उत्तर प्रदेश के महानिदेशक पुलिस राजीव कृष्ण ने यौन अपराध के मामलों में अब प्रथम सूचना रिपोर्ट (एफआईआर) दर्ज करने से लेकर आरोप पत्र तैयार करने तक सभी संबंधित अभिलेखों में संवेदनशील भाषा का इस्तेमाल करने के निर्देश पुलिस अधिकारियों को दिए हैं।
निर्देशों में एफआईआर, केस डायरी, विवेचना संबंधी दस्तावेज, पुलिस रिपोर्ट और आरोप पत्र में संवेदनशील, सम्मानजनक और गैर भेदभावपूर्ण भाषा के इस्तेमाल पर विशेष बल दिया गया है। निर्देशों में कहा गया है कि एफआईआर में घटना से जुड़ी जरूरी सूचना, बयान, चिकित्सकीय साक्ष्य, फॉरेंसिक सामग्री और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य को स्पष्ट रूप से दर्ज किया जाए।पीड़िता के चरित्र, पहनावे, वैवाहिक स्थिति, पूर्व यौन इतिहास या व्यक्तिगत जीवन से जुड़ी अनावश्यक जानकारी दर्ज न की जाए।
महानिदेशक पुलिस के निर्देशानुसार पीड़िता को दोषी ठहराने वाली भाषा शैली बचना होगा। शिकायत दर्ज कराने में हुई देरी को पीड़िता की विश्वसनीयता से नहीं जोड़ा जाएगा। चोट नहीं मिलने, घटना के बाद सामान्य व्यवहार करने या तत्काल शिकायत नहीं करने को भी सहमति का आधार नहीं माना जाएगा। सहमति को स्पष्ट और स्वतंत्र होना जरूरी बताया गया है। केवल विरोध नहीं करने या चुप रहने को सहमति नहीं माना जाएगा।
निर्देशों के अनुसार असहाय, बेबस, बेचारी आदि शब्दों की जगह पीड़िता शब्द का इस्तेमाल किया जाए। वहीं इज्जत लूट ली, लज्जा भंग, मर्यादा भंग, अपनी पवित्रता खो दी, पारिवारिक प्रतिष्ठा दाव पर लगी, वासना का शिकार, शारीरिक संबंध बनाए, बच्ची सहमति से आरोपी के साथ गई थी, पीड़िता ने शोर नहीं मचाया, सेक्स स्लेव जैसे से शब्दों का भी इस्तेमाल नहीं किया जाएगा। अठारह वर्ष से कम उम्र के बच्चों से जुड़े मामलों में विशेष सावधानी रखी जाएगी। साथ ही पीड़ित बच्चे की पहचान को भी गोपनीय रखना होगा। (न्यूज़लाइन ब्यूरो)
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