गुरुवार, 8 जुलाई 2021

वास्तु के अनुसार बनाएं सीढ़ियां

    मनुष्य के लिए आवासीय भवन या कमरा एक ऐसा मज़बूत सुरक्षा कवच होता है, जिसमें रहते हुए वह स्वयं को निश्चिन्त और सुरक्षित महसूस करता है। वास्तु शास्त्र के नियमों के अनुसार बने भवन या कमरे में रहते हुए जीवन में प्राप्त सुख-सुविधाओं का बिना किसी व्यवधान के उपभोग किया जा सकता है। दूसरे शब्दों में यह भी सकते हैं कि वास्तु के अनुसार बनी सीढ़ियां सकारात्मक प्रभाव देती हैं। 

   भवन निर्माण के दौरान भवन में अन्य निर्माण के साथ-साथ छत पर जाने के लिए सीढ़ियां भी बनवाई जाती हैं। वास्तु नियमों के अनुसार सीढ़ियां भवन के नैऋत्य कोण अर्थात दक्षिण-पश्चिम दिशा में ही दक्षिण से पश्चिम की ओर जाती हुईं बनवानी चाहिए। सीढ़ियों में अंधेरा रहना शुभ नहीं माना गया है, इसलिए सीढ़ियों में प्रकाश की समुचित व्यवस्था होनी आवश्यक है।

   सीढ़ियां हमेशा दाहिनी ओर ही होनी चाहिए। बायीं ओर सीढ़ियां बनवाना शुभ नहीं होता है। जगह के अभाव में सीढ़ियां पश्चिम या उत्तर दिशा में भी बनवाई जा सकती हैं। सीढ़ियां बनवाते समय इस बात का विशेष ध्यान रखना चाहिए कि सीढ़ियों में पगतियों की संख्या सदैव विषम अर्थात पांच, सात, नौ, ग्यारह, सत्रह ही हों। 

   अगर सीढ़ियां घुमावदार हैं तो उनमें रेलिंग अवश्य लगवाएं। सीढ़ियों को कभी भी त्रिकोण आकार में नहीं बनवाएं तथा दो सीढ़ियों के मध्य का अंतर नौ इंच से अधिक भी न रखें। इस बात का भी ध्यान रखें कि भवन के मुख्य द्वार के सामने से सीढ़ियां नहीं दिखाई देनी चाहिए। 

   वास्तु शास्त्र के अनुसार सीढ़ियों के नीचे पूजा स्थल, शयन कक्ष, बैठक अथवा शौचालय नहीं बनवाना चाहिए। भवन निर्माण के समय यदि जगह कम पड़ रही हो तो ऐसी स्थिति में सीढ़ियों के नीचे स्नानघर या स्टोर रूम बनवा सकते हैं।-- प्रमोद कुमार अग्रवाल, आगरा। 

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