प्रमोद कुमार अग्रवाल
@ वास्तु शास्त्र के अनुसार अग्नि एवं विद्युत संबधी कार्यों के लिए भवन या भूखंड की दक्षिण-पूर्व दिशा यानि आग्नेय कोण को शुभ माना गया है। इसलिए होलिका दहन के लिए भी सही दिशा आग्नेय कोण है।
@ जहां तक संभव हो, होलिका दहन आग्नेय कोण में ही किया जाए। होलिका दहन में कूड़ा-करकट, रबर, प्लास्टिक, दीमक लगी लकड़ी, हरे पेड़ आदि का प्रयोग नहीं करना चाहिए।
@ गाय के गोबर से बने कंडे, गूलरी, सूखकर स्वत: गिरी हुई आम की लकड़ी, पत्ते, कपूर, चंदन, लौंग, इलायची, गूगल, सूखा नारियल, हवन सामग्री आदि के साथ किया गया होलिका दहन स्वास्थ्य और पर्यावरण के लिए उत्तम रहता है।
@ होलिका दहन के समय होली की परिक्रमा करना, गेंहू या जौ की बाल तथा हरे होले भूनकर अपने इष्ट मित्र, परिवार के सदस्यों और परिचितों को देकर गले मिलना और खुद भी भुने जौ व होले खाना शुभ माना गया है।
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