शुक्रवार, 27 जून 2025

आगरा जोन में पुलिस विभाग की जमीन का हो रहा है डिजिटलाइजेशन

                      प्रमोद कुमार अग्रवाल

 आगरा जोन में पुलिस विभाग की जमीन को चिह्नांकन करने के साथ ही डिजिटलाइजेशन का कार्य भी किया जा रहा है। इसका उद्देश्य जोन में पुलिस विभाग की जमीन की जानकारी करना और जमीन को विभागीय कार्यों के लिए इस्तेमाल में लाने के लिए कार्य योजना तैयार करना है। इससे पुलिस विभाग की जमीनों से संबंधित पूरी जानकारी आसानी से उपलब्ध हो सकेगी और पुलिस विभाग की आवासीय एवं अन्य समस्याओं को दूर किया जा सकेगा। 

    एडीजी जोन अनुपम कुलश्रेष्ठ ने बताया कि आगरा, मथुरा, फिरोजाबाद, मैनपुरी, अलीगढ़ और हाथरस जनपदों में पुलिस विभाग की जमीनों का चिह्नांकन किया जा रहा है। इसके बाद राजस्व विभाग में जमीन के रिकॉर्ड की जांच कराई जाएगी। इसके लिए जमीन से संबंधित खसरा और खतौनी सहित पूरा विवरण मांगा गया है। इन जमीनों के चिह्नांकन के बाद एप के माध्यम से डिजिटलाइजेशन कराया जाएगा, जिससे कि पुलिस विभाग की जमीन के संबंध में पूरी जानकारी एक क्लिक पर उपलब्ध हो सके। (न्यूज़लाइन ब्यूरो) 

टीथर्ड ड्रोन कैमरों से होगी ताजमहल की निगरानी

                    प्रमोद कुमार अग्रवाल

 विश्वप्रसिद्ध ताजमहल की सुरक्षा के लिए टीथर्ड ड्रोन और एक सौ और कैमरों के माध्यम से निगरानी करने के लिए योजना तैयार की गई है। टीथर्ड ड्रोन की मदद से रेड जोन के साथ ही यलो और ग्रीन जोन में होने वाली सभी गतिविधियों पर नजर रखी जा सकेगी। 

    डीसीपी सिटी सोनम कुमार ने बताया कि एएसआई और सीआईएसएफ के अधिकारियों के साथ संपन्न हुई बैठक में ताजमहल की सुरक्षा व्यवस्था को और भी पुख्ता करने के लिए विचार विमर्श किया गया। इसके तहत मिले एंटी ड्रोन सिस्टम की मदद से ताजमहल के पांच सौ मीटर के दायरे में उड़ने वाले ड्रोन को गिरा दिया जाएगा। ड्रोन उड़ाने वाले ऑपरेटर की पहचान भी संभव हो सकेगी। 

    उन्होंने बताया कि टीथर्ड ड्रोन एक ऐसा विशेष ड्रोन है जो एक बार में बारह से चौदह घंटे तक की उड़ान भर सकता है। इसको एक रस्सी से बांध कर निश्चित ऊँचाई तक उड़ाया जा सकता है। इसमें लगे हाई रिज्योल्यूशन कैमरे दिन और रात संदिग्धों पर नजर रखने में सक्षम हैं। इसके वीडियो और सर्विलांस से पुलिस प्रशासन को काफी मदद मिलेगी। 

   डीसीपी सिटी ने बताया कि टीथर्ड ड्रोन के दो बार ट्रायल हो चुके हैं और जल्द ही इसे परिसर में लगा दिया जाएगा। ताजमहल परिसर के रेड और यलो जोन में सीसीटीवी कैमरों की संख्या में भी वृद्धि की जा रही है। वर्तमान में रेड जोन में 55 सीसीटीवी कैमरे लगे हैं। अब इनकी संख्या 150 तक की जा रही है। इन कैमरों की मदद से ताजमहल के चप्पे चप्पे पर नजर रखी जा सकेगी। यलो जोन में पुलिस कर्मियों की संख्या भी बढ़ाई जाएगी। (न्यूज़लाइन ब्यूरो) 

सांस और अस्थमा के मरीजों के लिए फायदेमंद है अनुलोम विलोम प्राणायाम

                     प्रमोद कुमार अग्रवाल

 सांस और अस्थमा जैसी बीमारी के शिकार मरीजों को सामान्य गति वाले प्राणायाम ही करने चाहिए। तेज गति वाले प्राणायाम ऐसे मरीजों को नुकसान भी पहुंचा सकते हैं। कोई भी प्राणायाम करने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह अवश्य लेनी चाहिए। 

    एसएन मेडिकल कॉलेज के वक्ष एवं क्षय रोग विभाग के अध्यक्ष डॉक्टर गजेंद्र सिंह ने बताया कि सांस और अस्थमा के मरीजों के लिए अनुलोम विलोम प्राणायाम फायदेमंद है। इस प्राणायाम में एक मध्यम गति से सांस लेने और छोड़ने की प्रक्रिया की जाती है। इससे श्वसन नलिकाओं के सिकुड़ने की संभावना नहीं होती है और फेंफड़ों में हवा की कुछ मात्रा भी बनी रहती है। 

   डॉक्टर सिंह ने बताया कि सांस और अस्थमा के मरीजों को कपालभाति प्राणायाम करने से बचना चाहिए क्योंकि इस प्राणायाम में सांस लेने और छोड़ने की गति अपेक्षाकृत अधिक होती है। इससे सांस छोड़ने के दौरान दबाव के कारण श्वसन नलिकाओं के सिकुड़ने की संभावना हो सकती है।

 डॉक्टर सिंह ने बताया कि सांस और अस्थमा के मरीजों को कोई भी व्यायाम या प्राणायाम करने से पहले अपने डॉक्टर या विशेषज्ञ डॉक्टर से परामर्श कर लेना चाहिए। इसके साथ ही अपनी मर्जी से दवाएं और इनहेलर का प्रयोग बंद नहीं कर देना चाहिए। (न्यूज़लाइन ब्यूरो) 

