* वास्तु शास्त्र के अनुसार किचन (रसोई) के लिए सही दिशा दक्षिण-पूर्व यानि आग्नेय कोण है। जगह की कमी हो तो किसी अन्य दिशा में बनी किचन में गैस चूल्हा हमेशा आग्नेय कोण में ही रखें। किचन में पीने का पानी उत्तर या पूर्व दिशा की तरफ रखना चाहिए।
* भोजन बनाते समय गृहणी का चेहरा पूर्व दिशा में रहे। दक्षिण दिशा में चेहरा होने से स्वास्थ्य खराब होने की संभावना रहती है।
* रात्रि में किचन में झूठे बर्तन छोड़ना वास्तु दोष है। सोने से पहले बर्तन मांज कर रखने चाहिए। ऐसा संभव न हो तो झूठे बर्तनों को पानी से धोकर रख दें।
* रात में किचन साफ करने के बाद एक तांबे के बर्तन में पानी भरकर पूर्व दिशा में रखें और सुबह उस पानी को पौधों में डाल दें। ऐसा करने से किचन के वास्तु दोषों के कारण नकारात्मक प्रभाव कम हो जाते हैं।-- प्रमोद कुमार अग्रवाल, आगरा
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