आगरा (प्रमोद कुमार अग्रवाल)। कभी गर्मी तो कभी सर्दी, ये है बदलते मौसम की खास बात। ऐसे में रहन-सहन और खानपान में जरा सी भी लापरवाही बरती नहीं कि बीमार होते देर नहीं लगेगी। बदलते मौसम के चलते लोगों में बुखार, खांसी, जुकाम, सीने में जकड़न, गले में खराश, सिर, आंख व मांसपेशियों में दर्द, चिड़चिड़ापन जैसी समस्याएं देखने को मिल रही हैं।
डॉक्टरों की मानें तो इन दिनों अधिकांश ने धूप निकलने पर गर्म कपड़े उतार कर रख दिए, हवा में घूमें, ठंडे पानी से स्नान किया और आइसक्रीम एवं कोल्डड्रिंक का सेवन किया। बदलते मौसम का असर छोटे बच्चों पर भी पड़ रहा है। बच्चों में निमोनिया, बुखार पसली चलने, सीने में बलगम जमा होने के लक्षण मिल रहे हैं।
डॉक्टरों के अनुसार बदलते मौसम में गर्म कपड़े पहनकर रहें, गुनगुने पानी से स्नान करें, गुनगुना पानी पीएं, वायरल बुखार होने पर पैरासिटामाल लें, आइसक्रीम और कोल्डड्रिंक लेने से बचें। अपनी मर्जी से घर में रखे बुखार व खांसी के सिरप बच्चों को नहीं दें। सीने में कफ जमा होने या घरघराहट होने पर पानी की भाप ली जा सकती है। दमा के मरीज इनहेलर की डोज पहले ही की तरह लेते रहें।
क्षेत्रीय आयुर्वेद एवं यूनानी चिकित्सा विभाग के डॉक्टर लोकेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि बदलते मौसम का असर ऐसे लोगों पर ज्यादा होता है जिनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती है। आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति में गिलोय, घनवटी, तुलसी, लंवंगादि वटी, कंठ सुधार वटी जैसी औषधियों के सेवन से वायरल बुखार, जुकाम, खांसी, गले में दर्द आदि में फायदा पहुंचता है। इसके अलावा गुनगुने पानी में सेंधा नमक व हल्दी मिला कर दो बार गरारे करने और शहद में अदरक का रस मिला कर पीने से आराम मिलेगा।
डॉक्टर सिंह ने बताया कि इस मौसम में मेथी, बथुआ, पालक, गाजर, अदरक, लहसुन, संतरा, नीबू, अंगूर, बादाम, काजू, अखरोट आदि का सेवन अवश्य करना चाहिए। दूध, गुड़, टमाटर सूप, आयुष काढ़ा का इस्तेमाल करने से शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। बदलते मौसम में लस्सी, आइसक्रीम, शीतल पेय, कच्ची बर्फ, ज्यादा मिर्च मसाले वाले आहार के सेवन से बचना चाहिए। (न्यूज़लाइन ब्यूरो)
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