बरसात में भीगने से हो सकते हैं फंगल इंफेक्शन व पेट के रोग

                  प्रमोद कुमार अग्रवाल

बरसात के मौसम में वर्षा के पानी में भीगने और उमस से टायफाइड, त्वचा, कान और पेट के रोग होने की परेशानी बढ़ रही हैं। इसके अलावा इस मौसम में फंगल इंफेक्शन, एलर्जी, बाल टूटने और खुजली के कारण जख्म बनने की शिकायत भी आ रही हैं। 

   एसएन मेडिकल कॉलेज के त्वचा रोग के विभाग अध्यक्ष डॉक्टर यतेंद्र चाहर ने बताया कि त्वचा रोग विभाग की ओपीडी में इन दिनों जो मरीज आ रहे हैं उनमें बगल, जांघ, गर्दन पर फंगल इंफेक्शन, लाल दाने और एलर्जी की परेशानी मिली है। बरसात के मौसम में संक्रमण के कारण खुजली बढ़ रही है, जिससे जख्म भी बन रहे हैं। 

   डॉक्टर चाहर ने बताया कि मरीजों में बाल टूटने, सिर की एलर्जी, कान में पानी चले जाने से कान में दर्द, सूजन व खुजली, अपदूषित खान-पान की वजह से पेट में दर्द, उल्टी, दस्त, टायफाइड की परेशानी हो रही है। इन समस्याओं से बचने के लिए लोगों को बरसात के मौसम में कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए। 

   त्वचा रोग के विभाग अध्यक्ष ने बताया कि बरसात में भीगने पर गीले कपड़े देर तक पहनने से बचना और शरीर व बालों को सूखा रखना जरूरी है। बालों को सुखाने के लिए देर तक बालों को बांधकर न रखें। बाजार में बिकने वाले गले व पहले से काट कर रखे हुए फल, अपदूषित खाद्य सामग्री आदि न खाएं। पानी उबाल कर ठंडा करके पीएं। कान में पानी चले जाने की वजह से संक्रमण होने पर विशेषज्ञ डॉक्टर को दिखाएं। (न्यूज़लाइन ब्यूरो) 

सोमवार, 16 जून 2025

भारतीय न्याय संहिता, 2023 की महत्वपूर्ण धाराएं

* धारा-64: बलात्कार के लिए सजा (भारतीय दंड संहिता की धारा-376 ) 

* धारा-74: महिला की लज्जा भंग करने के आशय से हमला (भादंसं की धारा-354) 
* धारा-80: दहेज मृत्यु (भादंसं की धारा-304-B) 
* धारा-85: महिला के पति या नातेदार द्वारा क्रूरता (भादंसं की धारा-498A) 
* धारा-103: हत्या के लिए सजा (भादंसं की धारा-302)
* धारा-109: हत्या करने की कोशिश (भादंसं की धारा-307) 
* धारा-108: आत्महत्या के लिए दुष्प्रेरण ( भादंसं की धारा-306) 
* धारा-152: भारत की संप्रभुता, एकता और अखंडता को खतरे में डालने वाला कार्य करना 
* धारा-281: सार्वजनिक मार्ग पर लापरवाही से वाहन चलाना (भादंसं की धारा-279) 
* धारा-308: उद्दापन (भादंसं की धारा-385-389) 
* धारा-316: आपराधिक न्यासभंग के लिए सजा (भादंसं की धारा-406) 
* धारा-316: सरकारी सेवक, बैंकर, व्यापारी या एजेंट द्वारा आपराधिक न्यासभंग (भादंसं की धारा-409) 
* धारा-318: छल या धोखाधड़ी (भादंसं की धारा-420) 
* धारा-351(2&3): आपराधिक अभित्रास (भादंसं की धारा-506) 
*धारा-352: लोकशांति भंग करने को प्रकोपित करने के आशय से अपमान करना (भादंसं की धारा-504) 
*धारा-356: मानहानि (भादंसं की धारा-499) 

मंगलवार, 10 जून 2025

तेज धूप और गर्मी से हो रहे हैं डायरिया, पेट दर्द व बुखार, बरतें सावधानी

आगरा (प्रमोद कुमार अग्रवाल)। तेज धूप और गर्मी के चलते इन दिनों डायरिया, पेट दर्द, कमजोरी, घबराहट और बुखार से लोग पीड़ित हो रहे हैं। धूप में काम करने वाले लोगों में ये समस्या ज्यादा देखने को मिल रही है। बचाव के लिए समुचित सावधानी बरतने की जरूरत है। 

   एसएन मेडिकल कॉलेज के मेडिसिन विभाग के डॉक्टर चंद्र प्रकाश गौतम ने बताया कि तेज धूप के कारण मरीजों की संख्या बढ़ रही है। मरीजों में बुखार, पेट दर्द, उल्टी व दस्त और कमजोरी की परेशानी मिल रही है। कमला नगर निवासी बाल रोग विशेषज्ञ डॉक्टर युवराज सिंह ने बताया कि गर्मी के मौसम में बाजार के दूषित भोजन और दूषित पानी से बच्चों में डायरिया और टायफाइड के लक्षण दिखाई दे रहे हैं। समय पर इलाज नहीं कराने से शरीर में पानी की कमी होने पर बच्चों की हालत गंभीर भी हो सकती है। 

