सलाहकार, आगरा।
बेहतरी के लिए रखें उत्तर-पूर्व दिशा का ध्यान
वास्तु शास्त्र के अनुसार उत्तर दिशा के देवता धन प्रदान करने वाले कुबेर हैं, जबकि ईशान कोण (उत्तर-पूर्व विदिशा) के देवता बुद्धि प्रदाता ब्रहस्पति हैं। बुद्धि और धन के बल पर ही कोई भी कार्य, चाहे वह खुद का व्यापार हो या व्यवसाय अथवा किसी दूसरे के लिए किया जाने वाला शारीरिक व मानसिक श्रम, आसानी से सफलता पूर्वक संपन्न किया जा सकता है।
किसी भी वास्तु में रहने, व्यापार या व्यवसाय करने के दौरान अपेक्षित लाभ प्राप्त करने के लिए यह आवश्यक है कि उस वास्तु में उत्तर और पूर्व दिशाओं का विशेष ध्यान रखा जाए, जिससे कि वहां ब्रहस्पति और कुबेर देवताओं की कृपा सदैव बनी रहे। इसीलिए वास्तु नियमों में उत्तर व पूर्व दिशाओं को खाली, खुला, नीचा, स्वच्छ और वास्तु दोष से मुक्त रखा जाना अनिवार्य बताया गया है।
उत्तर और पूर्व दिशाओं में किसी भी तरह के भारी निर्माण, शौचालय, कबाड़ घर, किचन, सैप्टिक टैंक, सीढ़ियां, ओवरहेड पानी की टंकी, विशालकाय पेड़ का होना वास्तु दोष का कारण बनता है। जिसकी वजह से शारीरिक व मानसिक रोग, मांगलिक कार्यों में रुकावट, कर्ज में वृद्धि, घन की कमी, पितृ दोष आदि समस्याएं आने लगती हैं। इसलिए उत्तर-पूर्व दिशाओं को दोष मुक्त बनाए रखकर भी बेहतर जीवन का आनंद लिया जा सकता है।-- प्रमोद कुमार अग्रवाल, ज्योतिष-वास्तु लेखक एवं सलाहकार, आगरा।
ईशान कोण में टॉयलेट है तो करें उपाय
किसी भवन के उत्तर-पूर्व कोने (ईशान कोण) में जाने-अनजाने बना हुआ टॉयलेट वास्तु की दृष्टि से दोषपूर्ण माना गया है। जिस भवन के पूर्व या उत्तर दिशा में आम रास्ता हो तो, वहां ईशान कोण में टॉयलेट का होना अधिक दुखदायी होता है। जिससे परिवार में अशांति, जटिल रोग और अनैतिक कार्यों से धन व सम्मान की हानि होने की संभावना रहती है।
अगर भवन के ईशान कोण में टॉयलेट है तो उसे स्थायी रूप से बंद करना या फिर केवल बाथरूम के रूप मे उपयोग करना ही बेहतर है। लेकिन जगह की कमी के कारण ये संभव नहीं है तो टॉयलेट के दरवाजे के बाहरी भाग में एक बड़ा दर्पण इस तरह लगा दें कि वह दक्षिण-पश्चिम कोण से आसानी से नज़र आए।
यदि किसी वजह से दर्पण लगाना भी संभव न हो तो टॉयलेट के अंदर कांच के एक बाउल में साबुत या पिसा नमक या फिटकरी के टुकड़े रखें, साथ ही टॉयलेट के दरवाजे के बाहरी भाग में शिकार करते हुए या मुंह फाड़ते हुए शेर का एक बड़ा चित्र लगा दें। रखे गए नमक या फिटकरी को हर महीने पानी में बहाकर नया रख दें। -- प्रमोद कुमार अग्रवाल, ज्योतिष-वास्तु लेखक एवं सलाहकार, आगरा।
हृदय रोग से बचाव के लिए सक्रिय रहना जरूरी
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