गुरुवार, 18 जनवरी 2024

वास्तु दोष भी हो सकता है विवाह में देरी का कारण

  वास्तु शास्त्र का सम्बन्ध हमारे सम्पूर्ण जीवन से है। भवन और जमीन की स्थिति, शयन करने के तरीके, बेड की स्थिति आदि का प्रभाव किसी न किसी रूप में हमारे ऊपर अवश्य ही पड़ता है। वास्तु दोष होने पर कैरियर, धन, संतान, दाम्पत्य जीवन, संतान की पढ़ाई और उनके विवाह आदि में समस्याएँ आने लगती हैं। 

   सब कुछ ठीक होने के बावजूद अगर विवाह योग्य लड़के अथवा लड़की के विवाह में अनावश्यक देरी हो रही हो तो इसका कारण जन्म कुंडली में ग्रह दोष या वास्तु दोष हो सकता है। वास्तु दोष की वजह से विवाह में देरी के निम्न कारण हो सकते हैं : 

   वास्तु के अनुसार गलत दिशा में लगाया गया बेड विवाह में बाधक होता है। लड़के को सदैव पूर्व या उत्तर-पूर्व दिशा अर्थात ईशान कोण में तथा लड़की को उत्तर-पश्चिम दिशा अर्थात वायव्य कोण में ही अपना बेड लगाना चाहिए।  

   बेड दीवार से अलग हटकर लगाना चाहिए। दीवार से सटाकर लगाया हुआ बेड दोषपूर्ण माना जाता है। बेड पर बैठकर भोजन करने से बचना चाहिए। सोते समय करवट बायीं  तरफ ही रहे। दाहिनी ओर करवट लेकर सोने से मानसिक अस्थिरता एवं नकारात्मकता बनी रहती है।

    बेड के नीचे किसी तरह का कोई सामान, कागज, कबाड़ा आदि नहीं रखना चाहिए। अगर बेड बॉक्स वाला है तो इस बात का विशेष ध्यान रखें कि उसमें केवल ओढ़ने-बिछाने के कपडे, चादर, रजाई, गद्दे, तकिया आदि ही रखें जाएँ। अन्य सामान भरने से नकारात्मक ऊर्जा का संचार होने लगता है। जिससे विवाह में बाधा आती है। 

     जगह की कमी की वजह से यदि बॉक्स वाले बेड में अन्य सामान रखना मजबूरी हो तो इस नकारात्मक प्रभाव से बचने के लिए बेड के नीचे एक बाउल में समुद्री या सेंधा नमक रखें या फिर बेड के चारों पायों के नीचे तांबे की एक-एक स्प्रिंग लगा दें। --  आचार्य प्रमोद कुमार अग्रवाल, ज्योतिष-वास्तु लेखक एवं सलाहकार, आगरा। 

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