    डॉक्टर सिंह ने बताया कि गर्मी और तेज धूप के कारण होने वाली समस्याओं से बचने के लिए बच्चों को बाजार में खुले व गंदगी में बिकने वाली खाने-पीने की सामग्री से बचाना चाहिए। कुछ भी खाने से पहले हाथों को अच्छी तरह से साबुन से साफ करना जरूरी है। किसी फंक्शन में ज्यादा खाने से भी बचना चाहिए। इस मौसम में आने वाले रसदार फल, ककड़ी, खीरा, नारियल पानी, संतरा, तरबूज, खरबूजा आदि का सेवन अवश्य करें। इससे शरीर में पानी की कमी नहीं होगी और शरीर को जरूरी पोषक तत्व भी मिल जाएंगे। (न्यूज़लाइन ब्यूरो) 

लोको पायलट के तनाव को दूर करने के लिए रेलवे की पहल

आगरा (प्रमोद कुमार अग्रवाल)। रेलवे द्वारा लोको पायलटों की थकान दूर करने और उन्हें तनाव मुक्त रखने के लिए अनोखी पहल की गई है। इसके तहत आगरा कैंट रेलवे स्टेशन के पास रनिंग रूम में लोको पायलटों को योग और ध्यान कराया जाएगा। साथ ही उनके ठहरने और आराम के लिए वातानुकूलित कक्ष की व्यवस्था भी की गई है। 

     आगरा रेल मंडल की जन संपर्क अधिकारी प्रशस्ति श्रीवास्तव ने बताया कि उत्तर मध्य रेलवे के प्रयागराज डिवीजन में सबसे पहले इस व्यवस्था की शुरुआत की गई थी। अब आगरा डिवीजन के अंतर्गत आगरा कैंट रेलवे स्टेशन के पास रनिंग रूम में ट्रेन मैनेजर, लोकों पायलट और सहायक लोको पायलट के आराम के लिए विशेष व्यवस्थाओं के साथ रनिंग रूम को बेहतर बनाया गया है। 

    जन संपर्क अधिकारी ने बताया कि रनिंग रूम में एक योग कक्ष बनाया गया है। जहां लोको पायलट ड्यूटी करने के बाद योग कर सकते हैं। उनके लिए आर्ट ऑफ लिविंग के प्रशिक्षु रखे गए हैं। रनिंग रूम में इन रेल कर्मियों के ठहरने के लिए वातानुकूलित कक्ष हैं। जिनमें डबल बेड लगाए गए हैं। वे यहां बारह घंटे आराम कर सकते हैं। (न्यूज़लाइन ब्यूरो) 

बच्चों और किशोरों में बढ़ रही है डायबिटीज़

आगरा (प्रमोद कुमार अग्रवाल)। बच्चों और किशोरों में टाइप-1 डायबिटीज बढ़ रही है। इन्हें इंसुलिन देनी पड़ रही है। बच्चों में बढ़ती इस बीमारी से डॉक्टर चिंतित हैं। बच्चों और किशोरों को इस बीमारी से बचाने के लिए इलाज के साथ ही अन्य सावधानी बरतने की जरूरत है।  

   एसएन मेडिकल कॉलेज के डायबिटीज ओपीडी प्रभारी डॉक्टर प्रभात अग्रवाल ने बताया कि कॉलेज की हर शुक्रवार को ओपीडी कॉम्प्लेक्स-दो में डायबिटीज के मरीजों के लिए ओपीडी चल रही है। इसमें 281 मरीज रजिस्टर्ड हैं, जिनमें 276 बच्चे हैं। इनमें भी 271 बालक और 5 बालिकाएं हैं। इनकी उम्र एक साल से लेकर 16 साल तक है। इन मरीजों में ऑटो इम्युन बीमारी के कारण इंसुलिन नहीं बन रही है। इससे टाइप-1 डायबिटीज हो रही है। 


     डॉक्टर अग्रवाल ने बताया कि ऑटो इम्युन बीमारी में रोग प्रतिरोधक क्षमता विपरीत कार्य करने लगती है। इसमें प्रतिरक्षा प्रणाली स्वस्थ कोशिकाओं को हमला करके नष्ट कर देती है। इस बीमारी में थकान, जोडों में दर्द व सूजन, त्वचा पर चकत्ते पड़ना, बेवजह बुखार और वजन कम होने जैसे लक्षण दिखाई देते हैं।   
 
    एसएन मेडिकल कॉलेज के डॉक्टर आशीष गौतम ने बताया कि टाइप वन डायबिटीज में प्रतिरक्षा प्रणाली अग्नाशय में इंसुलिन बनाने वाली बीटा कोशिकाओं को नष्ट कर देती है। इसके कारण इंसुलिन बनना बंद हो जाता है। ऐसे में मरीजों को इंसुलिन दी जाती है। मुंह का सूखना, बार बार प्यास लगना, बार बार पेशाब आना और भूख ज्यादा लगना भी टाइप वन डायबिटीज के खतरे की संभावना होती है। ऐसे लक्षण होने पर डायबिटीज की जांच अवश्य करा लेनी चाहिए। (न्यूज़लाइन ब्यूरो) 

बार-बार तेल के उपयोग से बढ़ रहे हैं कैंसर और हृदय रोग के मरीज

              (प्रमोद कुमार अग्रवाल)  

   घर, रेस्टोरेंट, होटल, खाने की स्टॉल आदि में तेल को बार-बार गर्म करके उसमें खाद्य सामग्री बनाने और फिर उनका सेवन करने से कैंसर और हृदय रोगियों की संख्या में बढ़ोत्तरी हो रही है। इसके कारण रक्त में कॉलेस्ट्रोल बढ़ने से धमनियां संकुचित होने लगती हैं, जिससे हृदय आघात का खतरा बढ़ जाता है। 

