शुक्रवार, 27 जून 2025

आगरा जोन में पुलिस विभाग की जमीन का हो रहा है डिजिटलाइजेशन

                      प्रमोद कुमार अग्रवाल

 आगरा जोन में पुलिस विभाग की जमीन को चिह्नांकन करने के साथ ही डिजिटलाइजेशन का कार्य भी किया जा रहा है। इसका उद्देश्य जोन में पुलिस विभाग की जमीन की जानकारी करना और जमीन को विभागीय कार्यों के लिए इस्तेमाल में लाने के लिए कार्य योजना तैयार करना है। इससे पुलिस विभाग की जमीनों से संबंधित पूरी जानकारी आसानी से उपलब्ध हो सकेगी और पुलिस विभाग की आवासीय एवं अन्य समस्याओं को दूर किया जा सकेगा। 

    एडीजी जोन अनुपम कुलश्रेष्ठ ने बताया कि आगरा, मथुरा, फिरोजाबाद, मैनपुरी, अलीगढ़ और हाथरस जनपदों में पुलिस विभाग की जमीनों का चिह्नांकन किया जा रहा है। इसके बाद राजस्व विभाग में जमीन के रिकॉर्ड की जांच कराई जाएगी। इसके लिए जमीन से संबंधित खसरा और खतौनी सहित पूरा विवरण मांगा गया है। इन जमीनों के चिह्नांकन के बाद एप के माध्यम से डिजिटलाइजेशन कराया जाएगा, जिससे कि पुलिस विभाग की जमीन के संबंध में पूरी जानकारी एक क्लिक पर उपलब्ध हो सके। (न्यूज़लाइन ब्यूरो) 

टीथर्ड ड्रोन कैमरों से होगी ताजमहल की निगरानी

                    प्रमोद कुमार अग्रवाल

 विश्वप्रसिद्ध ताजमहल की सुरक्षा के लिए टीथर्ड ड्रोन और एक सौ और कैमरों के माध्यम से निगरानी करने के लिए योजना तैयार की गई है। टीथर्ड ड्रोन की मदद से रेड जोन के साथ ही यलो और ग्रीन जोन में होने वाली सभी गतिविधियों पर नजर रखी जा सकेगी। 

    डीसीपी सिटी सोनम कुमार ने बताया कि एएसआई और सीआईएसएफ के अधिकारियों के साथ संपन्न हुई बैठक में ताजमहल की सुरक्षा व्यवस्था को और भी पुख्ता करने के लिए विचार विमर्श किया गया। इसके तहत मिले एंटी ड्रोन सिस्टम की मदद से ताजमहल के पांच सौ मीटर के दायरे में उड़ने वाले ड्रोन को गिरा दिया जाएगा। ड्रोन उड़ाने वाले ऑपरेटर की पहचान भी संभव हो सकेगी। 

    उन्होंने बताया कि टीथर्ड ड्रोन एक ऐसा विशेष ड्रोन है जो एक बार में बारह से चौदह घंटे तक की उड़ान भर सकता है। इसको एक रस्सी से बांध कर निश्चित ऊँचाई तक उड़ाया जा सकता है। इसमें लगे हाई रिज्योल्यूशन कैमरे दिन और रात संदिग्धों पर नजर रखने में सक्षम हैं। इसके वीडियो और सर्विलांस से पुलिस प्रशासन को काफी मदद मिलेगी। 

   डीसीपी सिटी ने बताया कि टीथर्ड ड्रोन के दो बार ट्रायल हो चुके हैं और जल्द ही इसे परिसर में लगा दिया जाएगा। ताजमहल परिसर के रेड और यलो जोन में सीसीटीवी कैमरों की संख्या में भी वृद्धि की जा रही है। वर्तमान में रेड जोन में 55 सीसीटीवी कैमरे लगे हैं। अब इनकी संख्या 150 तक की जा रही है। इन कैमरों की मदद से ताजमहल के चप्पे चप्पे पर नजर रखी जा सकेगी। यलो जोन में पुलिस कर्मियों की संख्या भी बढ़ाई जाएगी। (न्यूज़लाइन ब्यूरो) 

