रविवार, 2 अगस्त 2026

कार्यशाला में विशेषज्ञों ने दिया पुलिसकर्मियों को प्रशिक्षण

आगरा (प्रमोद कुमार अग्रवाल)। डिजिटल अरेस्ट, निवेश के नाम पर ठगी, फिशिंग लिंक, फर्जी कस्टमर केयर, सोशल मीडिया हैकिंग, एआई आधारित डीपफेक एवं वाइस क्लोनिंग, ऑनलाइन गेमिंग जैसे तरीकों से साइबर अपराधी लोगों को ठगी का शिकार बना रहे हैं। इनसे बचने के लिए लोगों को जागरूक रहने की आवश्यकता है।

      आगरा के पुलिस लाइन के शहीद प्रशांत मेमोरियल सभागार में साइबर जागरूकता कार्यशाला में पुलिस आयुक्त दीपक कुमार ने बोलते हुए कहा कि मौजूदा समय में पुलिस को भी नई नई तकनीक में पारंगत होना होगा। जन-जागरूकता को सबसे प्रभावित माध्यम बताते हुए पुलिस आयुक्त ने पुलिसकर्मियों से कहा कि वह लोगों को जागरूक करें। 

     पुलिस आयुक्त ने कहा कि साइबर अपराध केवल तकनीकी चुनौती नहीं बल्कि सामाजिक चुनौती बन चुकी है। एक कदम आगे रहने के लिए पुलिस बल को तकनीकी रूप से दक्ष, सतर्क और निरंतर अपडेट रहना आवश्यक है। पुलिस आयुक्त ने पुलिसकर्मियों से कहा कि वह अपने-अपने थाना क्षेत्र के विद्यालयों, महाविद्यालय, शिक्षण संस्थानों, सार्वजनिक स्थलों, व्यापारिक प्रतिष्ठानों में जाकर और थाने पर स्थापित साइबर हेल्प डेस्क पर आने वाले लोगों, विशेषकर वरिष्ठ नागरिक एवं सेवानिवृत्त कर्मचारियों को साइबर अपराधों के प्रति जागरूक करें। 

     कार्यशाला में अपराध के बदलते स्वरूप, अपराधियों की कार्य प्रणाली, डिजिटल जांच की चुनौतियों और बचाव के व्यावहारिक उपायों पर पुलिसकर्मियों को प्रशिक्षण दिया गया। साइबर एक्सपर्ट ने साइबर अपराधों की रोकथाम के बारे में जानकारी दी। कार्यशाला में साइबर एक्सपर्ट रक्षित टंडन, पुलिस उपायुक्त आदित्य सिंह, साइबर सेल और साइबर थाना के पुलिसकर्मी मौजूद रहे। (न्यूज़लाइन ब्यूरो)







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