बुधवार, 10 जनवरी 2024

गलत न हो दुकान मालिक के बैठने की दिश

किसी दुकान या व्यावसायिक प्रतिष्ठान के मालिक (स्वामी) को कमरे की दीवारों के कोनों (कॉर्नर) की तरफ पीठ करके या कमरे के बीचोबीच या बीम के नीचे नहीं बैठना चाहिए, अन्यथा मालिक को शारीरिक व मानसिक रोग और आर्थिक समस्याओं से जूझना पड़ सकता है।-- प्रमोद कुमार अग्रवाल 

शनिवार, 11 नवंबर 2023

वास्तु अनुरूप पूजन से प्रसन्न होते हैं श्री लक्ष्मी गणेश

धार्मिक मान्यता के अनुसार देवी महालक्ष्मी समस्त प्रकार की चल व अचल संपत्ति, सिद्धि एवं निधियों की अधिष्ठात्री मानी जाती हैं। वहीं भगवान गणेश को बुद्धि, शुभ लाभ एवं सिद्धिदायक के साथ-साथ अमंगल और सभी विघ्नों के नाशक देव के रूप में स्वीकार किया गया है। इसलिए ज्योति पर्व दीपावली पर ऋद्धि और सिद्धि प्राप्त करने के लिए भगवान गणेश और महालक्ष्मी जी की विधिवत पूजा-अर्चना करने का विधान है। 

   कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या को दीपावली का पावन पर्व हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। इस दिन घरों के साथ ही सभी औद्योगिक प्रतिष्ठानों, दुकानों और व्यावसायिक संस्थानों में शुभ मुहूर्त में लक्ष्मी गणेश जी की पूजा की जाती है। दीपावली के दिन पूजा करते समय अगर वास्तु शास्त्र के नियमों का पालन किया जाए तो पूजा निष्फल नहीं जाती और देवी-देवताओं का भरपूर आशीर्वाद मिलता है। दीपावली के दिन वास्तु अनुरूप पूजा के लिए यहां दी गई बातों का ध्यान रखना चाहिए : 
* पूजा स्थल सदैव पूर्व या उत्तर दिशा अथवा ईशान कोण में रखना चाहिए। जिससे कि पूजा करते समय मुख पूर्व या उत्तर दिशा में रहे। दक्षिण दिशा में मुख करके कभी भी पूजन नहीं करना चाहिए। 
* पूजा स्थल को गंगा जल से पवित्र करते हुए हल्दी व आटे से चौक पूरना चाहिए। इसके बाद वहां चौकी या ऊंचे आसन पर नया लाल वस्त्र बिछाकर लक्ष्मी और गणेश की मूर्ति स्थापित करनी चाहिए। 
* पूजा स्थल पर ईशान कोण की तरफ शुद्ध जल से भरा कलश और मध्य में एक थाली में रुपये, चांदी के सिक्के, रोली, अक्षत, खील, बतासे, मिष्ठान आदि रखने चाहिए। जबकि धूपबत्ती और तेल के दीपक को दक्षिण दिशा की तरफ रखना चाहिए। शुद्ध घी का दीपक और जल से भरा शंख मध्य में रख सकते हैं। 
* दीपावली के दिन अपनी श्रद्धा के अनुसार मिट्टी के  11, 21, 31 या 51 दीपक शुद्ध सरसों के तेल में जलाकर घर या व्यापारिक स्थल पर सभी दिशाओं में रखने चाहिए। इसके अलावा शुद्ध घी का दीपक तुलसी जी के पौधे पर भी प्रज्ज्वलित करना चाहिए। 
* महालक्ष्मी और गणेश जी के पूजन में दूर्वा, कमल, चमेली, चंपा, गुलाब, बेला, गेंदा आदि के पुष्पों को ही लेना चाहिए। तुलसी, आक, मदार, मालती आदि के पुष्पों से महालक्ष्मी जी का पूजन निषिद्ध माना गया है। 
* शुभ मुहूर्त में लक्ष्मी और गणेश जी की पूजा के समय आठों दिशाओं में आठों सिद्धियों की पूजा कुंकुम व अक्षत से करते हुए निम्न मंत्र जाप करने चाहिए। 
पूर्व दिशा के लिए : ऊँ अणिम्ने नम:
अग्निकोण के लिए : ऊँ माहम्ने नम:
दक्षिण दिशा के लिए : ऊँ गरिम्णे नम:
नैऋत्य कोण के लिए : ऊँ लघिम्ने नम:
पश्चिम दिशा के लिए : ऊँप्राप्त्ये नम:
वायव्य कोण के लिए : ऊँ प्राकाम्ये नम:
उत्तर दिशा के लिए : ऊँ ईशिताये नम:
ईशान कोण के लिए : ऊँ वाशितायै नम:
* महालक्ष्मी जी के पूजन के समय ही उनके आठ स्वरूपों की पूजा करते हुए उनके मंत्रों का उच्चारण भी पूर्व या उत्तर दिशा में मुख करते हुए कर सकते हैं। इन आठ स्वरूपों के नाम इस प्रकार हैं-आद्य लक्ष्मी, विद्या लक्ष्मी सौभाग्य लक्ष्मी, अमृत लक्ष्मी, काक लक्ष्मी, सत्य लक्ष्मी, भोग लक्ष्मी और योग लक्ष्मी। 
* दीपावली पर पूजन संपन्न होने के बाद एक लाल रंग के नए चौकोर वस्त्र या थैली में पांच हल्दी की गांठ, साबुत धनिया, पांच कमलगट्टा, अक्षत, दूर्वा और पांच सिक्के रखने चाहिए। इसके बाद इसे धन रखने वाली तिजोरी या आलमारी में रख देना चाहिए। ध्यान रखना चाहिए कि जिस तिजोरी या आलमारी में इस थैली को रखा जाए, वह पूर्व या उत्तर दिशा की तरफ ही खुलनी चाहिए। 
---- वास्तु आचार्य प्रमोद कुमार अग्रवाल, आगरा

