ज्योतिष शास्त्र में ग्रहों की शांति के लिए हवन किए जाने को श्रेष्ठ उपाय के रूप में स्वीकार किया गया है। वहीं वास्तु शास्त्र के अनुसार किसी भवन में से नकारात्मक ऊर्जा के प्रभाव को दूर करने के लिए वास्तु पूजन के साथ-साथ हवन करने का भी विधान है।
हवन के लिए जिस सामग्री का उपयोग किया जाता है, उसे समिधा कहा जाता है। समिधा में बहुत सारी जड़ी बूटियां मिली होती हैं। जिनके प्रज्ज्वलित होने से निकलने वाला धुआं वातावरण को शुद्ध और प्रदूषण रहित बना देता है। किसी ग्रह विशेष की शांति के लिए हवन के समय उस ग्रह से संबंधित समिधा का भी उपयोग किया जा सकता है।
नव ग्रहों में सूर्य की समिधा मदार है। इसी तरह चंद्र की समिधा पलाश, मंगल की समिधा खैर, बुध की समिधा चिचिड़ा, बृहस्पति की समिधा पीपल, शुक्र की समिधा गूलर, शनि की समिधा शमी, राहु की समिधा दूब और केतु ग्रह की समिधा कुश मानी गई है। इसलिए ग्रह के अनुसार समिधा लेकर विधि-विधान से मंत्र जाप करते हुए ग्रह शांति करनी चाहिए। -- प्रमोद कुमार अग्रवाल, ज्योतिष-वास्तु लेखक एवं सलाहकार, आगरा
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