शुक्रवार, 19 जनवरी 2024

क्लास रूम में किधर हो ब्लैकबोर्ड

 किसी भी स्कूल, कॉलेज या कोचिंग सेंटर के विद्यार्थियों की सफलता के लिए अच्छी शिक्षा के साथ-साथ वहां क्लास रूम की स्थिति, ब्लैकबोर्ड और विद्यार्थियों के बैठने की सही दिशा का भी योगदान होता है। वास्तु नियमों के अनुरूप क्लास रूम होने से वहां पढ़ने वाले विद्यार्थियों में विलक्षण प्रतिभा और बेहतर ज्ञान देखने को मिलता है। ऐसे विद्यार्थी गैर शैक्षणिक गतिविधियों में भी आगे रहते हैं। 

   वास्तु नियमों के अनुसार विद्यार्थियों के लिए क्लास रूम केवल आयताकार या वर्गाकार होने चाहिए। क्लास रूम में ब्लैकबोर्ड को उत्तर या पूर्व दिशा की दीवार पर रखना चाहिए। पढ़ाई करते समय विद्यार्थियों का चेहरा भी उत्तर या पूर्व की तरफ रहना चाहिए। इसके अलावा क्लास रूम में प्रकाश व्यवस्था भी अच्छी हो। -- आचार्य प्रमोद कुमार अग्रवाल, ज्योतिष-वास्तु लेखक एवं सलाहकार, आगरा। 

गुरुवार, 18 जनवरी 2024

वास्तु दोष भी हो सकता है विवाह में देरी का कारण

  वास्तु शास्त्र का सम्बन्ध हमारे सम्पूर्ण जीवन से है। भवन और जमीन की स्थिति, शयन करने के तरीके, बेड की स्थिति आदि का प्रभाव किसी न किसी रूप में हमारे ऊपर अवश्य ही पड़ता है। वास्तु दोष होने पर कैरियर, धन, संतान, दाम्पत्य जीवन, संतान की पढ़ाई और उनके विवाह आदि में समस्याएँ आने लगती हैं। 

   सब कुछ ठीक होने के बावजूद अगर विवाह योग्य लड़के अथवा लड़की के विवाह में अनावश्यक देरी हो रही हो तो इसका कारण जन्म कुंडली में ग्रह दोष या वास्तु दोष हो सकता है। वास्तु दोष की वजह से विवाह में देरी के निम्न कारण हो सकते हैं : 

   वास्तु के अनुसार गलत दिशा में लगाया गया बेड विवाह में बाधक होता है। लड़के को सदैव पूर्व या उत्तर-पूर्व दिशा अर्थात ईशान कोण में तथा लड़की को उत्तर-पश्चिम दिशा अर्थात वायव्य कोण में ही अपना बेड लगाना चाहिए।  

   बेड दीवार से अलग हटकर लगाना चाहिए। दीवार से सटाकर लगाया हुआ बेड दोषपूर्ण माना जाता है। बेड पर बैठकर भोजन करने से बचना चाहिए। सोते समय करवट बायीं  तरफ ही रहे। दाहिनी ओर करवट लेकर सोने से मानसिक अस्थिरता एवं नकारात्मकता बनी रहती है।

    बेड के नीचे किसी तरह का कोई सामान, कागज, कबाड़ा आदि नहीं रखना चाहिए। अगर बेड बॉक्स वाला है तो इस बात का विशेष ध्यान रखें कि उसमें केवल ओढ़ने-बिछाने के कपडे, चादर, रजाई, गद्दे, तकिया आदि ही रखें जाएँ। अन्य सामान भरने से नकारात्मक ऊर्जा का संचार होने लगता है। जिससे विवाह में बाधा आती है। 

     जगह की कमी की वजह से यदि बॉक्स वाले बेड में अन्य सामान रखना मजबूरी हो तो इस नकारात्मक प्रभाव से बचने के लिए बेड के नीचे एक बाउल में समुद्री या सेंधा नमक रखें या फिर बेड के चारों पायों के नीचे तांबे की एक-एक स्प्रिंग लगा दें। --  आचार्य प्रमोद कुमार अग्रवाल, ज्योतिष-वास्तु लेखक एवं सलाहकार, आगरा। 