   यह कहना है हृदय रोग विशेषज्ञों का। हृदय रोग और कॉलेस्ट्रोल के बढ़ते मरीजों के मद्देनजर खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन और नेशनल चैंबर की संयुक्त बैठक में वक्ताओं ने व्यापारियों को सलाह दी कि खाद्य तेल को अधिकतर तीन बार ही उपयोग में लाया जाए। 
   हृदय रोग विशेषज्ञ डॉक्टर राज कुमार गुप्ता ने बताया कि तेल को बार-बार गर्म करने से पॉलिसाइक्लिक एरोमैटिक हाइड्रोकार्बन और एल्डीहाइड जैसे कार्सिनोजेनिक तत्व भी बढ़ जाते हैं। इससे शरीर में सूजन और कैंसर का खतरा अधिक हो जाता है। इसलिए एक बार गर्म किए गए तेल को तीन बार से ज्यादा इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। खाद्य सामग्री पकाने के लिए उतना ही तेल लेना चाहिए जितना उस समय के लिए जरूरी हो। 
    सहायक आयुक्त खाद्य द्वितीय शशांक त्रिपाठी ने बताया कि खाद्य सामग्री बनाते समय तेल को अधिकतम तीन बार ही उपयोग में लाना चाहिए। इसके बाद बचे हुए तेल को बायो डीजल बनाने वाली कंपनियों को बेच सकते हैं। अगर कोई खाद्य सामग्री निर्माता ऐसा नहीं करता है तो खाद्य विभाग द्वारा डोम-24 यंत्र के माध्यम से उपयोग में लाए जा रहे तेल की टोटल पोलर कंपाउंड्स (टीपीसी) की जांच की जाएगी। अगर जांच में टीपीसी 25 से अधिक मिला तो मौके पर ही तेल को नष्ट करा दिया जाएगा। 
    मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी राजेश गुप्ता ने बैठक में व्यापारियों के तेरह सूत्री सवालों पर विस्तार से जानकारी दी। बैठक में विवेक जैन, संजय गोयल, संजय अग्रवाल, विकास चतुर्वेदी, राजेश अग्रवाल, सीताराम अग्रवाल, प्रवीन गोयल आदि मौजूद रहे। (न्यूज़लाइन ब्यूरो) 

मंगलवार, 13 मई 2025

आंखों की सेहत बिगाड़ रही है तेज धूप और गर्मी

             (प्रमोद कुमार अग्रवाल) 

 तेज धूप और गर्मी अब आंखों को भी बीमार बना रही है। आंखों में जलन, सूखापन, किरकिराहट और लालपन जैसे लक्षण नजर आएंगे तो तुरंत नेत्र रोग विशेषज्ञ से इलाज कराना चाहिए। 

    एसएन मेडिकल कॉलेज के नेत्र रोग विभाग की अध्यक्ष डॉक्टर स्निग्धा जैन ने बताया कि तेज धूप और गर्मी में लगातार काम करने या फिर घूमने के कारण आंखों की बीमारियों में वृद्धि हो रही है। ऐसे में अपनी मर्जी से घरेलू उपचार का सहारा लेना अथवा किसी मेडिकल स्टोर से डॉक्टर के परामर्श के बगैर आई ड्रॉप आंखों में डालना नुकसान पहुंचा सकता है।   

     डॉक्टर जैन ने बताया कि गर्मी के मौसम में आंखों को बीमार होने से बचाने के लिए तेज धूप में सीधे बाहर निकलने के बजाय आंखों पर रंगीन चश्मा लगा कर ही निकलना चाहिए। मोटर साइकिल और स्कूटी चलाते समय हेलमेट पहनने से आंखों को गर्मी से बचाया जा सकता है। 

    नेत्र रोग विभागाध्यक्ष ने बताया कि आंखों में किसी तरह का कोई इन्फेक्शन होने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करके उनकी सलाह के अनुसार ही दवाओं का उपयोग करना चाहिए। आंखों में किरकिराहट और खुजली होने पर आंखों को रगड़ना नहीं चाहिए बल्कि साफ पानी के छींटे हल्के हाथ से मारने चाहिए। (न्यूज़लाइन ब्यूरो) 

गर्मी के मौसम में रखें सेहत का ध्यान

                (प्रमोद कुमार अग्रवाल) 

 सूरज की तपिश और गर्म हवाओं के चलते लोगों को पेट में दर्द, उल्टी, दस्त, चक्कर आना जैसी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। सरकारी अस्पतालों में मरीजों की संख्या में तेजी से वृद्धि हो रही है। ऐसे मौसम में सेहत का ध्यान रखना बहुत जरूरी है। 

    एसएन मेडिकल कॉलेज के इमरजेंसी प्रभारी डॉक्टर मनीष बंसल ने बताया कि गर्मी के इस मौसम में खानपान के मामले में लापरवाही बरतने पर डायरिया और फूड पॉयजनिंग के मरीजों की संख्या बढ़ी है। गर्मी के चलते ब्लडप्रेशर में उतार चढ़ाव होने से घबराहट और चक्कर आने की परेशानी मिल रही है। दस्त होने से शरीर में पानी की कमी के मरीज भी आ रहे हैं। 

   इमरजेंसी प्रभारी ने बताया कि जो लोग बाहर का दूषित खाना खा रहे हैं, उनमें उल्टी, दस्त और बुखार के लक्षण नजर आ रहे हैं। खासकर बच्चों में इसका ज्यादा असर मिल रहा है। ऐसे में लोगों को सेहत के प्रति सचेत रहने की आवश्यकता है। गर्मी के असर से बचने के लिए धूप में निकलते समय सिर को सूती कपड़े से ढककर निकलें। टाइट कपड़े पहनने के बजाय ढीले कपड़े पहनें। 
   डॉक्टर बंसल ने बताया कि गर्मी के मौसम में चाय, कॉफी, एल्कोहल, कोल्ड ड्रिंक, तंबाकू के सेवन से परहेज करें। तला हुआ और बाजार का अपदूषित भोजन न करें। तरबूज, खरबूज, ककड़ी, खीरा, प्याज, टमाटर, सलाद, संतरा, नारियल पानी, अंगूर, पपीता, रसबरी आदि का भरपूर सेवन करें। दोपहर के समय घर से बाहर जाने से बचें। दिन भर में चार से पांच लीटर पानी पिएं। (न्यूज़लाइन ब्यूरो) 

