आगरा (प्रमोद कुमार अग्रवाल)। लगातार हेडफोन और ईयरबड्स लगाकर तेज आवाज में टहलते या बस अथवा ट्रेन में यात्रा करते हुए गाने सुनना सेहत के लिए नुकसानदेह साबित हो रहा है। ऐसी स्थिति से करीब 12 प्रतिशत युवाओं को कान की बीमारी हो रही है।
नाक, कान और गला रोग विशेषज्ञ डॉक्टरों की मानें तो 40 से 60 डेसिबल आवाज ही कानों के लिए बेहतर होती है। इससे अधिक आवाज कानों के साथ-साथ दिमाग के लिए भी नुकसान देह है। इसकी वजह से मुख्य रूप से कान की विभिन्न बीमारियों के अलावा माइग्रेन एवं मेमोरी लॉस की समस्या बढ़ रही है।
डॉक्टरों के अनुसार वाहनों की आवाज, टीवी व मोबाइल, डीजे, निर्माण कार्य सहित अन्य कारणों से घर के बाहर से औसतन 60 से 80 डेसिबल तक आवाज रहती है। इससे कानों की समस्या बढ़ रही है। वहीं ईयरबड्स और हेडफोन का लगातार प्रयोग बच्चों और युवाओं में सुनने की क्षमता पर असर डाल रहा है।
देखने में आता है कि बच्चे एवं युवा 90 से 100 डेसिबल तक आवाज करके 4 से 6 घंटे तक लगातार गाने सुनते हैं। जिससे ऊंचा सुनने, सिर दर्द, सिर में भारीपन, चक्कर आना, थकावट, दोहरी आवाज़ सुनाई पड़ना, चिड़चिड़ापन, नींद नहीं आना और तेज आवाज में बोलने की परेशानी होने लगती है। लंबे समय तक तेज आवाज में गाने सुनने से कान में दर्द रहना, सूजन होना, सीटी की आवाज आना और याद करने की क्षमता प्रभावित होना जैसे लक्षण भी हो सकते हैं।
डॉक्टरों के अनुसार बचाव के लिए ईयरबड्स का प्रयोग नहीं करना चाहिए। आवश्यक हो तो आवाज को 60 डेसिबल से कम रखना चाहिए। मोबाइल, टीवी और म्यूजिक सिस्टम की आवाज कम रखें और लंबे समय तक इनका उपयोग न करें। अगर रोड के पास घर है तो खिड़कियों के शीशे एवं दरवाजे बंद रखें। सुबह टहलते हुए या यात्रा करते समय भी ईयरबड्स और हेडफोन का प्रयोग न करें। अगर कान या मस्तिष्क संबंधी कोई समस्या हो तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। (न्यूज़लाइन ब्यूरो)
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