सांस और अस्थमा के मरीजों के लिए फायदेमंद है अनुलोम विलोम प्राणायाम

                     प्रमोद कुमार अग्रवाल

 सांस और अस्थमा जैसी बीमारी के शिकार मरीजों को सामान्य गति वाले प्राणायाम ही करने चाहिए। तेज गति वाले प्राणायाम ऐसे मरीजों को नुकसान भी पहुंचा सकते हैं। कोई भी प्राणायाम करने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह अवश्य लेनी चाहिए। 

    एसएन मेडिकल कॉलेज के वक्ष एवं क्षय रोग विभाग के अध्यक्ष डॉक्टर गजेंद्र सिंह ने बताया कि सांस और अस्थमा के मरीजों के लिए अनुलोम विलोम प्राणायाम फायदेमंद है। इस प्राणायाम में एक मध्यम गति से सांस लेने और छोड़ने की प्रक्रिया की जाती है। इससे श्वसन नलिकाओं के सिकुड़ने की संभावना नहीं होती है और फेंफड़ों में हवा की कुछ मात्रा भी बनी रहती है। 

   डॉक्टर सिंह ने बताया कि सांस और अस्थमा के मरीजों को कपालभाति प्राणायाम करने से बचना चाहिए क्योंकि इस प्राणायाम में सांस लेने और छोड़ने की गति अपेक्षाकृत अधिक होती है। इससे सांस छोड़ने के दौरान दबाव के कारण श्वसन नलिकाओं के सिकुड़ने की संभावना हो सकती है।

 डॉक्टर सिंह ने बताया कि सांस और अस्थमा के मरीजों को कोई भी व्यायाम या प्राणायाम करने से पहले अपने डॉक्टर या विशेषज्ञ डॉक्टर से परामर्श कर लेना चाहिए। इसके साथ ही अपनी मर्जी से दवाएं और इनहेलर का प्रयोग बंद नहीं कर देना चाहिए। (न्यूज़लाइन ब्यूरो) 

बरसात में भीगने से हो सकते हैं फंगल इंफेक्शन व पेट के रोग

                  प्रमोद कुमार अग्रवाल

बरसात के मौसम में वर्षा के पानी में भीगने और उमस से टायफाइड, त्वचा, कान और पेट के रोग होने की परेशानी बढ़ रही हैं। इसके अलावा इस मौसम में फंगल इंफेक्शन, एलर्जी, बाल टूटने और खुजली के कारण जख्म बनने की शिकायत भी आ रही हैं। 

   एसएन मेडिकल कॉलेज के त्वचा रोग के विभाग अध्यक्ष डॉक्टर यतेंद्र चाहर ने बताया कि त्वचा रोग विभाग की ओपीडी में इन दिनों जो मरीज आ रहे हैं उनमें बगल, जांघ, गर्दन पर फंगल इंफेक्शन, लाल दाने और एलर्जी की परेशानी मिली है। बरसात के मौसम में संक्रमण के कारण खुजली बढ़ रही है, जिससे जख्म भी बन रहे हैं। 

   डॉक्टर चाहर ने बताया कि मरीजों में बाल टूटने, सिर की एलर्जी, कान में पानी चले जाने से कान में दर्द, सूजन व खुजली, अपदूषित खान-पान की वजह से पेट में दर्द, उल्टी, दस्त, टायफाइड की परेशानी हो रही है। इन समस्याओं से बचने के लिए लोगों को बरसात के मौसम में कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए। 

   त्वचा रोग के विभाग अध्यक्ष ने बताया कि बरसात में भीगने पर गीले कपड़े देर तक पहनने से बचना और शरीर व बालों को सूखा रखना जरूरी है। बालों को सुखाने के लिए देर तक बालों को बांधकर न रखें। बाजार में बिकने वाले गले व पहले से काट कर रखे हुए फल, अपदूषित खाद्य सामग्री आदि न खाएं। पानी उबाल कर ठंडा करके पीएं। कान में पानी चले जाने की वजह से संक्रमण होने पर विशेषज्ञ डॉक्टर को दिखाएं। (न्यूज़लाइन ब्यूरो) 

