आगरा (प्रमोद कुमार अग्रवाल)। एसएन मेडिकल कॉलेज के नेत्र रोग विभाग में एडवांस तकनीक के जरिए बुजुर्गों की कॉर्निया से युवाओं के जीवन में रोशनी लाने के लिए ऑपरेशन किए जा रहे हैं।
एसएन मेडिकल कॉलेज की नेत्र बैंक प्रभारी डॉक्टर शेफाली मजूमदार ने बताया कि कॉर्निया में तीन परत होती हैं। उम्र बढ़ने पर कई बार पहली परत खराब हो जाती है। इसे सिर्फ मेडिकल की पढ़ाई के लिए उपयोग किया जाता है। अब डीप एंटीरियर लैमेलर केराटोप्लास्टी तकनीक से 80 से 85 साल के बुजुर्गों की कम रोशनी वाली कॉर्निया भी ट्रांसप्लांट की जा रही है।
डॉक्टर मजूमदार ने बताया कि अत्याधुनिक कॉर्नियल ट्रांसप्लांट तकनीक के जरिए बुजुर्गों की कॉर्निया की बाहरी परत यानि स्ट्रोमा को ही उपयोग में लाया जा रहा है। नेत्रहीन युवाओं की कॉर्निया की अंदरूनी एंडोथेलियल परत स्वस्थ होती है, जबकि ऊपरी दोनों परत के खराब होने की वजह से दिखाई देना बंद हो जाता है।
उन्होंने बताया कि बुजुर्ग मरीजों की डाल्क तकनीक से ऊपरी दो परत को नेत्रहीन की पहली परत पर ट्रांसप्लांट कर दिया जाता है। इससे मरीज की आंखों की रोशनी आ जाती है और वह देखने लग जाता है। उन्होंने नेत्रहीनों के जीवन में रोशनी लाने के लिए लोगों से ज्यादा से ज्यादा नेत्रदान करने की अपील की है। (न्यूज़लाइन ब्यूरो)
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