हॉस्पिटल जा रहे हैं तो रखें सावधानी, वरना हो सकता है संक्रमण

                     (प्रमोद कुमार अग्रवाल) 

हॉस्पिटल जाते समय पर्याप्त सावधानी बरतना बहुत जरूरी है। थोड़ी सी भी लापरवाही सेहत पर भारी पड़ सकती है। इसकी वजह है हॉस्पिटल के वातावरण में अदृश्य कीटाणु और विषाणु मौजूद रहते हैं जो टीबी, निमोनिया, खांसी, जुकाम, फंगल इंफेक्शन समेत दूसरी कई बीमारियों से स्वस्थ व्यक्ति को भी बीमार बना सकते हैं। यह बात एसएन मेडिकल कॉलेज में एयरबोर्न इंफेक्शन कंट्रोल विषय पर संपन्न हुई वर्कशॉप के दौरान विशेषज्ञ डॉक्टरों द्वारा अपने व्याख्यान में व्यक्त किए गए। 

    एसएन मेडिकल कॉलेज के माइक्रो-बायलॉजी विभाग के अध्यक्ष डॉक्टर अंकुर गोयल ने कहा कि हॉस्पिटल में एयरबोर्न और ब्लडबोर्न से संक्रमित होने का खतरा अधिक होता है। पहले से प्रयोग की जा चुकी सिरिंज या फिर अन्य दूषित चीजों के कारण एचआईवी, हेपेटाइटिस बी और हेपेटाइटिस सी का खतरा बना रहता है। वहीं आईसीयू, ओपीडी और वार्ड में कीटाणु व विषाणु अधिक होने के कारण लापरवाही के चलते मरीज और तीमारदार एकदूसरे से संक्रमित होने लगते हैं। 

  माइक्रो-बायलॉजी विभाग की डॉक्टर आरती अग्रवाल के कहा कि हॉस्पिटलों में कीटाणु और विषाणु मौजूद रहते हैं। जिन लोगों की इम्युनिटी पॉवर कमजोर होती है या फिर पहले से ही उन्हें कोई बीमारी होती है, जीवाणु और विषाणु के संपर्क में आकर टीबी, स्वाइन फ्ल्यू, फंगल इंफेक्शन, खांसी, जुकाम, बुखार आदि से पीड़ित हो सकते हैं। 

   वक्ष एवं क्षय रोग विभाग के अध्यक्ष डॉक्टर संतोष कुमार और डॉक्टर जीवी सिंह ने बताया कि टीबी के कीटाणुओं की वजह से मरीजों में मल्टी ड्रग रेसिस्टेंस की परेशानी बढ़ रही है। ऐसे मरीजों के नजदीक आने या इनके संपर्क में रहने वाले तीमारदार व लोग भी टीबी के कीटाणुओं के संपर्क में आकर मरीज हो सकते हैं। 

   डॉक्टर नीतू चौहान और डॉक्टर प्रज्ञा शाक्य ने बताया कि हॉस्पिटल आने से पहले और हॉस्पिटल में आने के दौरान समुचित सावधानी बरतना बहुत जरूरी है। मरीजों, तीमारदारों और हॉस्पिटल स्टाफ को अपने हाथों को समय समय पर सैनिटाइज करते रहने के साथ ही मुंह व नाक पर मास्क लगा कर रहना चाहिए। हॉस्पिटल के वार्ड, ओपीडी और आईसीयू में मेडिकल वेस्ट को मानक के अनुसार निस्तारण करने पर जोर देने की आवश्यकता है। 

   वर्कशॉप में डॉक्टरो ने सुझाव देते हुए कहा कि हॉस्पिटल को कीटाणुओं और विषाणुओं से मुक्त रखने के लिए अच्छी क्वालिटी के फिनायल से पोछा लगा कर स्वच्छ रखना चाहिए। मेडिकल स्टाफ को एयरबोर्न इंफेक्शन से बचाने के लिए ट्रेनिंग दी जाए। हॉस्पिटल के वार्ड, ओपीडी और आईसीयू में वेंटिलेशन की बेहतर व्यवस्था हो। हॉस्पिटल में आने वाले खांसी, जुकाम व बुखार के मरीजों और तीमारदारों के लिए अलग से जगह तय करना जरूरी है। हॉस्पिटल स्टाफ को अपने हाथों में ग्लब्स और चेहरे पर अच्छी क्वालिटी का मास्क पहन कर की रहना चाहिए। 

  वर्कशॉप में एसएन मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉक्टर प्रशांत गुप्ता, डॉक्टर टीपी सिंह, डॉक्टर बृजेश शर्मा, डॉक्टर संजीव लवानियां, डॉक्टर पारुल गर्ग, डॉक्टर अविजित कुमार, डॉक्टर अखिल प्रताप, डॉक्टर विकास कुमार आदि ने भी व्याख्यान दिए। (न्यूज़लाइन ब्यूरो) 



रविवार, 13 अप्रैल 2025

आगरा कैंट रेलवे स्टेशन पर यात्री थ्रीडी में देख सकेंगे ताज

   आगरा की ऐतिहासिक इमारतों के बारे में पर्यटकों को जानकारी देने के लिए आगरा कैंट रेलवे स्टेशन पर थ्रीडी वाल्वो फैन स्क्रीन लगाई गई है। इसमें विश्व प्रसिद्ध ताजमहल, आगरा फोर्ट, फतेहपुर सीकरी, सिकंदरा समेत अन्य ऐतिहासिक स्मारकों के थ्रीडी चित्र प्रदर्शित किए जाएंगे। 