सोमवार, 16 जून 2025

भारतीय न्याय संहिता, 2023 की महत्वपूर्ण धाराएं

* धारा-64: बलात्कार के लिए सजा (भारतीय दंड संहिता की धारा-376 ) 

* धारा-74: महिला की लज्जा भंग करने के आशय से हमला (भादंसं की धारा-354) 
* धारा-80: दहेज मृत्यु (भादंसं की धारा-304-B) 
* धारा-85: महिला के पति या नातेदार द्वारा क्रूरता (भादंसं की धारा-498A) 
* धारा-103: हत्या के लिए सजा (भादंसं की धारा-302)
* धारा-109: हत्या करने की कोशिश (भादंसं की धारा-307) 
* धारा-108: आत्महत्या के लिए दुष्प्रेरण ( भादंसं की धारा-306) 
* धारा-152: भारत की संप्रभुता, एकता और अखंडता को खतरे में डालने वाला कार्य करना 
* धारा-281: सार्वजनिक मार्ग पर लापरवाही से वाहन चलाना (भादंसं की धारा-279) 
* धारा-308: उद्दापन (भादंसं की धारा-385-389) 
* धारा-316: आपराधिक न्यासभंग के लिए सजा (भादंसं की धारा-406) 
* धारा-316: सरकारी सेवक, बैंकर, व्यापारी या एजेंट द्वारा आपराधिक न्यासभंग (भादंसं की धारा-409) 
* धारा-318: छल या धोखाधड़ी (भादंसं की धारा-420) 
* धारा-351(2&3): आपराधिक अभित्रास (भादंसं की धारा-506) 
*धारा-352: लोकशांति भंग करने को प्रकोपित करने के आशय से अपमान करना (भादंसं की धारा-504) 
*धारा-356: मानहानि (भादंसं की धारा-499) 

मंगलवार, 10 जून 2025

तेज धूप और गर्मी से हो रहे हैं डायरिया, पेट दर्द व बुखार, बरतें सावधानी

आगरा (प्रमोद कुमार अग्रवाल)। तेज धूप और गर्मी के चलते इन दिनों डायरिया, पेट दर्द, कमजोरी, घबराहट और बुखार से लोग पीड़ित हो रहे हैं। धूप में काम करने वाले लोगों में ये समस्या ज्यादा देखने को मिल रही है। बचाव के लिए समुचित सावधानी बरतने की जरूरत है। 

   एसएन मेडिकल कॉलेज के मेडिसिन विभाग के डॉक्टर चंद्र प्रकाश गौतम ने बताया कि तेज धूप के कारण मरीजों की संख्या बढ़ रही है। मरीजों में बुखार, पेट दर्द, उल्टी व दस्त और कमजोरी की परेशानी मिल रही है। कमला नगर निवासी बाल रोग विशेषज्ञ डॉक्टर युवराज सिंह ने बताया कि गर्मी के मौसम में बाजार के दूषित भोजन और दूषित पानी से बच्चों में डायरिया और टायफाइड के लक्षण दिखाई दे रहे हैं। समय पर इलाज नहीं कराने से शरीर में पानी की कमी होने पर बच्चों की हालत गंभीर भी हो सकती है। 

    डॉक्टर सिंह ने बताया कि गर्मी और तेज धूप के कारण होने वाली समस्याओं से बचने के लिए बच्चों को बाजार में खुले व गंदगी में बिकने वाली खाने-पीने की सामग्री से बचाना चाहिए। कुछ भी खाने से पहले हाथों को अच्छी तरह से साबुन से साफ करना जरूरी है। किसी फंक्शन में ज्यादा खाने से भी बचना चाहिए। इस मौसम में आने वाले रसदार फल, ककड़ी, खीरा, नारियल पानी, संतरा, तरबूज, खरबूजा आदि का सेवन अवश्य करें। इससे शरीर में पानी की कमी नहीं होगी और शरीर को जरूरी पोषक तत्व भी मिल जाएंगे। (न्यूज़लाइन ब्यूरो) 

