ज्योतिष के अनुसार चंद्र ग्रह के नीच राशि का होने, शत्रु राशि या पाप ग्रहों के साथ संबंध स्थापित करने या चंद्र की महादशा में शनि का अंतर होने पर मनुष्य के शरीर में कई रोग हो सकते हैं। जिनमें मुख्य हैं, डायबिटीज, पीलिया, खांसी, अस्थमा, सर्दी-जुकाम, श्वांस रोग, पित्ताशय की पथरी, मासिक धर्म में अनियमितता, मानसिक थकान, शीत ज्वर, पागलपन या अन्य मानसिक रोग, अतिसार, मूत्र, पेट व नेत्र संबधी रोग आदि।
चंद्र के अशुभ प्रभाव से होने वाले रोगों से बचने के लिए जातक को प्रत्येक पूर्णमासी को उपवास रखते हुए रात में चंद्र को जल अर्पित कर घी का दीप प्रज्ज्वलित करना चाहिए। साथ ही पूर्ण श्रद्धा और विश्वास के साथ 'ऊं सों सोमाय नम:', 'ऊं नम: शिवाय' और 'एं क्लीं सोमाय नम:' मंत्रों का जप करना चाहिए। -- प्रमोद कुमार अग्रवाल, आगरा।
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