    आगरा रेल मंडल की जन संपर्क अधिकारी प्रशस्ति श्रीवास्तव ने बताया कि आगरा कैंट पर उतरने वाले और आगरा कैंट से दूसरे शहर की ओर यात्रा करने वाले यात्रियों को थ्रीडी स्क्रीन की लाभ मिलेगा। रेलवे के सिग्नल विभाग द्वारा इस स्क्रीन को लगाया गया है। 
   उन्होंने बताया कि इसमें स्क्रीन के साथ कई पंखे भी लगे हुए हैं। इन पर ताजमहल, आगरा फोर्ट, सिकंदरा, फतेहपुर सीकरी और महताब बाग समेत अन्य स्मारकों की थ्रीडी इमेज दिखाई देती है। इससे पहले आगरा रेल मंडल के मथुरा जंक्शन रेलवे स्टेशन पर ऐसी ही स्क्रीन लगाई गई थी। -- प्रमोद कुमार अग्रवाल (न्यूज़लाइन ब्यूरो) 

नगर निगम की क्लीनिंग एंबुलेंस सेवा के लिए करें कॉल

   नगर निगम आगरा द्वारा शहरी क्षेत्रों में रेड और यलो स्पॉट की सफाई के लिए क्लीनिंग एंबुलेंस सेवा की शुरुआत की जा रही है। नगर निगम के कंट्रोल रूम नंबर 1533, 562, 299 और 0100 पर कॉल करके एंबुलेंस सेवा की सुविधा प्राप्त की जा सकती है। 

    सहायक नगर आयुक्त अशोक प्रिय गौतम ने बताया कि नगर निगम ने नगर के चारों जोन में एक एक स्पॉट एंबुलेंस वाहन की तैनाती की गई है। कोई भी नागरिक शहर के किसी भी स्थान पर रेड और यलो स्पॉट की सफाई के लिए फोन करके इस सुविधा का लाभ उठा सकता है। 
  फोन आने पर स्पॉट एंबुलेंस मौके पर पहुंच कर सफाई व धुलाई कर देगी। इसके अलावा क्षेत्र में वॉल पेंटिंग आदि करके उस जगह का सौंदर्यीकरण भी करा दिया जाएगा। -- प्रमोद कुमार अग्रवाल (न्यूज़लाइन ब्यूरो) 

ताजमहल से रामबाग तक धरोहर क्षेत्र तय, नियमानुसार ही हो सकेंगे निर्माण

   आगरा विकास प्राधिकरण के भौगोलिक सूचना प्रणाली आधारित नए मास्टर प्लान-2031 को उत्तर प्रदेश शासन द्वारा मंजूरी दे दी गई है। नए मास्टर प्लान में ताजमहल से रामबाग के बीच ताज धरोहर क्षेत्र तय किया गया है। इस क्षेत्र में निर्माण पर प्रतिबंध होंगे। 

    प्राधिकरण के नए मास्टर प्लान के अनुसार रामबाग से ताजमहल के बीच  500 मीटर की परिधि में कोई भी निर्माण या पुनः निर्माण नहीं किया जा सकेगा। वहीं 500 मीटर से 750 मीटर की परिधि में एक मंजिल भवन अधिकतम 3.75 मीटर ऊंचाई तक बनाने की अनुमति होगी। जबकि 750 मीटर से एक किलोमीटर के क्षेत्र में अधिकतम 7.50 मीटर की ऊंचाई वाले दो मंजिला भवन का निर्माण किया जा सकेगा। ताजमहल के पीछे पांच सौ मीटर की दूरी तक भवन और टावर नहीं बना सकेंगे। 
   नए मास्टर प्लान के मुताबिक 1000 मीटर से 1500 मीटर तक की परिधि में 19.60 मीटर तक की ऊंचाई के भवन और टावर के निर्माण की अनुमति होगी। ताज धरोहर क्षेत्र में जो निर्माण पहले से हो रहे हैं और उनके मानचित्र आगरा विकास प्राधिकरण से स्वीकृत हैं, उन्हें विस्तार की अनुमति नहीं दी जाएगी। ताज धरोहर क्षेत्र में ताजमहल परिसर, आगरा फोर्ट परिसर, मेहताब बाग/चारबाग, हुमायूं की मस्जिद, एत्माउद्दौला, चीनी का रोजा, काला गुंबद, रामबाग, जोहरा बाग आदि संरक्षित स्मारक शामिल हैं। -- प्रमोद कुमार अग्रवाल (न्यूज़लाइन ब्यूरो) 

आपसी रिश्तों को प्रभावित कर रहा है मानसिक विकार

   बार-बार हाथ धोना, किसी से मिलने या बाहर से आने के बाद नहाना, बार-बार मोबाइल फोन चेक करना, बार-बार लगाए गए ताले को खींच कर जांचना या फिर बार-बार रुपये गिनना मानसिक विकार के उदाहरण हैं। इन्हें स्वच्छता या सजगता समझ कर लापरवाह नहीं होना चाहिए। वरना मानसिक विकार गंभीर रूप ले सकता है।    आगरा के मानसिक स्वास्थ्य संस्थान के निदेशक प्रोफेसर दिनेश राठौर ने बताया कि एक सामान्य व्यक्ति जब इस तरह की हरकत करने लगे तो उसे हल्के में नहीं लेना चाहिए क्योंकि ये ओब्सेसिव कंपल्सिव डिसआर्डर (ओसीडी) होता है। इसमें मरीज को पता होता है कि बार-बार ऐसा करना गलत है, लेकिन वह लगातार करता रहता है क्योंकि ऐसा नहीं करने पर उसे बेचैनी व घबराहट होने लगती है। ऐसे मरीज अपने बच्चों पर भी ऐसा करने के लिए दबाव डालने लगते हैं।

   प्रोफेसर राठौर ने बताया कि मोबाइल फोन और ताला लगाकर बार-बार जांचने जैसे कार्य करने की स्थिति फियर ऑफ मिसिंग आउट (फोमो) कहलाती है। यह स्थिति फोन और इंटरनेट से जुड़े कार्य के दबाव के कारण तनाव होने से बनती है। बहुत से लोगों में इंटरनेट एडिक्शन की वजह से ये विकार पनपता है। युवाओं में ये विकार तेजी से फैल रहा है। मानसिक रोगों की चार मुख्य बीमारियों में ये भी शामिल है। 

