सोमवार, 5 अक्टूबर 2026

इलाहाबाद हाईकोर्ट के पांच महत्वपूर्ण आदेश-सार

 @ इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति अतुल श्रीधरन और न्यायमूर्ति अचल सचदेव की खंडपीठ ने कहा कि जब किसी मामले में मुख्य चश्मदीद की मौजूदगी ही संदिग्ध है तो उसकी मौखिक गवाही के आधार पर किसी को आजीवन कारावास की सजा नहीं दी जा सकती।

@ इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति सौरभ श्याम शमशेरी की एकल पीठ ने कहा है कि मौजूदा परिस्थितियों में आम जनता के हित और सरकारी अस्पतालों की जरूरतों को देखते हुए योग्य डॉक्टरों का कुछ समय सरकारी अस्पताल में सेवा देना आवश्यक है।

@ इलाहाबाद हाईकोर्ट की न्यायमूर्ति मंजू रानी चौहान की एकल पीठ ने कहा कि पुरानी नियुक्ति रद्द होने की जानकारी न देना सेवा समाप्ति का आधार नहीं हो सकता।

@ इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायामूर्ति सौरभ श्याम शमशेरी की एकल पीठ ने कहा कि 240 दिन की निरंतर सेवा साबित करने की प्राथमिक जिम्मेदारी श्रमिक की है। यदि श्रमिक इसे साबित नहीं कर पाता है तो उसकी पुनः बहाली और दो तिहाई पिछला वेतन दिए जाने का आदेश खारिज होने योग्य है।

@ इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति जय कृष्ण उपाध्याय की एकल पीठ ने कहा कि शारीरिक रूप से स्वस्थ पति बेरोजगारी का बहाना बनाकर पत्नी को भरण-पोषण देने से मना नहीं कर सकता। वह पत्नी को जीवनयापन के लिए दर-दर भटकने के लिए मजबूर नहीं कर सकता। -- प्रमोद कुमार अग्रवाल (न्यूज़लाइन ब्यूरो)

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सुप्रीम कोर्ट एवं हाईकोर्ट्स के महत्वपूर्ण आदेश-सार

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