मंगलवार, 16 जनवरी 2024

नैऋत्य कोण के बढ़ने से आती हैं स्वास्थ्य समस्याएं

   घर के दक्षिण पश्चिम कोण यानि नैऋत्य कोण का बढ़ना भी वास्तु दोष उत्पन्न करता है। इसके कारण आर्थिक विकास में बाधा आती है एवं स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। 

   नैऋत्य कोण के इस वास्तु दोष को दूर करने के लिए दक्षिण पश्चिम दिशा में बढ़े हुए भाग को दक्षिण पूर्व विदिशा की सीध तक कवर्ड करा देना चाहिए। -- आचार्य प्रमोद कुमार अग्रवाल, ज्योतिष-वास्तु लेखक एवं सलाहकार, आगरा।

ईशान कोण का कटा होना है वास्तु दोष

   घर के उत्तर पूर्व कोण यानि ईशान कोण का कटा होना वास्तु दोष है। इसकी वजह से घर में रहने वाले लोगों के विकास में व्यवधान आते रहते हैं तथा सबसे बड़े पुत्र संतान को कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ता है। 

    इस दोष के निवारण के लिए ईशान कोण के कटे हुए भाग में परगोला बनवा कर भवन को आयताकार कर देना चाहिए। इसके साथ ही इस कोण में किसी भी तरह के निर्माण करने से भी बचना चाहिए। -- आचार्य प्रमोद कुमार अग्रवाल, ज्योतिष-वास्तु लेखक एवं सलाहकार, आगरा। 

ब्रह्म स्थान में न हो कोई निर्माण

 किसी भी घर के ब्रह्म स्थान में कोई निर्माण नहीं होना चाहिए क्योंकि यह एक ऐसा वास्तु दोष है जिसके कारण वहां रहने वालों को खर्चों में बढ़ोत्तरी और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जूझना पड़ सकता है।

    बचाव के लिए ब्रह्म स्थान को खुला एवं स्वच्छ रखने की सलाह दी जाती है। इसके अलावा ब्रह्म स्थान में तुलसी का पौधा लगाकर प्रतिदिन उस पर जल चढ़ा कर दीपक प्रज्ज्वलित करना चाहिए। -- आचार्य प्रमोद कुमार अग्रवाल, ज्योतिष-वास्तु लेखक एवं सलाहकार, आगरा। 

    

रविवार, 14 जनवरी 2024

अविवाहित कन्या का बेडरूम हो सही दिशा में

   यदि किसी अविवाहित कन्या के विवाह में अनावश्यक देरी हो रही है और लगातार प्रयास करने के बाद भी मनपसंद रिश्ता नहीं मिल रहा है तो हो सकता है कि उस कन्या का बेडरूम गलत दिशा में हो। 

    वास्तु शास्त्र के अनुसार अविवाहित कन्या का बेडरूम सदैव उत्तर पश्चिम दिशा में ही रखना चाहिए। ऐसा करने से कन्या का विवाह सही समय पर होने की संभावनाएं बढ़ जाती हैं। -- आचार्य प्रमोद कुमार अग्रवाल, ज्योतिष-वास्तु लेखक एवं सलाहकार, आगरा। 

आग्नेय कोण में न हो पानी का स्रोत

 आग्नेय कोण यानि दक्षिण-पूर्व विदिशा में पानी का स्रोत नहीं होना चाहिए। यह एक ऐसा वास्तु दोष है जिसके कारण दांपत्य जीवन में तनाव बना रहता है। 

   इस दोष से बचने के लिए आग्नेय कोण से पानी की पाइप लाइन उत्तर पूर्व विदिशा (ईशान कोण) अथवा उत्तर दिशा की तरफ ले जाकर वहां से घर के अंदर पानी की सप्लाई देनी चाहिए। 

   आग्नेय कोण में विद्युत एवं अग्नि से संबंधित उपकरण जैसे इंवर्टर, विद्युत मीटर, इलेक्ट्रिक फर्नेस, जनरेटर, बिजली या कोयले से संचालित होने वाली मशीने आदि स्थापित करनी चाहिए। -- आचार्य प्रमोद कुमार अग्रवाल, ज्योतिष-वास्तु लेखक एवं सलाहकार, आगरा। 