शुक्रवार, 14 अप्रैल 2023

किचन के लिए उपयोगी वास्तु टिप्स

* वास्तु शास्त्र के अनुसार किचन (रसोई) के लिए सही दिशा दक्षिण-पूर्व यानि आग्नेय कोण है। जगह की कमी हो तो किसी अन्य दिशा में बनी किचन में गैस चूल्हा हमेशा आग्नेय कोण में ही रखें। किचन में पीने का पानी उत्तर या पूर्व दिशा की तरफ रखना चाहिए। 

* भोजन बनाते समय गृहणी का चेहरा पूर्व दिशा में रहे। दक्षिण दिशा में चेहरा होने से स्वास्थ्य खराब होने की संभावना रहती है। 

* रात्रि में किचन में झूठे बर्तन छोड़ना वास्तु दोष है। सोने से पहले बर्तन मांज कर रखने चाहिए। ऐसा संभव न हो तो झूठे बर्तनों को पानी से धोकर रख दें।

* रात में किचन साफ करने के बाद एक तांबे के बर्तन में पानी भरकर पूर्व दिशा में रखें और सुबह उस पानी को पौधों में डाल दें। ऐसा करने से किचन के वास्तु दोषों के कारण नकारात्मक प्रभाव कम हो जाते हैं।-- प्रमोद कुमार अग्रवाल, आगरा

बुधवार, 21 सितंबर 2022

अंडरग्राउंड वाटर टैंक की सही दिशा

 अडरग्राउंड वाटर टैंक, हैंडपंप और समर के लिए पूर्व दिशा, उत्तरी ईशान कोण या पूर्वी ईशान कोण को सबसे उत्तम माना गया है। इससे उस वास्तु में सुख, संपत्ति, संतान, सम्मान और आरोग्य सुख की प्राप्ति होती है। 

  दक्षिण व पश्चिम दिशा, पश्चिमी या उत्तरी वायव्य कोण, पूर्वी या दक्षिण नैऋत्य कोण तथा वास्तु के बीचों बीच बोरिंग, हैंडपंप, कुआं, अंडरग्राउंड वाटर टैंक अथवा किसी भी प्रकार का कोई गड्ढा होना वास्तु दोष है। इसके कारण शारीरिक व मानसिक रोग, मुकदमेबाजी, चोरी, अकाल मृत्यु आदि समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। -- प्रमोद कुमार अग्रवाल, ज्योतिष-वास्तु लेखक एवं सलाहकार।

आग्नेय कोण में रखें गैस चूल्हा

किचन में दक्षिण-पश्चिम दिशा में खाना पकाने के लिए गैस का चूल्हा, स्टोव, अंगीठी, ओवन, इलेक्ट्रिक चूल्हा आदि का होना वास्तु दोष है। इसके कारण घर में रहने वाली महिलाओं का स्वास्थ्य खराब होने की संभावना बनी रहती है। यदि ऐसा है तो किचन में चूल्हा आदि को दक्षिण-पूर्व दिशा (आग्नेय कोण) की तरफ शिफ्ट कर देना चाहिए।--प्रमोद कुमार अग्रवाल, वास्तु आचार्य एवं लेखक, आगरा।

प्रवेश द्वार पर मांगलिक चिह्न

 भवन के प्रवेश द्वार पर हल्दी और चावल के आटे की पीठी से हाथ को मांगलिक चिंह के रूप में छापा जाता है। हाथ कर्म का प्रतीक है जबकि हाथ की चारों अंगुलियां व अंगूठा पंच तत्वों (जल, वायु, अग्नि, पृथ्वी व आकाश) का द्योतक है। माना जाता है कि इससे घर में सुख, शांति, आरोग्य और आपसी सद्भाव बना रहता है।-प्रमोद कुमार अग्रवाल, ज्योतिष-वास्तु लेखक एवं सलाहकार, आगरा। 

रविवार, 18 सितंबर 2022

ऐसे फोटो न लगाएं....

