ज्योतिष शास्त्र के अनुसार कुंडली के भाव और ग्रह की स्थिति योग को जन्म देती है। इसी तरह दिन में वार एवं नक्षत्र का संयोग भी योग बनाता है। योग शुभ व अशुभ हो सकते हैं। ज्योतिष में 27 प्रकार के नक्षत्रों का उल्लेख किया गया है। इनमें पुष्य नक्षत्र को सबसे श्रेष्ठ माना गया है। गुरुवार और रविवार को जब पुष्य नक्षत्र होता है तो गुरु पुष्य योग और रवि पुष्य योग बनता है। इस वर्ष 25 फरवरी को गुरुवार को पुष्य नक्षत्र के साथ गुरु पुष्य योग बन रहा है जो प्रातः 06:50 बजे से दोपहर 01:17 बजे तक रहेगा।
महादेवी लक्ष्मी के अवतरण से जुड़ा है ये योग
मान्यता है कि गुरु पुष्य योग में धन व वैभव की देवी लक्ष्मी जी का अवतरण हुआ था। इसके अलावा यह भी मान्यता है कि देवताओं के गुरु बृहस्पति देव भी पुष्य नक्षत्र में उत्पन्न हुए थे। इसलिए बृहस्पति को पुष्य नक्षत्र का अधिष्ठाता देव माना जाता है। गुरुवार के दिन पुष्य नक्षत्र का संयोग बृहस्पति देव और देवी लक्ष्मी की कृपा से जुड़ा है। अरिष्ट और अनिष्ट को दूर करने तथा आर्थिक रूप से समृद्धि के लिए यह योग सर्वाधिक महत्वपूर्ण है। नारद पुराण के अनुसार पुष्य नक्षत्र में जन्म लेने वाला बच्चा धार्मिक, दयावान, सत्य बोलने वाला, बलशाली विविध कलाओं का जानकार और विद्वान होता है।
शुभ कार्यों के लिए शुभ है गुरु पुष्य योग
गुरु पुष्य योग सभी योगों में प्रधान होने से इस योग में किए गए सभी शुभ कार्य सफल होते हैं। नया व्यापार करने, सोना, चांदी, नया वाहन या नई संपत्ति खरीदने, नये मकान और मंदिर का निर्माण करने जैसे कार्य इस योग में संपन्न किए जा सकते हैं। जन्म कुंडली में ग्रहों के विपरीत व अशुभ फल देने के बाद भी गुरु पुष्य योग शक्तिशाली माना गया है। इस योग के प्रभाव से कुंडली के सभी बुरे प्रभाव दूर हो जाते हैं। लेकिन विवाह कार्य के लिए यह योग शुभ नहीं माना गया है। मान्यता है कि एक श्राप के अनुसार गुरु पुष्य योग में संपन्न हुआ विवाह सुखकारी नहीं होता है।
गुरु पुष्य योग में करें विशेष उपाय
गुरु पुष्य योग को अन्य योगों की तुलना में मंगलकारी और श्रेष्ठ माना गया है। धन संबंधी समस्या को दूर करने के लिए इस योग में मोती शंख को कार्य स्थल पर स्थापित करना चाहिए। महादेवी लक्ष्मी जी को प्रसन्न करने के लिए मोती शंख में जल भरकर रख सकते हैं। व्यवसाय में हुए घाटे की पूर्ति के लिए इस योग में मोती शंख तिजोरी में रखना शुभ होता है। घर में धन की कमी होने पर गुरु पुष्य योग में विधि-विधान के साथ एकाक्षी नारियल पूजा स्थल पर रखना चाहिए। परिवार में प्रेम, स्नेह, सौहार्द, धन, ऐश्वर्य, शत्रुओं से भय मुक्ति और शांति बनाए रखने के लिए इस योग में लक्ष्मी स्तोत्र, कनकधारा स्तोत्र, विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ करते हुए भगवान विष्णु , लक्ष्मी, शिव एवं गणेश जी की उपासना करनी चाहिए। इस योग में श्रीयंत्र की स्थापना करना भी शुभ फल देने वाला है। जीवन में बेहतरी के लिए गुरु पुष्य योग में केसर, चने की दाल, गुड़, गेंहू, बेसन, पीले वस्त्र, पीले पुष्प, स्वर्ण, पीतल, हल्दी या केसर युक्त दूध या चावल आदि का दान करना शुभ फलदायी है। इसके अलावा इस दिन मंदिर की सफाई करें तथा लाल गाय को गुड़ व गुड़ से बनी मीठी रोटी खिलाएं। ऐसा करने से जीवन में कष्ट और समस्याओं से छुटकारा मिलने लगता है। -- प्रमोद कुमार अग्रवाल, आगरा।
(यह लेख हिंदी दैनिक 'अमर उजाला' में दिनांक 25 फरवरी, 2021 को कल्पवृक्ष स्तंभ में पृष्ठ संख्या 08 पर प्रकाशित हुआ है।)