गुरुवार, 11 जनवरी 2024

पश्चिम व दक्षिण दिशा में लगाएं बड़े वृक्ष

मकान खरीदने के बाद अक्सर लोग मकान में पेड़-पौधे लगवाते हैं और जगह के अनुसार बगीचा बनवाते हैं। वास्तु शास्त्र में दिशाओं के अनुरूप वृक्ष लगाने के नियमों का उल्लेख किया गया है। इन नियमो के विपरीत जाकर वृक्ष लगाना कई समस्याओं की वजह बन सकता है।

   वास्तु शास्त्र के अनुसार किसी भी मकान की पूर्व एवं उत्तर दिशाओं में भूलकर भी बड़े व विशालकाय वृक्ष नहीं लगाने चाहिए। इन दोनों दिशाओं का अधिक से अधिक खुला रहना जरूरी है। बड़े एवं विशालकाय वृक्ष लगाने के लिए पश्चिम और दक्षिण दिशाओं को सबसे अच्छा माना गया है। 

     वास्तु शास्त्र में कहा गया है कि मकान की पश्चिम और दक्षिण दिशाओं को भारी रखना चाहिए। इन दिशाओं में ऊंचाई वाली दीवार या बड़े आकार वाले वृक्ष लगाने की सलाह दी जाती है। ऐसा करने से मकान में रहने वाले लोगों को आर्थिक, पारिवारिक एवं स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से कम जूझना पड़ता है।-- प्रमोद कुमार अग्रवाल, आचार्य प्रमोद कुमार अग्रवाल, ज्योतिष-वास्तु लेखक एवं सलाहकार, आगरा

बीम के नीचे सोना सेहत के लिए खतरा

 घर या किसी कार्यस्थल की छत पर बीम डली हुई है तो कोशिश यह करनी चाहिए कि बीम के नीचे न तो बैठने का स्थान हो और न ही सोने के लिए बेड। अन्यथा सेहत से जुड़ी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। यह एक प्रकार का वास्तु दोष है। 

   व्यावहारिक रूप से यह देखने में आया है कि बीम के नीचे बैठकर काम करने या फिर शयन करने वाले व्यक्ति को मानसिक और शारीरिक समस्याएं होने लगती हैं। ऐसे व्यक्ति प्राय: सिर दर्द, तनाव, अनिद्रा, जोड़ों में दर्द, मानसिक अस्थिरता का शिकार हो सकते हैं। 

  अगर जगह की कमी के कारण बीम के नीचे बैठकर काम करना या शयन करना मजबूरी है तो ़इसके दुष्प्रभाव से बचने के लिए छत पर बीम को ढ़कने वाली फॉल्स रूफ लगवा देनी चाहिए। ऐसा करने से बीम से होने वाले दोषों का असर कम हो जाता है। -- प्रमोद कुमार अग्रवाल, ज्योतिष-वास्तु आचार्य, आगरा

ड्रॉइंग रूम के नैऋत्य कोण में न लगाएं शीशा

 घर के अंदर ड्रॉइंग रूम के नैऋत्य कोण (दक्षिण पश्चिम विदिशा) में शीशे का लगा होना वास्तु दोष का कारण बन सकता है। इसके दुष्प्रभाव से उस घर में रहने वालों के मन में भ्रांतियां, पैरों में दर्द, आपसी प्रेम व हर्षोल्लास में कमी देखने को मिलती हैं। 

    अगर ड्रॉइंग रूम के नैऋत्य कोण में शीशा लगा हुआ है तो उसे हटा देना चाहिए। किसी कारण से वहां से शीशा हटाना संभव नहीं है तो इस वास्तु दोष के प्रभाव को कम या शून्य करने के लिए शीशे पर गहरे रंग की अपारदर्शी फिल्म, पर्दा या प्लाई लगा देना चाहिए।-- प्रमोद कुमार अग्रवाल, वास्तु आचार्य, आगरा