 घर के किसी भी कमरे में युद्ध के फोटो, इंद्रजाल के समान काल्पनिक फोटो, राक्षस, पहाड़ व जंगल के फोटो, नग्न या रोते हुए बच्चे, महिला व पुरुष के फोटो, हिंसक व जंगली जानवरों के फोटो अथवा गरीबी या भयानक स्थिति को दर्शाने वाले फोटो कभी भी नहीं लगाने चाहिए। -- प्रमोद कुमार अग्रवाल, वास्तु आचार्य एवं लेखक,आगरा। 

उत्तर पूर्व दिशा होती है महत्वपूर्ण

 घर की उत्तर-पूर्व दिशा को महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दिशा में भूमिगत जल स्रोत,बरामदा,पूजा घर,मंदिर,पोर्टिको,खुली जगह,बेसमेंट,बालकनी आदि बनवा सकते हैं। लेकिन इस दिशा में कोई भी भारी निर्माण,लैट्रिन,दीवार,सीढ़ी आदि के होने से धन,स्वास्थ्य व संतान संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।- प्रमोद कुमार अग्रवाल, वास्तु आचार्य एवं ज्योतिष-वास्तु लेखक, आगरा। 

स्वास्तिक का प्रयोग होता है शुभ

 प्राचीन काल से ही स्वास्तिक का प्रयोग मांगलिक चिह्न के रूप में किया जाता रहा है। यह गणेश जी के लिप्यात्मक स्वरूप के अलावा चारों दिशाओं का प्रतीक भी है। मकान के मुख्य द्वार के दोनों ओर शुद्ध घी व सिंदूर मिलाकर स्वास्तिक चिह्न बनाने से वहां नकारात्मक ऊर्जा से बचाव होता है और परिवार में सुख-समृद्धि व शांति बनी रहती है।- वास्तु आचार्य एवं लेखक प्रमोद कुमार अग्रवाल, आगरा। 

व्यापार में आर्थिक लाभ के लिए करें ऐसा

 किसी भी दुकान, ऑफिस अथवा व्यापारिक स्थल में बैठते समय अपना मुख उत्तर पूर्व दिशा की तरफ रखना चाहिए। इसके साथ-साथ आलमारी, फर्नीचर, रिकॉर्ड, भारी सामान आदि हमेशा पश्चिम व दक्षिण दिशा में ही रखना चाहिए। ऐसा करने से आर्थिक लाभ की स्थिति बनती है और आश्चर्यजनक प्रगति देखने को मिलती है।- प्रमोद कुमार अग्रवाल, ज्योतिष-वास्तु लेखक एवं सलाहकार, आगरा। 

उत्तर पूर्व में फर्श रहे नीचा

 घर की उत्तर-पूर्व दिशा में बने फर्श का दक्षिण-पश्चिम में बने फर्श से कुछ ऊंचा होना वास्तु दोष है। इस दोष से बचने के लिए दक्षिण-पश्चिम के फर्श को ऊंचा कराएं अथवा पश्चिम दिशा के कोने में एक चबूतरा बनवाएं।-- प्रमोद कुमार अग्रवाल, ज्योतिष-वास्तु लेखक एवं सलाहकार, आगरा। 

दरवाजे पर मांगलिक चिह्न

 भवन के प्रवेश द्वार पर हल्दी और चावल के आटे की पीठी से हाथ को मांगलिक चिह्न के रूप में छापा जाता है। हाथ कर्म का प्रतीक है जबकि हाथ की चारों अंगुलियां व अंगूठा पंच तत्वों (जल, वायु, अग्नि, पृथ्वी व आकाश) का द्योतक है। माना जाता है कि इससे घर में सुख, शांति, आरोग्य और आपसी सद्भाव बना रहता है।-प्रमोद कुमार अग्रवाल, ज्योतिष-वास्तु लेखक एवं सलाहकार, आगरा। 

शनिवार, 17 सितंबर 2022

किराये के मकान में वास्तु

 किराये के मकान में वास्तु के अनुसार बदलाव करना संभव नहीं होता। इसलिए जहां तक संभव हो मंदिर ईशान कोण में, गैस चूल्हा आग्नेय कोण में, भारी सामान दक्षिण पश्चिम में और पलंग का सिरहाना दक्षिण या पश्चिम दिशा में रखना चाहिए। एक कमरे के मकान में भी यही व्यवस्था करने से बहुत सी समस्याओं का समाधान होता है।- प्रमोद कुमार अग्रवाल, ज्याोतिष-वास्तु लेखक एवं सलाहकार, आगरा। 

