उत्तर प्रदेश शासन के नए निर्देशों के बाद जनसुनवाई की रैंकिंग का तरीका बदल गया है। अब जनसुनवाई के निस्तारण की रिपोर्ट के बाद शिकायतकर्ता से कॉल द्वारा संपर्क किया जाना अनिवार्य कर दिया गया है। इससे जन शिकायतों के फर्जी निस्तारण की पोल खुल सकेगी।
आगरा के अपर जिलाधिकारी प्रोटोकॉल एवं नोडल अधिकारी जन सुनवाई प्रशांत तिवारी ने बताया कि उत्तर प्रदेश शासन द्वारा रैंकिंग के तरीके को बदल दिया गया है। अब शिकायतकर्ता को कॉल करना अनिवार्य कर दिया गया है। शिकायत के निस्तारण के बाद फीडबैक में अगर शिकायतकर्ता को कॉल करने पर उसके द्वारा यह कहा जाता है कि किसी ने संपर्क नहीं किया तो उस जिले की रैंकिंग खराब होगी।
उन्होंने बताया कि इसके अलावा निगेटिव फीडबैक वाली शिकायतों में भी अब अधिकारियों की मनमानी नहीं चलेगी। स्पेशल क्लॉज की आड़ में अधिकारी जिन शिकायतों का निस्तारण कर दिया करते थे, उन्हें भी अब निगेटिव फीडबैक में गिना जाएगा। विभागाध्यक्षों की व्यक्तिगत जिम्मेदारी सुनिश्चित की गई है। रैंकिंग के तरीके में हुए बदलाव से शिकायतों के फर्जी निस्तारण के मामलों में भी कमी आएगी।
अपर जिलाधिकारी प्रोटोकॉल ने बताया कि नई रैंकिंग व्यवस्था में जिस विभाग से संबंधित शिकायत है, उसके विभागाध्यक्ष को शिकायतकर्ता से कॉल पर अनिवार्य रूप से संपर्क करना होगा। यदि कॉल से संपर्क नहीं किया गया और शिकायतकर्ता द्वारा फीडबैक में कॉल न करने की बात कही गई तो माना जाएगा कि शिकायत का फर्जी निस्तारण हुआ है। ऐसे में फीडबैक को निगेटिव मानते हुए अंक कटेंगे।
याद रहे कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री द्वारा सभी विभागों से संबंधित शिकायतों की सुनवाई और समाधान के लिए आईजीआरएस पोर्टल बनाया गया था। जिसे प्रदेश में गुड गवर्नेंस का आधार माना जा रहा था। शासन स्तर पर फीडबैक लिए जाने के दौरान बहुत सी शिकायतों का फर्जी निस्तारण होने की पोल खुलने के कारण जिलाधिकारी की रैंकिंग पर निगेटिव असर पड़ता है और मुख्यमंत्री कार्यालय से भी जवाब तलब होता है। आगरा के जिलाधिकारी अरविंद मलप्पा बंगारी द्वारा नियमित जन सुनवाई की समीक्षा की जा रही है। जन शिकायतों के फर्जी निस्तारण के मामले में अधिकारियों का वेतन रोकने और नोटिस जारी करने की कार्रवाई भी की जा रही है।-- प्रमोद कुमार अग्रवाल (न्यूज़लाइन ब्यूरो)
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