   एसएन मेडिकल कॉलेज आगरा के मानसिक रोग विभाग के अध्यक्ष डॉक्टर विशाल सिन्हा ने बताया कि मानसिक विकारों के कारण मरीजों में बेचैनी, घबराहट, चिंता और चिड़चिड़ापन की समस्या बढ़ जाती है। पारिवारिक रिश्ते प्रभावित होने लगते हैं। यहां तक कि रिश्तों के टूटने की स्थिति आ जाती है। तनाव के चलते कामकाजी लोगों का कार्य और गुणवत्ता भी प्रभावित होने लगती है। ऐसे मरीजों को काउंसलिंग और दवाओं के सेवन से ठीक किया जा सकता है। 
     डॉक्टर सिन्हा ने बताया कि मानसिक विकारों से बचने के लिए अंधविश्वास से बाहर निकलने की जरूरत है क्योंकि बहुत से लोग इसे भूतप्रेत या ऊपरी हवा का असर बता कर टोना टोटका कराने में लग जाते हैं। ओसीडी या फोमो की समस्या होने पर देरी किए बगैर मानसिक रोग विशेषज्ञ को दिखाना चाहिए। मोबाइल फोन और इंटरनेट को जरूरत न बना कर सिर्फ कार्य तक ही सीमित रखने की कोशिश करनी चाहिए। तंबाकू, धूम्रपान, मद्यपान से बचने, भरपूर नींद लेने, ध्यान, योग, व्यायाम की आदत डालने के साथ ही पौष्टिक भोजन लेना चाहिए। -- प्रमोद कुमार अग्रवाल (न्यूज़लाइन ब्यूरो) 

गुरुवार, 3 अप्रैल 2025

चिकित्सकीय संस्थानों के पंजीकरण में डॉक्टरों के मोबाइल नंबर लिखना जरूरी

आगरा जिले के चिकित्सकीय संस्थानों के पंजीकरण और लाइसेंस के नवीनीकरण के लिए उत्तर प्रदेश शासन द्वारा नई व्यवस्था लागू करने के निर्देश दिए गए हैं। इन संस्थानों में अब डॉक्टरों के नाम के आगे उनके मोबाइल नंबर अनिवार्य रूप से लिखने होंगे। अगर किसी डॉक्टर के नाम के आगे संचालक का मोबाइल नंबर लिखा मिलेगा तो संस्थान का लाइसेंस निरस्त कर दिया जाएगा। एक अप्रैल से चिकित्सकीय संस्थानों के लाइसेंस के लिए ऑनलाइन प्रक्रिया शुरू हो गई है। 

     मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉक्टर अरुण श्रीवास्तव ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग द्वारा पिछले दिनों मारे गए छापों में कई चिकित्सकीय संस्थान और पैथोलॉजी लैब में डॉक्टर नहीं मिले। इस बार चिकित्सकीय संस्थानों के लाइसेंस के लिए डॉक्टर के नाम के आगे उनका मोबाइल नंबर लिखना अनिवार्य है। इससे निरीक्षण के समय टीम डॉक्टर से बात कर सकेगी। अब तक चिकित्सकीय संस्थानों के संचालक अपना या किसी दूसरे का मोबाइल नंबर दर्ज करा देते थे। जिससे निरीक्षण के वक्त डॉक्टर से सीधे संपर्क नहीं हो पाता था। 
    मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने बताया कि अब अगर किसी भी चिकित्सकीय संस्थान में डॉक्टर के नाम के आगे डॉक्टर का सही मोबाइल नंबर नहीं लिखा होगा या फिर डॉक्टर के मोबाइल नंबर की जगह संचालक का मोबाइल नंबर लिखा होगा तो संस्थान को लाइसेंस नहीं मिलेगा। इसके अलावा पुराने चिकित्सकीय संस्थान के लाइसेंस का नवीनीकरण नहीं करते हुए निरस्त कर दिया जाएगा। 
   मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने बताया कि सभी चिकित्सकीय संस्थानों में कार्य करने वाले डॉक्टर और पैरामेडिकल स्टाफ का हेल्थ पर्सनल रजिस्ट्री (एलपीआर) में पंजीकरण भी आवश्यक है। चिकित्सकीय संस्थानों के नए पंजीकरण के मानकों के अनुसार संस्थान के बोर्ड पर इलाज करने वाले डॉक्टर का नाम, डिग्री, विशेषज्ञता और मोबाइल नंबर लिखना अनिवार्य है। बोर्ड पर संस्थान में मिलने वाली चिकित्सकीय सेवाएं और उनके शुल्क का भी उल्लेख किया जाएगा। 
    मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने बताया कि चिकित्सकीय संस्थानों में डॉक्टरों की सुनिश्चित मौजूदगी के लिए संस्थान के गेट और चैंबर में सीसीटीवी कैमरे लगवाने होंगे। संस्थानों को अग्निशमन विभाग की एनओसी अथवा सेफ्टी ऑडिट रिपोर्ट प्राप्त करनी होगी। इसके अलावा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और बायोमेडिकल वेस्ट की एनओसी भी अनिवार्य है। सभी प्रपत्र पूरे करते हुए मानकों के अनुसार संचालित होने वाले चिकित्सकीय संस्थानों का ही पंजीकरण और लाइसेंस का नवीनीकरण किया जाएगा।--प्रमोद कुमार अग्रवाल (न्यूज़लाइन ब्यूरो) 