उत्तर पूर्व में रहे मुख

 किसी भी दुकान, ऑफिस अथवा व्यापारिक स्थल में बैठते समय अपना मुख उत्तर पूर्व दिशा की तरफ रखना चाहिए। इसके साथ-साथ आलमारी, फर्नीचर, रिकॉर्ड, भारी सामान आदि हमेशा पश्चिम व दक्षिण दिशा में ही रखना चाहिए। ऐसा करने से आर्थिक लाभ की स्थिति बनती है और आश्चर्यजनक प्रगति देखने को मिलती है।- प्रमोद कुमार अग्रवाल, ज्योतिष-वास्तु लेखक एवं सलाहकार, आगरा। 

दक्षिण पश्चिम में हो ऊंचा फर्श

 घर की उत्तर-पूर्व दिशा में बने फर्श का दक्षिण-पश्चिम में बने फर्श से कुछ ऊंचा होना वास्तु दोष है। इस दोष से बचने के लिए दक्षिण-पश्चिम के फर्श को ऊंचा कराएं अथवा पश्चिम दिशा के कोने में एक चबूतरा बनवाएं।-- प्रमोद कुमार अग्रवाल, ज्योतिष-वास्तु लेखक एवं सलाहकार, आगरा। 

जल का दान करना है शुभ

 वास्तु शास्त्र के अनुसार पृथ्वी, जल, वायु, अग्नि और आकाश को पंचतत्व माना गया है। इनमें से जल जीवन का अमृत है। जल का दान करना शुभ होता है। इसलिए जितना संभव हो, जल का दान करते रहें। -- प्रमोद कुमार अग्रवाल, ज्योतिष-वास्तु लेखक एवं सलाहकार, आगरा। 

बाथरूम व लैट्रीन के लिए दिशा

 वास्तु शास्त्र के अनुसार घर के अंदर पूर्व या उत्तर दिशा में बाथरूम (केवल नहाने के लिए), लैट्रीन (शौचालय) पश्चिम या वायव्य कोण से हटकर उत्तर में या दक्षिण दिशा में बनवा सकते हैं। बाथरूम व लैट्रीन, दोनों एक साथ पश्चिमी वायव्य कोण व पूर्वी आग्नेय कोण में बनाए जा सकते हैं। -- प्रमोद कुमार अग्रवाल, ज्योतिष-वास्तु लेखक एवं सलाहकार, आगरा। 

अनाज रखने के लिए स्टोर की सही दिशा

 मकान में अगर अनाज या खाद्य पदार्थ रखने के लिए अलग से स्टोर बनाना हो तो, उत्तर-पश्चिम विदिशा (वायव्य कोण) शुभ होती है। इससे घर में अन्न आदि की कमी नहीं रहती। ऐसे स्टोर को कभी भी खाली नहीं छोड़ना चाहिए बल्कि स्टोर में थोड़ा बहुत अन्न या अन्य खाद्य पदार्थ अवश्य रखने चाहिए। ---- प्रमोद कुमार अग्रवाल, ज्योतिष-वास्तु लेखक एवं सलाहकार, आगरा। 

गलत दिशा में किचन हो तो करें उपाय

अगर किचन आग्नेय कोण के अलावा किसी दूसरी जगह है तो किचन में गैस या स्टोव आदि को आग्नेय कोण में रखें और रात में किचन की सफाई के बाद उत्तर दिशा की दीवार के पास तांबे के लोटे में पानी भरकर रखें। दूसरे दिन यानि सुबह उस पानी को पौधों में डाल दें। --- प्रमोद कुमार अग्रवाल, ज्योतिष-वास्तु लेखक एवं सलाहकार, आगरा।

न हो गड्ढा या कुआं

 किसी भवन के नैऋत्य कोण (दक्षिण-पश्चिम कोना), आग्नेय कोण (दक्षिण-पूर्व कोना) और वायव्य कोण (उत्तर-पश्चिम कोना) की दिशा में गड्ढा या कुआं नहीं होना चाहिए। ऐसा होने से उस भवन में रहने वाले लोगों में आपसी कलह और अशांति बनी रहती है। -- प्रमोद कुमार अग्रवाल, वास्तु आचार्य एवं ज्योतिष-वास्तु लेखक, आगरा। 

हृदय रोग से बचाव के लिए सक्रिय रहना जरूरी

 हृदय रोग का खतरा कम करने के लिए दिनभर की छोटी-छोटी गतिविधियों का ध्यान रखना आवश्यक है। विशेषज्ञों के अनुसार शारीरिक सक्रियता से हृदय रोग का...