लोको पायलट के तनाव को दूर करने के लिए रेलवे की पहल

आगरा (प्रमोद कुमार अग्रवाल)। रेलवे द्वारा लोको पायलटों की थकान दूर करने और उन्हें तनाव मुक्त रखने के लिए अनोखी पहल की गई है। इसके तहत आगरा कैंट रेलवे स्टेशन के पास रनिंग रूम में लोको पायलटों को योग और ध्यान कराया जाएगा। साथ ही उनके ठहरने और आराम के लिए वातानुकूलित कक्ष की व्यवस्था भी की गई है। 

     आगरा रेल मंडल की जन संपर्क अधिकारी प्रशस्ति श्रीवास्तव ने बताया कि उत्तर मध्य रेलवे के प्रयागराज डिवीजन में सबसे पहले इस व्यवस्था की शुरुआत की गई थी। अब आगरा डिवीजन के अंतर्गत आगरा कैंट रेलवे स्टेशन के पास रनिंग रूम में ट्रेन मैनेजर, लोकों पायलट और सहायक लोको पायलट के आराम के लिए विशेष व्यवस्थाओं के साथ रनिंग रूम को बेहतर बनाया गया है। 

    जन संपर्क अधिकारी ने बताया कि रनिंग रूम में एक योग कक्ष बनाया गया है। जहां लोको पायलट ड्यूटी करने के बाद योग कर सकते हैं। उनके लिए आर्ट ऑफ लिविंग के प्रशिक्षु रखे गए हैं। रनिंग रूम में इन रेल कर्मियों के ठहरने के लिए वातानुकूलित कक्ष हैं। जिनमें डबल बेड लगाए गए हैं। वे यहां बारह घंटे आराम कर सकते हैं। (न्यूज़लाइन ब्यूरो) 

बच्चों और किशोरों में बढ़ रही है डायबिटीज़

आगरा (प्रमोद कुमार अग्रवाल)। बच्चों और किशोरों में टाइप-1 डायबिटीज बढ़ रही है। इन्हें इंसुलिन देनी पड़ रही है। बच्चों में बढ़ती इस बीमारी से डॉक्टर चिंतित हैं। बच्चों और किशोरों को इस बीमारी से बचाने के लिए इलाज के साथ ही अन्य सावधानी बरतने की जरूरत है।  

   एसएन मेडिकल कॉलेज के डायबिटीज ओपीडी प्रभारी डॉक्टर प्रभात अग्रवाल ने बताया कि कॉलेज की हर शुक्रवार को ओपीडी कॉम्प्लेक्स-दो में डायबिटीज के मरीजों के लिए ओपीडी चल रही है। इसमें 281 मरीज रजिस्टर्ड हैं, जिनमें 276 बच्चे हैं। इनमें भी 271 बालक और 5 बालिकाएं हैं। इनकी उम्र एक साल से लेकर 16 साल तक है। इन मरीजों में ऑटो इम्युन बीमारी के कारण इंसुलिन नहीं बन रही है। इससे टाइप-1 डायबिटीज हो रही है। 


     डॉक्टर अग्रवाल ने बताया कि ऑटो इम्युन बीमारी में रोग प्रतिरोधक क्षमता विपरीत कार्य करने लगती है। इसमें प्रतिरक्षा प्रणाली स्वस्थ कोशिकाओं को हमला करके नष्ट कर देती है। इस बीमारी में थकान, जोडों में दर्द व सूजन, त्वचा पर चकत्ते पड़ना, बेवजह बुखार और वजन कम होने जैसे लक्षण दिखाई देते हैं।   
 