ईशान कोण में नहीं रखें कबाड़

घर का ईशान कोण यानि कि उत्तर पूर्व विदिशा को वास्तु शास्त्र में सबसे महत्वपूर्ण और पवित्र माना गया है। इस दिशा में कोई भी स्टोर या कबाड़ नहीं रखना चाहिए। ईशान कोण को सदैव खुला एवं स्वच्छ रखने की सलाह दी जाती है। 
    ईशान कोण में किसी भी प्रकार का भारी निर्माण, स्टोर या टॉयलेट नहीं रखना चाहिए। क्योंकि यह दिशा धार्मिक कार्य एवं पूजा पाठ के लिए शुभ मानी गई है। ईशान कोण में स्टोर या कबाड़ होने से घर में आर्थिक तंगी, पुरुष सदस्यों को शारीरिक व मानसिक कष्ट और अनावश्यक तनाव जैसी स्थिति समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। -- प्रमोद कुमार अग्रवाल, वास्तु आचार्य, आगरा। 

बुधवार, 10 जनवरी 2024

दक्षिण-पश्चिम कोण में लगा दर्पण देता है समस्याएं

घर के दक्षिण-पश्चिम कोण में लगा दर्पण परिवार में अशांति, तनाव, मानसिक रोग और पैरों में कष्ट जैसी समस्याएं दे सकता है। बचाव के लिए दर्पण को वहां से दूसरी जगह लगा देना चाहिए और यदि ऐसा करना संभव न हो तो दर्पण को मोटे कागज़, पर्दा, प्लाई, वॉलपेपर या काले रंग की फिल्म लगाकर ढ़क देना चाहिए।-- प्रमोद कुमार अग्रवाल

गलत न हो दुकान मालिक के बैठने की दिश

किसी दुकान या व्यावसायिक प्रतिष्ठान के मालिक (स्वामी) को कमरे की दीवारों के कोनों (कॉर्नर) की तरफ पीठ करके या कमरे के बीचोबीच या बीम के नीचे नहीं बैठना चाहिए, अन्यथा मालिक को शारीरिक व मानसिक रोग और आर्थिक समस्याओं से जूझना पड़ सकता है।-- प्रमोद कुमार अग्रवाल 

शनिवार, 11 नवंबर 2023

वास्तु अनुरूप पूजन से प्रसन्न होते हैं श्री लक्ष्मी गणेश

धार्मिक मान्यता के अनुसार देवी महालक्ष्मी समस्त प्रकार की चल व अचल संपत्ति, सिद्धि एवं निधियों की अधिष्ठात्री मानी जाती हैं। वहीं भगवान गणेश को बुद्धि, शुभ लाभ एवं सिद्धिदायक के साथ-साथ अमंगल और सभी विघ्नों के नाशक देव के रूप में स्वीकार किया गया है। इसलिए ज्योति पर्व दीपावली पर ऋद्धि और सिद्धि प्राप्त करने के लिए भगवान गणेश और महालक्ष्मी जी की विधिवत पूजा-अर्चना करने का विधान है। 

   कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या को दीपावली का पावन पर्व हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। इस दिन घरों के साथ ही सभी औद्योगिक प्रतिष्ठानों, दुकानों और व्यावसायिक संस्थानों में शुभ मुहूर्त में लक्ष्मी गणेश जी की पूजा की जाती है। दीपावली के दिन पूजा करते समय अगर वास्तु शास्त्र के नियमों का पालन किया जाए तो पूजा निष्फल नहीं जाती और देवी-देवताओं का भरपूर आशीर्वाद मिलता है। दीपावली के दिन वास्तु अनुरूप पूजा के लिए यहां दी गई बातों का ध्यान रखना चाहिए : 
* पूजा स्थल सदैव पूर्व या उत्तर दिशा अथवा ईशान कोण में रखना चाहिए। जिससे कि पूजा करते समय मुख पूर्व या उत्तर दिशा में रहे। दक्षिण दिशा में मुख करके कभी भी पूजन नहीं करना चाहिए। 
* पूजा स्थल को गंगा जल से पवित्र करते हुए हल्दी व आटे से चौक पूरना चाहिए। इसके बाद वहां चौकी या ऊंचे आसन पर नया लाल वस्त्र बिछाकर लक्ष्मी और गणेश की मूर्ति स्थापित करनी चाहिए। 
* पूजा स्थल पर ईशान कोण की तरफ शुद्ध जल से भरा कलश और मध्य में एक थाली में रुपये, चांदी के सिक्के, रोली, अक्षत, खील, बतासे, मिष्ठान आदि रखने चाहिए। जबकि धूपबत्ती और तेल के दीपक को दक्षिण दिशा की तरफ रखना चाहिए। शुद्ध घी का दीपक और जल से भरा शंख मध्य में रख सकते हैं। 
* दीपावली के दिन अपनी श्रद्धा के अनुसार मिट्टी के  11, 21, 31 या 51 दीपक शुद्ध सरसों के तेल में जलाकर घर या व्यापारिक स्थल पर सभी दिशाओं में रखने चाहिए। इसके अलावा शुद्ध घी का दीपक तुलसी जी के पौधे पर भी प्रज्ज्वलित करना चाहिए। 
* महालक्ष्मी और गणेश जी के पूजन में दूर्वा, कमल, चमेली, चंपा, गुलाब, बेला, गेंदा आदि के पुष्पों को ही लेना चाहिए। तुलसी, आक, मदार, मालती आदि के पुष्पों से महालक्ष्मी जी का पूजन निषिद्ध माना गया है। 
* शुभ मुहूर्त में लक्ष्मी और गणेश जी की पूजा के समय आठों दिशाओं में आठों सिद्धियों की पूजा कुंकुम व अक्षत से करते हुए निम्न मंत्र जाप करने चाहिए। 
पूर्व दिशा के लिए : ऊँ अणिम्ने नम:
अग्निकोण के लिए : ऊँ माहम्ने नम:
दक्षिण दिशा के लिए : ऊँ गरिम्णे नम:
नैऋत्य कोण के लिए : ऊँ लघिम्ने नम:
पश्चिम दिशा के लिए : ऊँप्राप्त्ये नम:
वायव्य कोण के लिए : ऊँ प्राकाम्ये नम:
उत्तर दिशा के लिए : ऊँ ईशिताये नम:
ईशान कोण के लिए : ऊँ वाशितायै नम:
* महालक्ष्मी जी के पूजन के समय ही उनके आठ स्वरूपों की पूजा करते हुए उनके मंत्रों का उच्चारण भी पूर्व या उत्तर दिशा में मुख करते हुए कर सकते हैं। इन आठ स्वरूपों के नाम इस प्रकार हैं-आद्य लक्ष्मी, विद्या लक्ष्मी सौभाग्य लक्ष्मी, अमृत लक्ष्मी, काक लक्ष्मी, सत्य लक्ष्मी, भोग लक्ष्मी और योग लक्ष्मी। 
* दीपावली पर पूजन संपन्न होने के बाद एक लाल रंग के नए चौकोर वस्त्र या थैली में पांच हल्दी की गांठ, साबुत धनिया, पांच कमलगट्टा, अक्षत, दूर्वा और पांच सिक्के रखने चाहिए। इसके बाद इसे धन रखने वाली तिजोरी या आलमारी में रख देना चाहिए। ध्यान रखना चाहिए कि जिस तिजोरी या आलमारी में इस थैली को रखा जाए, वह पूर्व या उत्तर दिशा की तरफ ही खुलनी चाहिए। 
---- वास्तु आचार्य प्रमोद कुमार अग्रवाल, आगरा

शुक्रवार, 14 अप्रैल 2023

किचन के लिए उपयोगी वास्तु टिप्स

* वास्तु शास्त्र के अनुसार किचन (रसोई) के लिए सही दिशा दक्षिण-पूर्व यानि आग्नेय कोण है। जगह की कमी हो तो किसी अन्य दिशा में बनी किचन में गैस चूल्हा हमेशा आग्नेय कोण में ही रखें। किचन में पीने का पानी उत्तर या पूर्व दिशा की तरफ रखना चाहिए। 

* भोजन बनाते समय गृहणी का चेहरा पूर्व दिशा में रहे। दक्षिण दिशा में चेहरा होने से स्वास्थ्य खराब होने की संभावना रहती है। 

* रात्रि में किचन में झूठे बर्तन छोड़ना वास्तु दोष है। सोने से पहले बर्तन मांज कर रखने चाहिए। ऐसा संभव न हो तो झूठे बर्तनों को पानी से धोकर रख दें।

* रात में किचन साफ करने के बाद एक तांबे के बर्तन में पानी भरकर पूर्व दिशा में रखें और सुबह उस पानी को पौधों में डाल दें। ऐसा करने से किचन के वास्तु दोषों के कारण नकारात्मक प्रभाव कम हो जाते हैं।-- प्रमोद कुमार अग्रवाल, आगरा

