शुक्रवार, 26 फ़रवरी 2021

गर्भवती महिलाओं को न सुलाएं आग्नेय कोण में

नवयुगल के मध्य अच्छे संबंध, शांति, प्रेम और इच्छित संतान प्राप्ति के लिए वास्तु शास्त्र में कुछ नियम दिए गए हैं। सानंद जीवन के लिए नवविवाहित जोड़े को पश्चिम दिशा में बना बेडरूम देना चाहिए। 

   वहीं गर्भवती महिला को कभी भी उत्तर-पूर्व (ईशान केण) और दक्षिण-पूर्व (आग्नेय कोण) में बने कमरे में नहीं सुलाना चाहिए। उसके कमरे में न तो अंधेरा रहे और न ही कमरे की दीवारों पर गहरा लाल, काला या कोई अन्य तड़क-भड़क वाला रंग हो रहा हो। 

   यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि बच्चे के जन्म के बाद महिला और बच्चे को पश्चिम दिशा में बने उस कमरे में सुलाएं जिसमें शुद्ध हवा के लिए पूर्व या उत्तर दिशा में खिड़कियां हों। -- प्रमोद कुमार अग्रवाल, आगरा। 

गुरुवार, 25 फ़रवरी 2021

रिश्तों को स्वेच्छा से निभाएं या पूर्ण विराम दें

रिश्तों को निभाने के दौरान क्या सही है और क्या गलत, ये अपनी-अपनी सोच पर निर्भर करता है। सबकी सोच एक जैसी हो ही नहीं सकती और न ही किसी की सोच को बदला जा सकता है।

   किसी भी रिश्ते को किस तरह से जिया जाए, ये बात सोच पर ही निर्भर करती है। एक छत के नीचे साथ-साथ रहते हुए भी रिश्तों में कोई लगाव या मिठास देखने को नहीं मिलती, वहीं कुछ रिश्ते ऐसे भी होते हैं जो कुछ ही समय में जीवन की दशा और दिशा, दोनों को बदल देते हैं। ऐसे रिश्तों में लगाव और मिठास का मिला जुला मिश्रण जीवन में खुशियों का अहसास कराता रहता है। 

   जब कोई रिश्ता जुड़ता है तो उसमें कोई न कोई तारतम्य तो होता ही है वरना रिश्तों की गहराई नहीं होती। किसी भी नए रिश्ते की शुरुआत में कोई अपेक्षा या लगाव नहीं होते, लेकिन जैसे-जैसे रिश्तों में गरमाहट आने लगती है, लगाव और अपेक्षाएं भी अपने आप जुड़ने लग जाती हैं। बस यहीं से रिश्तों का गणित गड़बड़ाने लग जाता है। जहां एक तरफ लगाव रिश्तों में मजबूती लाता है तो वहीं अपेक्षाएं रिश्तों को कमजोर बनाती हैं। ऐसी स्थिति में रिश्तों के निर्वहन में बहुत मुश्किल होने लगती है।

   जब कोई रिश्ता स्वत: ही जुड़ता है तो वह किसी भी दायरे को नहीं देखता, लेकिन आगे चलकर जब उस रिश्ते को दायरे से जोड़ दिया जाता है तो समस्याएं आना स्वाभाविक ही है। सच तो यही है कि कोई भी रिश्ता दायरे में बंधकर नहीं निभाया जा सकता और न ही कोई रिश्ता स्वार्थ, झूठ, धोखा या लालच की बुनियाद पर टिका रह पाता है। रिश्ते में आपसी स्नेह, प्रेम, समर्पण और सम्मान का होना जरूरी है।

   अगर रिश्तों के दौरान अपेक्षाओं का समावेश होने लगा है तो समझदारी इसी में है कि या तो उन रिश्तों को स्वेच्छा से अपेक्षाओं को पूरा करते हुए खुशी-खुशी जिया जाए या फिर हमेशा के लिए रिश्तों पर पूर्ण विराम लगा दिया जाए, क्योंकि आगे चलकर ऐसे रिश्तों से कोई भी खुशी हासिल होना संभव नहीं है। -- प्रमोद कुमार अग्रवाल, आगरा

दस तरह के पापों से बचना जरूरी

पुराणों के अनुसार प्रत्येक मनुष्य को अपने लोक-परलोक को सुधारने के लिए दस प्रकार के पापों से बचना चाहिए। दस प्रकार के पाप  तीन श्रेणियों में विभाजित किए गए हैं, जो इस प्रकार हैं:

तीन प्रकार के शारीरिक पाप: किसी की वस्तु को बिना मांगे ले लेना, किसी भी प्राणी के प्रति हिंसा करना और पराई स्त्री के साथ संबंध रखना।

