आगरा (प्रमोद कुमार अग्रवाल)। बरसात के मौसम में में कुत्ता, बिल्ली, चूह, भेड़, बकरी आदि जंतुओं के मूत्र से पीलिया हो रहा है। आंखें लाल होने के साथ यकृत को भी नुकसान पहुंच रहा है। मेडिकल की भाषा में इसे लेप्टोस्पायरोसिस कहा जाता है। इससे मरीज तेजी से बढ़ रहे हैं।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉक्टर अरुण श्रीवास्तव ने बताया कि बरसात में लेप्टोस्पायरोसिस और स्क्रब टायफस का खतरा अधिक होता है।लेप्टोस्पायरोसिस संक्रमित जंतुओं के संपर्क में आने से हो रहा है। इसके लक्षणों में ठंड के साथ तेज बुखार आना, सिर व मांसपेशियों में दर्द रहना, आंखें लाल होना और पीलिया होना है।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने बताया कि लेप्टोस्पायरोसिस बरसात में जल भराव के पानी के संपर्क में होने से होता है। ये त्वचा या फोड़े, फुंसी या घाव के जरिए अथवा मुंह में गंदा पानी जाने से पनपता है। बचाव के लिए गंदे वाले पानी के संपर्क से बचना चाहिए और खुले घाव को पानी से बचाने के लिए ढक कर रखना चाहिए।
उन्होंने बताया कि स्क्रब टायफस बीमारी संक्रमित घास और झाड़ियों में रहने वाले छोटे कीटों के काटने से होती है। इसमें काटने वाले स्थान पर काला निशान या पपड़ी पड़ जाती है। शरीर पर लाल चकत्ते, गिल्टी में सूजन, ठंड के साथ तेज बुखार, सिर व मांसपेशियों में दर्द, आंखें लाल होना जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। इससे बचने के लिए आसपास सफाई रखें, त्वचा पर कीट निवारक क्रीम लगाएं और झाड़ियां या घनी घास वाली जगह जाने से बचें।
संचारी रोग के नोडल अधिकारी डॉक्टर सुरेंद्र मोहन प्रजापति ने बताया कि बारिश में स्क्रब टायफस और लेप्टोस्पायरोसिस के खतरे को देखते हुए सभी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और जिला अस्पताल में इन बीमारियों के इलाज की व्यवस्था कर दी गई है। इसके अलावा एसएन मेडिकल कॉलेज में भी जांच एवं इलाज की सुविधा उपलब्ध है। इन दिनों बीमारियों को हल्के में नहीं लेना चाहिए बल्कि तत्काल अस्पताल जाकर जांच और इलाज करवाना चाहिए। (न्यूज़लाइन ब्यूरो)
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