मानसिक और तंत्रिका संबंधी विकारों जैसे स्ट्रोक माइग्रेन मिर्गी, अल्जाइमर, मेनिन्जाइटिस, मल्टीपल स्क्लेरोसिस, चिंता, डिप्रेशन सिजोफ्रेनिया आदि से पीड़ित लोगों में जलवायु परिवर्तन और बढ़ता तापमान घातक हो सकता है।
एक न्यूरोलॉजिकल रिसर्च में कहा गया है कि जलवायु परिवर्तन की वजह से मौसम के पैटर्न में बदलाव हो रहा है। इसके चलते होने वाली मौसमी घटनाएं मानसिक बीमारियों से जूझ रहे लोगों की सेहत पर गहरा प्रभाव डाल रही हैं।
गर्मी के मौसम में बढ़ता तापमान दिन के साथ ही रात्रि में भी कम नहीं होता है। ऐसे में गर्म रातें लोगों की नींद को प्रभावित करती हैं। नींद पूरी नहीं होने से दिमाग से जुड़ी कई समस्याएं होने लगती हैं। बचाव के लिए कमरे के तापमान को संतुलित बनाने के अलावा शरीर को ठंडक प्रदान करने वाले आहार का सेवन करना चाहिए। -- प्रमोद कुमार अग्रवाल (न्यूज़लाइन ब्यूरो)