 तीन प्रकार के मानसिक पाप: दूसरे की धन-संपत्ति को हड़पने की सोचना, मन से किसी के अनिष्ट का चिंतन करना और झूठा मरण-भय दिखाना। 

चार प्रकार के वाचिक पाप: किसी को कठोर वचन बोलना, झूठ बोलना, किसी की चुगली करना और अनाप-शनाप बातें बकना।-- प्रमोद कुमार अग्रवाल, आगरा

बुधवार, 24 फ़रवरी 2021

अरिष्ट व अनिष्ट को दूर करता है गुरु पुष्य योग

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार कुंडली के भाव और ग्रह की स्थिति योग को जन्म देती है। इसी तरह दिन में वार एवं नक्षत्र का संयोग भी योग बनाता है। योग शुभ व अशुभ हो सकते हैं। ज्योतिष में 27 प्रकार के नक्षत्रों का उल्लेख किया गया है। इनमें पुष्य नक्षत्र को सबसे श्रेष्ठ माना गया है। गुरुवार और रविवार को जब पुष्य नक्षत्र होता है तो गुरु पुष्य योग और रवि पुष्य योग बनता है। इस वर्ष 25 फरवरी को गुरुवार को पुष्य नक्षत्र के साथ गुरु पुष्य योग बन रहा है जो प्रातः 06:50 बजे से दोपहर 01:17 बजे तक रहेगा। 

महादेवी लक्ष्मी के अवतरण से जुड़ा है ये योग
मान्यता है कि गुरु पुष्य योग में धन व वैभव की देवी लक्ष्मी जी का अवतरण हुआ था। इसके अलावा यह भी मान्यता है कि देवताओं के गुरु बृहस्पति देव भी पुष्य नक्षत्र में उत्पन्न हुए थे। इसलिए बृहस्पति को पुष्य नक्षत्र का अधिष्ठाता देव माना जाता है। गुरुवार के दिन पुष्य नक्षत्र का संयोग बृहस्पति देव और देवी लक्ष्मी की कृपा से जुड़ा है। अरिष्ट और अनिष्ट को दूर करने तथा आर्थिक रूप से समृद्धि के लिए यह योग सर्वाधिक महत्वपूर्ण है। नारद पुराण के अनुसार पुष्य नक्षत्र में जन्म लेने वाला बच्चा धार्मिक, दयावान, सत्य बोलने वाला, बलशाली विविध कलाओं का जानकार और विद्वान होता है। 

शुभ कार्यों के लिए शुभ है गुरु पुष्य योग
गुरु पुष्य योग सभी योगों में प्रधान होने से इस योग में किए गए सभी शुभ कार्य सफल होते हैं। नया व्यापार करने, सोना, चांदी, नया वाहन या नई संपत्ति खरीदने, नये मकान और मंदिर का निर्माण करने जैसे कार्य इस योग में संपन्न किए जा सकते हैं। जन्म कुंडली में ग्रहों के विपरीत व अशुभ फल देने के बाद भी गुरु पुष्य योग शक्तिशाली माना गया है। इस योग के प्रभाव से कुंडली के सभी बुरे प्रभाव दूर हो जाते हैं। लेकिन विवाह कार्य के लिए यह योग शुभ नहीं माना गया है। मान्यता है कि एक श्राप के अनुसार गुरु पुष्य योग में संपन्न हुआ विवाह सुखकारी नहीं होता है। 

गुरु पुष्य योग में करें विशेष उपाय
गुरु पुष्य योग को अन्य योगों की तुलना में मंगलकारी और श्रेष्ठ माना गया है। धन संबंधी समस्या को दूर करने के लिए इस योग में मोती शंख को कार्य स्थल पर स्थापित करना चाहिए। महादेवी लक्ष्मी जी को प्रसन्न करने के लिए मोती शंख में जल भरकर रख सकते हैं। व्यवसाय में हुए घाटे की पूर्ति के लिए इस योग में मोती शंख तिजोरी में रखना शुभ होता है। घर में धन की कमी होने पर  गुरु पुष्य योग में विधि-विधान के साथ एकाक्षी नारियल पूजा स्थल पर रखना चाहिए। परिवार में प्रेम, स्नेह, सौहार्द, धन, ऐश्वर्य, शत्रुओं से भय मुक्ति और शांति बनाए रखने के लिए इस योग में लक्ष्मी स्तोत्र, कनकधारा स्तोत्र, विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ करते हुए भगवान विष्णु , लक्ष्मी, शिव एवं गणेश जी की उपासना करनी चाहिए। इस योग में श्रीयंत्र की स्थापना करना भी शुभ फल देने वाला है। जीवन में बेहतरी के लिए गुरु पुष्य योग में केसर, चने की दाल, गुड़, गेंहू, बेसन, पीले वस्त्र, पीले पुष्प, स्वर्ण, पीतल, हल्दी या केसर युक्त दूध या चावल आदि का दान करना शुभ फलदायी है। इसके अलावा इस दिन मंदिर की सफाई करें तथा लाल गाय को गुड़ व गुड़ से बनी मीठी रोटी खिलाएं। ऐसा करने से जीवन में कष्ट और समस्याओं से छुटकारा मिलने लगता है। -- प्रमोद कुमार अग्रवाल, आगरा। 

