ज्योतिष शास्त्र के अनुसार सूर्य ग्रह के नीच का होने, पाप ग्रह से संबंध बनाने या शत्रु राशि में होने से जातक में अनेक रोग होने की संभावना बन जाती है। सूर्य ग्रह के रोग कारक प्रभाव से सिर, मस्तिष्क, ह्रदय, नेत्र, यकृत, त्वचा से संबंधित रोग, अपस्मार, पित्त ज्वर, पीलिया, शरीर में जलन, अस्थि भंग आदि हो सकते हैं।
उपाय: सूर्य के रोग कारक प्रभाव से बचने के लिए योग्य डॉक्टर की सलाह के अनुसार औषधि सेवन के साथ-साथ नियमित रूप से 'ऊं सूर्याय नम:' या 'ऊं घृणि सूर्याय नम:' मंत्र का जप करना चाहिए। -- प्रमोद कुमार अग्रवाल, आगरा।
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