आगरा (प्रमोद कुमार अग्रवाल)। बदलते मौसम व भूख-प्यास के कारण कुत्ते और बंदर के हिंसक होने से वे लोगों पर हमला कर घायल कर रहे हैं। जिला अस्पताल में एंटी रैबीज वैक्सीन लगवाने आ रहे मरीजों के मल्टीपल घाव मिल रहे हैं। इनमें बच्चे और बुजुर्गों से की संख्या अधिक है। पिछले दो सप्ताह से जिला अस्पताल में 15 फीसदी तक मरीज बढ़ गए हैं ।
प्रमुख अधीक्षिका डॉक्टर सुनीता राठौर ने बताया कि जिला अस्पताल में रोजाना औसतन 550 मरीज एंटी रैबीज वैक्सीन लगवाने आते हैं। इनमें नए मरीजों की संख्या करीब 250 हैं। बाकी के मरीज विभिन्न डोज लगवाने आ रहे हैं।सबसे ज्यादा बच्चे और बुजुर्गों की संख्या है। कुत्ते और बंदरों के हिंसक होने से मरीजों के पेट, कमर, छाती, गर्दन और चेहरे पर भी घाव पाए गए हैं। इनको एंटी रैबीज वैक्सीन के साथ सीरम की डोज भी दी जा रही है। हालत गंभीर होने पर दो-तीन मरीजों को भरती भी करने की नौबत आ रही है।
डॉक्टर राठौर ने बताया कि गलियों, सड़क और चौराहों पर घूमने वाले कुत्ते अधिक हमलावर हैं। इसके अलावा बंदर, बिल्ली, चूहा, सियार, घोड़े व गधे द्वारा भी लोगों को काटा गया है। कुत्ता काटने के मरीजों की संख्या सबसे ज्यादा है।बढ़ते मरीजों को देखते हुए एंटी रैबीज वैक्सीन का स्टाॅक भी कर लिया गया है।
एंटी रेबीज वैक्सीन के नोडल अधिकारी डॉक्टर मोहित बंसल ने बताया कि भूख, प्यास और बदलते मौसम में कुत्ते और बंदर हिंसक हो कर हमला करते है। ऐसे में कई मरीज घाव पर नमक व मिर्च लगाने समेत अन्य घरेलू उपचार करते हैं। यह बेहद खतरनाक है। इससे वायरस खून में तेजी से प्रवाहित होता है, इससे बीमारी और बढ़ सकती है। कुत्ते और बंदर के काटने के 24 घंटे के अंदर एंटी रेबीज वैक्सीन लगवाना जरूरी है।
डॉक्टर बंसल ने बताया कि कुत्ते, बंदर आदि जानवरों के काटने पर उपाय के तौर पर सबसे पहले घाव को पानी की तेज धार से साबुन से 10 से 15 मिनट तक धोना चाहिए। घाव साफ करने के बाद एंटीसेप्टिक क्रीम लगा सकते हैं। इसके बाद तत्काल विशेषज्ञ डॉक्टर के पास जाकर एंटी रैबीज वैक्सीन लगवानी चाहिए। घाव पर अपनी मर्जी से लाल मिर्च पाउडर या घर में इस्तेमाल होने वाली क्रीम आदि को नहीं लगाना चाहिए। (न्यूज़लाइन ब्यूरो)
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