(यह लेख हिंदी दैनिक 'अमर उजाला' में दिनांक 25 फरवरी, 2021 को कल्पवृक्ष स्तंभ में पृष्ठ संख्या 08 पर प्रकाशित हुआ है।) 

मनुष्य में हो सकता है त्रिगुण प्रभाव

श्री मद्भभगवतगीता में मनुष्य के तीन गुणों, सत्त्वगुण, रजोगुण और तमोगुण का उल्लेख मिलता है। सत्त्वगुण से ज्ञान व सुख, रजोगुण से लोभ, अशांति व द्वेष और तमोगुण से मोह, आलस्य, निद्रा, अंधकार व गलत मार्ग की तरफ जाने की प्रवृत्ति विकसित होने लगती है। 

   हमारे सौर मंडल में मौजूद ग्रहों में भी इन्हीं गुणों की प्रवृत्ति होने से ये ग्रह मनुष्य की प्रकृति का निर्धारण करते हैं। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार सूर्य, चंद्र व बृहस्पति ग्रह सत्त्वगुणी, बुध व शुक्र ग्रह रजोगुणी तथा मंगल व शनि ग्रह तमोगुणी प्रवृत्ति के होते हैं।

   मनुष्य में ये तीनों गुण अलग-अलग अथवा मिश्रित स्वरूप में देखने को मिलते हैं। गर्भाधान के समय इन ग्रहों में से जो ग्रह बली रहते हैं, वे ही ग्रह अपनी प्रवृत्ति के अनुसार मनुष्य के जीवन के स्वरूप को बनाने में सहयोग करते हैं। इसलिए प्रत्येक मनुष्य को चाहिए कि वह स्वयं सभी के कल्याण के लिए सत्त्वगुणी बनने के लिए प्रयासरत रहे। -- प्रमोद कुमार अग्रवाल, आगरा। 

मंगलवार, 23 फ़रवरी 2021

आत्महत्या की वजह कहीं वास्तु दोष तो नहीं

आर्थिक नुकसान, गंभीर बीमारी, रोजगार न मिलना, प्यार में धोखा, मान सम्मान में दाग लगना, परिवार में कलह जैसी बहुत सी बातें आत्महत्या की वजह हो सकती हैं। लेकिन इसके अलावा भवन में वास्तु दोष भी परिवार के किसी सदस्य द्वारा आत्महत्या किए जाने का कारण हो सकता है। 

    भवन में उत्तर-पूर्व (ईशान) कोण, दक्षिण-पूर्व (आग्नेय) कोण और दक्षिण-पश्चिम (नैऋत्य) कोण दोषपूर्ण नहीं होने चाहिए, अन्यथा यहां बने कमरे में रहने वाले सदस्य मानसिक अवसाद, अशांति, तनाव, चिंता, उदासी, पागलपन आदि का शिकार हो सकते हैं।जब ये लक्षण जब उग्र रूप ले लेते हैं तो व्यक्ति आत्महत्या करने की कोशिश कर सकता है।

   भवन में उत्तर-पूर्व कोण का खुला व स्वच्छ रहना, उत्तर-पश्चिम क्षेत्र में हल्का वजनदार सामान रखना, दक्षिण-पश्चिम क्षेत्र का ऊंचा व भारी होना, ब्रह्म स्थान स्वच्छ व खाली, दक्षिण-पश्चिम एवं दक्षिण-पूर्व दिशा में किसी प्रकार का कोई गड्ढा, कुंआ या भूमिगत जल स्रोत का न होना शुभ माना जाता है। ऐसे भवन में रहने वाले लोग मानसिक रूप से स्वस्थ रहते हैं और विषम परिस्थिति आने पर भी आत्महत्या जैसा कदम नहीं उठाते। -- प्रमोद कुमार अग्रवाल, आगरा। 

जनपद न्यायालय आगरा में 22 फरवरी को लगेगा वृहद विधिक साक्षरता सेवा शिविर

                        प्रमोद कुमार अग्रवाल   राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण, नई दिल्ली एवं उत्तर प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, लखनऊ क...