आगरा (प्रमोद कुमार अग्रवाल)। हत्या, डकैती, चोरी जैसे मामलों में अब विवेचना में लापरवाही नहीं बरती जा सकेगी। पुलिस कमिश्नर जे रविंदर गौड ने सीबीआई की तर्ज पर मामलों की बेहतर विवेचना की योजना तैयार की है। विवेचक को विवेचना ग्रहण करने के चौबीस घंटे के अंदर पूरा प्लान बनाकर देना अनिवार्य कर दिया गया है।
पुलिस कमिश्नर ने बताया कि विवेचक को घटना स्थल के निरीक्षण, वैज्ञानिक सबूत जुटाने की तारीख आरोपियों के नाम बढ़ाने और निकालने की ठोस वजह, केस की फाइल में पहले पन्ने पर दर्ज करनी होगी। एसीपी और डीसीपी विवेचना की निगरानी करेंगे। केस की विवेचना के दौरान हर स्तर पर जवाबदेही तय की जाएगी।
पुलिस कमिश्नर ने बताया कि आपराधिक मामलों की बेहतर विवेचना के लिए नई योजना तैयार की गई है। सीबीआई और सीबासीआईडी की तर्ज पर पुलिस द्वारा भी विवेचना की जाएगी। विवेचक को विवेचना से संबंधित पूरा प्लान बना कर देना होगा कि उन्होंने घटनास्थल पर जाकर क्या किया। केस में प्राथमिक स्तर पर क्या क्या सबूत जुटाए। आगे क्या कार्रवाई की जाएगी। केस में फाइनल रिपोर्ट और चार्ज शीट लगाने से लेकर सबूत जुटाने में देरी पर विवेचक बहाना नहीं बना पाएंगे।
पुलिस कमिश्नर ने बताया कि एक जुलाई से भारतीय दंड संहिता में बदलाव किया जा रहा है। इसमें न्याय प्रक्रिया को त्वरित करने का प्रयास किया गया है। इसके साथ ही केस में समय पर चार्ज शीट और फाइनल रिपोर्ट लगाने से लेकर अभियुक्तों को जल्द सजा दिलाने पर जोर है। इसे ध्यान में रखते हुए पुलिस और विवेचना के स्तर में बदलाव की कवायद की जा रही है। सही और समयबद्ध विवेचना के लिए एसीपी और डीसीपी की जवाबदेही भी तय की जा रही है। (न्यूज़लाइन ब्यूरो)
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