गुरुवार, 23 मई 2024

नवजात के शरीर का तापमान भी सही रखता है स्तनपान

आगरा (प्रमोद कुमार अग्रवाल)। नवजात शिशु को स्तनपान कराना शिशु की सेहत के लिए बहुत जरूरी है। गर्मी के मौसम में बढ़ते तापमान के बीच मां का दूध अमृत के समान काम करता है। स्तनपान नवजात के शरीर के तापमान को भी सही रखने में मदद करता है। बोतल से दूध पीने वाले शिशुओं के बीमार होने की दर मां का दूध पीने वाले शिशुओं की तुलना में कहीं ज्यादा देखी जाती है। 

    यह कहना है जिला अस्पताल की डॉक्टर नीता चिवाते का। उन्होंने बताया कि जो परिजन नवजात को मां के दूध की जगह बोतल का दूध पिला रहे हैं, उन्हें समझना चाहिए कि बोतल का दूध नवजात की सेहत के लिए कतई अच्छा नहीं है क्योंकि सिर्फ मां का दूध ही नवजात को विभिन्न बीमारियों से लड़ने के लिए ताकत प्रदान करता है। बोतल का दूध पीने वाले नवजात के पेट में दर्द, गैस बनने और पेट फूलने की शिकायत हो सकती है। 

   डॉक्टर चिवाते ने बताया कि जितना ज्यादा संभव हो नवजात को मां के साथ ही रखना चाहिए। जितने ज्यादा लोग शिशु को हाथ लगाते हैं, उतना ही नवजात की सेहत के लिए हानिकारक है। खुले में संक्रमण के बीच शिशु को चटाई या जमीन पर लिटाना भी उसके लिए घातक हो सकता है। अगर परिजन शिशु को मां से दूर रखते हैं तो मां के शरीर में हार्मोन नहीं बन पाते जिससे मां को दूध नहीं आता। इसलिए शिशु को ज्यादा से ज्यादा समय तक मां के साथ ही रखना चाहिए। 

      डॉक्टर चिवाते ने बताया कि अगर शिशु एक दिन में आठ बार पेशाब कर रहा है तो इसका मतलब उसका पेट भर रहा है। शिशु के स्वास्थ्य के लिए बहुत जरूरी है कि शिशु को छह महीने का होने तक मां के दूध के अलावा कोई भी बाहरी दूध, शहद, पानी, फलों का रस आदि नहीं देना चाहिए। अगर कभी किसी वजह से शिशु को मजबूरी में बाहरी दूध देना पड़ जाए तो दूध पिलाने वाली बोतल और निपल को साफ पानी में कम से कम पंद्रह मिनट उबाल लेना चाहिए। (न्यूज़लाइन ब्यूरो)

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