बीएसएनएल की आईएफ टीवी सेवा शुरू, फ्री में देख सकते हैं 650 टीवी चैनल

भारत संचार निगम लिमिटेड (बीएसएनएल) द्वारा आगरा में इंटरनेट प्रोटोकॉल आधारित आईएफ टीवी सेवा की शुरुआत की गई है। इसमें 650 टीवी चैनल और 18 ओटीटी फ्री दिए जाएंगे, जिनमें 300 प्रीमियम चैनल भी हैं। 

   बीएसएनएल के प्रधान महा प्रबंधक श्याम सिंह ने बताया कि पहली बार बीएसएनएल ने सस्ती केबल टीवी एवं ओटीटी प्लेटफार्म सेवा की शुरुआत की है। आगरा के साथ पूरे पश्चिमी उत्तर प्रदेश में बीएसएनएल के फाइबर उपभोक्ता बिना किसी सेट टॉप बॉक्स के 650 टीवी चैनल और 18 ओटीटी फ्री में देख सकेंगे। इसके लिए उपभोक्ताओं को बीएसएनएल आईएफटीवी एप स्काईप्रो को डाउनलोड करना होगा। 

   प्रधान महा प्रबंधक ने बताया कि बीएसएनएल की आईएफटीवी सेवा का लाभ उठाने के लिए बीएसएनएल एफटीटीएच उपभोक्ता बीएसएनएल एफएमएस पोर्टल पर जाएं और संबंधित मोबाइल नंबर का उपयोग करते हुए अपना रजिस्ट्रेशन करें। प्ले स्टोर से स्काईप्रो टीवी एप डाउनलोड और इंस्टॉल करके फ्री में टीवी चैनल और ओटीटी का आनंद लें। जिन उपभोक्ताओं के पास स्मार्ट टीवी नहीं हैं, वे फायर स्टिक का उपयोग करके इस सुविधा का लाभ उठा सकते हैं।-- प्रमोद कुमार अग्रवाल (न्यूज़लाइन ब्यूरो) 

पुलिस व परिवहन विभाग बनाएंगे एसओपी

आगरा शहर की सड़कों पर ई-रिक्शा की भरमार होने के कारण जाम लगने और सड़क दुर्घटनाएं होने को नियंत्रित करने के लिए पुलिस एवं परिवहन विभाग ने ई-रिक्शा संचालन के लिए स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (एसओपी) बनाने का निर्णय लिया है। मंडलीय सड़क सुरक्षा समिति के अध्यक्ष एवं मंडलायुक्त शैलेंद्र कुमार सिंह ने पुलिस और परिवहन विभाग से प्रस्ताव मांगा है। 

     मंडलायुक्त ने बताया कि शहर की लाइफ लाइन महात्मा गांधी रोड पर जाम की समस्या से निजात के लिए तीन पहिया वाहनों पर प्रतिबंध लगाया गया था। लेकिन, प्रतिबंध का असर ज्यादा नहीं दिखाई दिया। इसलिए अब ऑटो और ई-रिक्शा के नाबालिग चालक प्रतिबंधित किए गए हैं। इसके अलावा पुलिस और परिवहन विभाग को ई-रिक्शा व ऑटो रिक्शा के लिए रुट निर्धारित करने तथा इनके व्यवस्थित संचालन के लिए प्रक्रिया तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं। 
    मंडलायुक्त ने बताया कि हिट एंड रन के मामलों में दुर्घटना के शिकार गैर जिलों व राज्यों के पीड़ितों की आर्थिक सहायता के लिए भी बीमा कंपनियों से प्रारूप मांगे गए हैं। परिवहन विभाग इस संबंध में बीमा कंपनियों से समन्वय करेगा। हिट एंड रन दुर्घटना के मामलों में मिलने वाले मुआवजे के बारे में लोगों को जागरूक करने के निर्देश पुलिस और परिवहन विभाग को दिए गए हैं।--प्रमोद कुमार अग्रवाल (न्यूज़लाइन ब्यूरो) 

नकली गुटखा के सेवन से कैंसर का खतरा

  बाजार में बिकने वाले नकली गुटखा और पान मसाला का सेवन करने से कैंसर का खतरा हो सकता है। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन की जांच में गुटखा और पान मसाला के नकली होने की जानकारी मिली है। इनमें 70 से अधिक खतरनाक रसायन मिले हैं। 

   आगरा के खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन के सहायक आयुक्त खाद्य शशांक त्रिपाठी ने बताया कि विभाग द्वारा बाजार में बिकने वाले गुटखा और पान मसाला के नमूने लेकर लैब में जांच कराई गई थी। लैब की जांच में गुटखा और पान मसाला घटिया और नकली मिले। जांच में कई खतरनाक रसायन मिले, जो सेहत के लिए काफी नुकसानदायी हैं। नकली गुटखा और पान मसाला के विक्रेता के खिलाफ केस दर्ज कराते हुए जुर्माना भी लगाया गया। 

    एसएन मेडिकल कॉलेज आगरा के कैंसर रोग विभाग की अध्यक्ष डॉक्टर सुरभि गुप्ता ने बताया कि तंबाकू, पान मसाला, गुटखा में 65 से अधिक  खतरनाक रसायन होते हैं। इससे मुंह, गर्दन, गुर्दा, पित्त की थैली में कैंसर होने का कई गुना ज्यादा खतरा बढ़ जाता है। कैंसर विभाग की ओपीडी में आने वाले मरीजों में 25-30 साल की उम्र के मरीज भी शामिल हैं। बचाव के लिए लोगों को तंबाकू से निर्मित सामग्री का पूरी तरह उपयोग बंद कर देना चाहिए।-- प्रमोद कुमार अग्रवाल (न्यूज़लाइन ब्यूरो) 

अब कंफर्म टिकट पर ऑनलाइन कर सकेंगे सामान की बुकिंग

आगरा (प्रमोद कुमार अग्रवाल)। ट्रेन में कंफर्म टिकट पर यात्रा करने वाले यात्री अब अपने साथ ट्रेन के डिब्बे में ले जाने वाले निर्धारित वजन तक ...