    एसएन मेडिकल कॉलेज के डॉक्टर आशीष गौतम ने बताया कि टाइप वन डायबिटीज में प्रतिरक्षा प्रणाली अग्नाशय में इंसुलिन बनाने वाली बीटा कोशिकाओं को नष्ट कर देती है। इसके कारण इंसुलिन बनना बंद हो जाता है। ऐसे में मरीजों को इंसुलिन दी जाती है। मुंह का सूखना, बार बार प्यास लगना, बार बार पेशाब आना और भूख ज्यादा लगना भी टाइप वन डायबिटीज के खतरे की संभावना होती है। ऐसे लक्षण होने पर डायबिटीज की जांच अवश्य करा लेनी चाहिए। (न्यूज़लाइन ब्यूरो) 

बार-बार तेल के उपयोग से बढ़ रहे हैं कैंसर और हृदय रोग के मरीज

              (प्रमोद कुमार अग्रवाल)  

   घर, रेस्टोरेंट, होटल, खाने की स्टॉल आदि में तेल को बार-बार गर्म करके उसमें खाद्य सामग्री बनाने और फिर उनका सेवन करने से कैंसर और हृदय रोगियों की संख्या में बढ़ोत्तरी हो रही है। इसके कारण रक्त में कॉलेस्ट्रोल बढ़ने से धमनियां संकुचित होने लगती हैं, जिससे हृदय आघात का खतरा बढ़ जाता है। 

   यह कहना है हृदय रोग विशेषज्ञों का। हृदय रोग और कॉलेस्ट्रोल के बढ़ते मरीजों के मद्देनजर खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन और नेशनल चैंबर की संयुक्त बैठक में वक्ताओं ने व्यापारियों को सलाह दी कि खाद्य तेल को अधिकतर तीन बार ही उपयोग में लाया जाए। 
   हृदय रोग विशेषज्ञ डॉक्टर राज कुमार गुप्ता ने बताया कि तेल को बार-बार गर्म करने से पॉलिसाइक्लिक एरोमैटिक हाइड्रोकार्बन और एल्डीहाइड जैसे कार्सिनोजेनिक तत्व भी बढ़ जाते हैं। इससे शरीर में सूजन और कैंसर का खतरा अधिक हो जाता है। इसलिए एक बार गर्म किए गए तेल को तीन बार से ज्यादा इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। खाद्य सामग्री पकाने के लिए उतना ही तेल लेना चाहिए जितना उस समय के लिए जरूरी हो। 
    सहायक आयुक्त खाद्य द्वितीय शशांक त्रिपाठी ने बताया कि खाद्य सामग्री बनाते समय तेल को अधिकतम तीन बार ही उपयोग में लाना चाहिए। इसके बाद बचे हुए तेल को बायो डीजल बनाने वाली कंपनियों को बेच सकते हैं। अगर कोई खाद्य सामग्री निर्माता ऐसा नहीं करता है तो खाद्य विभाग द्वारा डोम-24 यंत्र के माध्यम से उपयोग में लाए जा रहे तेल की टोटल पोलर कंपाउंड्स (टीपीसी) की जांच की जाएगी। अगर जांच में टीपीसी 25 से अधिक मिला तो मौके पर ही तेल को नष्ट करा दिया जाएगा। 
    मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी राजेश गुप्ता ने बैठक में व्यापारियों के तेरह सूत्री सवालों पर विस्तार से जानकारी दी। बैठक में विवेक जैन, संजय गोयल, संजय अग्रवाल, विकास चतुर्वेदी, राजेश अग्रवाल, सीताराम अग्रवाल, प्रवीन गोयल आदि मौजूद रहे। (न्यूज़लाइन ब्यूरो) 

जनपद न्यायालय आगरा में 22 फरवरी को लगेगा वृहद विधिक साक्षरता सेवा शिविर

                        प्रमोद कुमार अग्रवाल   राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण, नई दिल्ली एवं उत्तर प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, लखनऊ क...