बुधवार, 21 सितंबर 2022

अंडरग्राउंड वाटर टैंक की सही दिशा

 अडरग्राउंड वाटर टैंक, हैंडपंप और समर के लिए पूर्व दिशा, उत्तरी ईशान कोण या पूर्वी ईशान कोण को सबसे उत्तम माना गया है। इससे उस वास्तु में सुख, संपत्ति, संतान, सम्मान और आरोग्य सुख की प्राप्ति होती है। 

  दक्षिण व पश्चिम दिशा, पश्चिमी या उत्तरी वायव्य कोण, पूर्वी या दक्षिण नैऋत्य कोण तथा वास्तु के बीचों बीच बोरिंग, हैंडपंप, कुआं, अंडरग्राउंड वाटर टैंक अथवा किसी भी प्रकार का कोई गड्ढा होना वास्तु दोष है। इसके कारण शारीरिक व मानसिक रोग, मुकदमेबाजी, चोरी, अकाल मृत्यु आदि समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। -- प्रमोद कुमार अग्रवाल, ज्योतिष-वास्तु लेखक एवं सलाहकार।

आग्नेय कोण में रखें गैस चूल्हा

किचन में दक्षिण-पश्चिम दिशा में खाना पकाने के लिए गैस का चूल्हा, स्टोव, अंगीठी, ओवन, इलेक्ट्रिक चूल्हा आदि का होना वास्तु दोष है। इसके कारण घर में रहने वाली महिलाओं का स्वास्थ्य खराब होने की संभावना बनी रहती है। यदि ऐसा है तो किचन में चूल्हा आदि को दक्षिण-पूर्व दिशा (आग्नेय कोण) की तरफ शिफ्ट कर देना चाहिए।--प्रमोद कुमार अग्रवाल, वास्तु आचार्य एवं लेखक, आगरा।

प्रवेश द्वार पर मांगलिक चिह्न

 भवन के प्रवेश द्वार पर हल्दी और चावल के आटे की पीठी से हाथ को मांगलिक चिंह के रूप में छापा जाता है। हाथ कर्म का प्रतीक है जबकि हाथ की चारों अंगुलियां व अंगूठा पंच तत्वों (जल, वायु, अग्नि, पृथ्वी व आकाश) का द्योतक है। माना जाता है कि इससे घर में सुख, शांति, आरोग्य और आपसी सद्भाव बना रहता है।-प्रमोद कुमार अग्रवाल, ज्योतिष-वास्तु लेखक एवं सलाहकार, आगरा। 

रविवार, 18 सितंबर 2022

ऐसे फोटो न लगाएं....

 घर के किसी भी कमरे में युद्ध के फोटो, इंद्रजाल के समान काल्पनिक फोटो, राक्षस, पहाड़ व जंगल के फोटो, नग्न या रोते हुए बच्चे, महिला व पुरुष के फोटो, हिंसक व जंगली जानवरों के फोटो अथवा गरीबी या भयानक स्थिति को दर्शाने वाले फोटो कभी भी नहीं लगाने चाहिए। -- प्रमोद कुमार अग्रवाल, वास्तु आचार्य एवं लेखक,आगरा। 

उत्तर पूर्व दिशा होती है महत्वपूर्ण

 घर की उत्तर-पूर्व दिशा को महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दिशा में भूमिगत जल स्रोत,बरामदा,पूजा घर,मंदिर,पोर्टिको,खुली जगह,बेसमेंट,बालकनी आदि बनवा सकते हैं। लेकिन इस दिशा में कोई भी भारी निर्माण,लैट्रिन,दीवार,सीढ़ी आदि के होने से धन,स्वास्थ्य व संतान संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।- प्रमोद कुमार अग्रवाल, वास्तु आचार्य एवं ज्योतिष-वास्तु लेखक, आगरा। 

पर्सन इंचार्ज के तौर पर एक ही अस्पताल को मिलेगा लाइसेंस

आगरा (प्रमोद कुमार अग्रवाल)। स्वास्थ्य विभाग द्वारा अब पर्सन इंचार्ज के तौर पर एक ही अस्पताल को लाइसेंस दिए जाने का निर्णय लिया गया है। एक स...