आगरा (प्रमोद कुमार अग्रवाल)। असुरक्षित यौन संबंध स्थापित करने के बाद गर्भ ठहरने पर अपनी मर्जी से मेडिकल स्टोर से गर्भपात की दवाएं खाना बच्चेदानी में संक्रमण की वजह हो सकता है। इससे महिलाओं में संतान उत्पत्ति की संभावना कम हो रही है।
एसएन मेडिकल कॉलेज के स्त्री रोग विभाग के अध्ययन में पता चला है कि 35 प्रतिशत महिलाएं बांझपन की समस्या से जूझ रही है। इसमें गर्भपात की दवाएं बड़ी वजह बनती जा रही है। कॉलेज के स्त्री रोग विभाग की डॉक्टर रुचिका गर्ग ने बताया कि 28 से 35 साल की महिलाओं में बांझपन की समस्या देखी जा रही है। महिलाओं पर किए गए अध्ययन में 40 प्रतिशत में अंडाणुओं की कमी, 18 से 20 प्रतिशत में नली बंद मिलने और 40 प्रतिशत में पुरुषों में शुक्राणुओं की कमी वजह मिली है।
डॉक्टर गर्ग ने बताया कि ऐसी महिलाएं जो बार-बार गर्भवती होने के बाद गर्भपात की दवाएं खा लेती हैं, उनमें बच्चेदानी में संक्रमण, टीबी की गांठ, मासिक धर्म में गड़बड़ी और गर्भधारण करने में दिक्कतें आती है। जिसकी वजह से उनमें मां बनने की संभावना कम हो जाती है।
एसएन मेडिकल कॉलेज की स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉक्टर मीनल जैन ने बताया कि महिलाओं को अपनी मर्जी से बार-बार गर्भपात की दवाई का सेवन नहीं करना चाहिए। अपने वजन को नियंत्रित रखना चाहिए। फास्ट फूड, डिब्बा बंद भोजन और बाहर के तले खाने से बचना चाहिए।
डॉक्टर जैन ने बताया कि सफेद पानी आने और मासिक धर्म में गड़बड़ी होने पर महिला रोग विशेषज्ञ को अवश्य दिखाना चाहिए। अगर गर्भपात की दवा का सेवन करना जरूरी हो तो डॉक्टर के परामर्श के अनुसार अल्ट्रासाउंड करवा कर ही दवा का सेवन किया जाना चाहिए। बांझपन से बचने के लिए सही उम्र में शादी करना भी जरूरी है। सामान्यतया 22 से 30 वर्ष की उम्र में ही शादी कर लेनी चाहिए क्योंकि इस उम्र में महिलाओं में अंडाणुओं की गुणवत्ता सबसे श्रेष्ठ रहती है। (न्यूज़लाइन ब्यूरो)
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