मंगलवार, 14 जनवरी 2025

सरल ज्योतिष ज्ञान-2

@ कुंडली के जिस भाव में जो राशि हो, उस राशि के स्वामी को ही उस भाव का स्वामी यानि भावेश कहते हैं। उदाहरणार्थ, पहले भाव में अगर मेष राशि है तो मेष के स्वामी मंगल को पहले भाव का स्वामी अर्थात लग्नेश कहा जाएगा।

@ छठे,आठवें व ग्यारहवें भाव के स्वामी कुंडली में जिन भावों में बैठते हैं,वे उन भावों का अनिष्ट (खराब) फल देते हैं। 

@ अगर किसी भाव का स्वामी अपने ही घर में बैठा हो तो वह उस भाव का अच्छा फल देता है।

@ कुंडली के ग्यारहवें भाव में जो भी ग्रह बैठेगा, वह शुभ फल देगा। -- प्रमोद कुमार अग्रवाल, आगरा। 

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