@ किसी भी कुंडली के बारह भाव, बारह राशियां, अलग-अलग भावों में बैठे नौ ग्रहों की स्थिति व दृष्टि,ग्रहों की उच्चता व नीचता, महादशा व अंतर्दशा आदि बातों के गहन अध्ययन के आधार पर ज्योतिषविद् द्वारा जातक के पूछे गए प्रश्नों का उत्तर देते हुए समस्या के ज्योतिषीय समाधान की कोशिश की जाती है।
@ कुंडली के जिस भाव में चंद्रमा स्थित होता है, वहां जिस राशि का अंक होता है, उस अंक से संबंधित राशि ही जातक की जन्म राशि होती है। उदाहरणार्थ, अगर कुंडली के पांचवे भाव में छह का अंक है और चंद्रमा स्थित है तो छह के अंक की राशि के आधार पर जातक की जन्म राशि कन्या होगी। -- प्रमोद कुमार अग्रवाल, आगरा।
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