इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति अब्दुल शाहिद की एकल पीठ ने कहा कि यौन अपराध के मामले में पीड़िता की गवाही महत्वपूर्ण है, लेकिन उसे बिना जांचे परखे अंतिम सत्य नहीं माना जा सकता। उसकी गवाही की विश्वसनीयता, सच्चाई और परिस्थितियों के अनुरूप होने का आकलन करना जरूरी है।
पीठ ने इस टिप्पणी के साथ अभियोजन पक्ष के साक्ष्यों में विरोधाभास, प्रथम सूचना रिपोर्ट में देरी और गवाहों के बयानों में विसंगतियां पाते हुए तीन आरोपियों को सामूहिक दुष्कर्म के मामले में बरी कर दिया। फतेहपुर के बिंदी क्षेत्र से संबंधित इस मामले में अवर न्यायालय द्वारा अप्रैल 1985 में आरोपियों को दोषी ठहराते हुए 10 साल की सजा सुनाई गई थी। इसके खिलाफ आरोपियों ने हाईकोर्ट में अपील की थी। (न्यूज़लाइन ब्यूरो)
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