शुक्रवार, 9 जुलाई 2021

श्रीमद्भभागवतगीता का भी है प्रयोजन

  भगवान श्री कृष्ण के मुखारविंद की अभिव्यक्ति है श्रीमद्भभागवतगीता। मनुष्य को इस भौतिक संसार से उबारने के लिए ही भगवान ने अर्जुन को निमित्त बनाकर जो ज्ञान दिया था, वही इस पवित्र ग्रंथ में वर्णित किया गया है। श्रीमद्भभागवतगीता ऐसे मनुष्यों के लिए प्रेरणा स्रोत है जो इस नश्वर संसार में मोह-माया के जाल में फसे हुए हैं। 
   श्रीमद्भभागवतगीता का परम उद्देश्य मनुष्य और सर्वशक्तिमान ईश्वर के मध्य प्रेम, श्रद्धा और विश्वास के संबंधों को मजबूत बनाने में सहयोग करना है। मनुष्य अपने मन के अनुसार भगवान के साथ मित्र, भाई, पिता, पति, गुरु, प्रेमी आदि किसी भी रूप में संबंध स्थापित करके उनकी सेवा कर सकता है। 
   श्रीमद्भभागवतगीता मनुष्य को प्रेरित करती है कि वह सांसारिक बंधनों से मुक्ति के लिए भगवान की शरण में आ जाए, निष्काम कर्म भाव से अपने दायित्वों का निर्वहन करता रहे, अपने को सदैव भगवान की शरण में मानते हुए उनका चिंतन करे और अपनी तामसिक प्रवृत्तियों का त्याग कर विशुद्ध सात्विक जीवन व्यतीत करे। -- प्रमोद कुमार अग्रवाल, आगरा

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

एफआईआरदर्ज करने से लेकर आरोप पत्र तैयार करने तक संवेदनशील भाषा का इस्तेमाल करने के निर्देश

 उत्तर प्रदेश के महानिदेशक पुलिस राजीव कृष्ण ने यौन अपराध के मामलों में अब प्रथम सूचना रिपोर्ट (एफआईआर) दर्ज करने से लेकर आरोप पत्र तैयार कर...