बार-बार हाथ धोना, किसी से मिलने या बाहर से आने के बाद नहाना, बार-बार मोबाइल फोन चेक करना, बार-बार लगाए गए ताले को खींच कर जांचना या फिर बार-बार रुपये गिनना मानसिक विकार के उदाहरण हैं। इन्हें स्वच्छता या सजगता समझ कर लापरवाह नहीं होना चाहिए। वरना मानसिक विकार गंभीर रूप ले सकता है। आगरा के मानसिक स्वास्थ्य संस्थान के निदेशक प्रोफेसर दिनेश राठौर ने बताया कि एक सामान्य व्यक्ति जब इस तरह की हरकत करने लगे तो उसे हल्के में नहीं लेना चाहिए क्योंकि ये ओब्सेसिव कंपल्सिव डिसआर्डर (ओसीडी) होता है। इसमें मरीज को पता होता है कि बार-बार ऐसा करना गलत है, लेकिन वह लगातार करता रहता है क्योंकि ऐसा नहीं करने पर उसे बेचैनी व घबराहट होने लगती है। ऐसे मरीज अपने बच्चों पर भी ऐसा करने के लिए दबाव डालने लगते हैं।
प्रोफेसर राठौर ने बताया कि मोबाइल फोन और ताला लगाकर बार-बार जांचने जैसे कार्य करने की स्थिति फियर ऑफ मिसिंग आउट (फोमो) कहलाती है। यह स्थिति फोन और इंटरनेट से जुड़े कार्य के दबाव के कारण तनाव होने से बनती है। बहुत से लोगों में इंटरनेट एडिक्शन की वजह से ये विकार पनपता है। युवाओं में ये विकार तेजी से फैल रहा है। मानसिक रोगों की चार मुख्य बीमारियों में ये भी शामिल है।
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